Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में एक बार फिर मौसम किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकता है. बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान का असर 27 अक्टूबर से बस्तर में दिखाई देने की आशंका है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक तूफान आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है, जहां हवा की रफ्तार 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है. इसका असर बस्तर में भारी बारिश के रूप में दिख सकता है. खरीफ सीजन की धान की फसल पककर तैयार है और कई किसान कटाई की तैयारी में जुटे हैं. ऐसे में बारिश और तेज हवाएं खड़ी फसल को गिराने के साथ कटी हुई धान को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. पिछले दिनों बाढ़ और जलभराव से फसल गंवा चुके किसानों की चिंता अब और बढ़ गई है. दूसरी ओर ओडिशा के खातिगुड़ा बांध से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण इंद्रावती नदी के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है. संभावित खतरे को देखते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा ने प्रशासनिक अमले और बचाव दल को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. निचले और जलभराव वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है. अब सबसे बड़ी चुनौती किसानों की तैयार फसल को बचाने और संभावित बाढ़ से जनजीवन को सुरक्षित रखने की है.
बाढ़ प्रभावित के सामने विस्थापना की चुनौती
जगदलपुर. बस्तर के भेड़ाजपदर गांव में बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन ग्रामीणों के मन से खतरा अब तक नहीं टला है. सितंबर में आई बाढ़ ने गांव में ऐसी तबाही मचाई कि ग्रामीण अब अपने ही घरों में रहने से डर रहे हैं. ग्रामीणों के मुताबिक करीब चार दिनों तक घरों में पानी भरा रहा, जिससे घरेलू सामान, अनाज और कपड़े खराब हो गए. खेतों में खड़ी धान की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा, जबकि कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए. ग्रामीणों का दावा है कि इस बार करीब 170 मकान पूरी तरह उजड़ गए और लगभग 1400 की आबादी प्रभावित हुई. उनका कहना है कि गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है. राहत सामग्री मिलने के बावजूद ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग स्थायी समाधान और सुरक्षित स्थान पर बसाए जाने की है. इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने अपर कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई है. प्रशासन की ओर से नुकसान और परिस्थितियों का आकलन कर ग्रामीणों के साथ बैठक करने का आश्वासन दिया गया है. अब संभावित चक्रवाती बारिश के बीच ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है. सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार राहत से आगे बढ़कर विस्थापन पर ठोस फैसला लेगा, या ग्रामीणों को फिर अगली बाढ़ का इंतजार करना पड़ेगा?
टीबी उन्मूलन की चुनौती, मरीजों की पहचान से पूरा इलाज कराने तक पर जोर
सुकमा. सुकमा में टीबी के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाने के लिए अब मरीजों की जल्द पहचान और उपचार की निरंतरता पर जोर दिया जा रहा है. जिला स्तरीय बैठक में स्पष्ट किया गया कि केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से टीबी का उन्मूलन संभव नहीं है, बल्कि समुदाय की भागीदारी भी जरूरी है. लेप्रा सोसाइटी के टीबी प्रोजेक्ट के तहत सीएचएमओ सभाकक्ष में आयोजित बैठक में अधिकारियों ने बीमारी की रोकथाम और उपचार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की. डॉ. प्रवीण तेली ने टीबी के प्रमुख लक्षणों, जांच प्रक्रिया और उपचार की जानकारी साझा की. बैठक में सीएमएचओ, डीपीएम, डीटीओ और डीपीपीएम सहित संबंधित अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर निगरानी मजबूत करने के सुझाव दिए. संभावित मरीजों की समय पर जांच कराने और इलाज बीच में नहीं छोड़ने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर सहमति बनी. स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की टीम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और मितानिनों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया. बैठक में माना गया कि समय पर पहचान और नियमित उपचार से बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है. जिला परियोजना समन्वयक यशपाल जायसवाल ने सभी संबंधित टीमों से साझा लक्ष्य के लिए लगातार काम करने की अपील की. अब चुनौती इन फैसलों को बैठकों से निकालकर गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से लागू करने की है.
एक शिक्षक के भरोसे स्कूल, अनुपस्थिति के आरोपों से बच्चों की पढ़ाई पर सवाल
दंतेवाड़ा. जिले के बड़ेउसरी गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में बच्चों की पढ़ाई को लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं. ग्राम पंचायत जोबा के आश्रित ग्राम बड़ेउसरी स्थित स्कूल की प्रधान अध्यापिका वंदना दुबे पर ग्रामीणों ने अनियमित उपस्थिति और अध्यापन में लापरवाही के आरोप लगाए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में केवल एक शिक्षक पदस्थ है, ऐसे में उनकी अनुपस्थिति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है. शिकायत के अनुसार, 22 अक्टूबर को शाला प्रबंधन विकास समिति और पालकों की बैठक के दौरान प्रधान अध्यापिका स्कूल पहुंचीं, लेकिन उनकी उपस्थिति को लेकर लिखित सूचना उपलब्ध नहीं थी. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पहले समझाइश देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ. पालक-बालक बैठक आयोजित नहीं करने, पालकों से ऊंची आवाज में बात करने और स्कूल समय में मोबाइल फोन पर व्यस्त रहने की शिकायत भी की गई है. इन आरोपों को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को आवेदन सौंपा है. उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमित अध्यापन सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर दूसरे शिक्षक की व्यवस्था करने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि एक दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर वे स्कूल में ताला लगाने को मजबूर होंगे. अब शिक्षा विभाग के सामने शिकायतों की जांच कर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न होने देने की जिम्मेदारी है.
35 लाख की पुलिया पर सवाल, निर्माण स्थल की उपयोगिता की जांच की मांग
सुकमा. जिले में 35 लाख रुपये की पुलिया निर्माण स्वीकृति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. छिंदगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत गंजेनार के आश्रित ग्राम कस्तूरी के बिजगुड़ी मार्ग पर प्रस्तावित 10 मीटर पुलिया के निर्माण स्थल को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव दुर्गेश राय का आरोप है कि जिस स्थान पर न गांव है, न घर और न ही सड़क दिखाई देती है, वहां पुलिया निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि मंजूर कर दी गई. उन्होंने सवाल किया है कि स्वीकृति से पहले स्थल का भौतिक निरीक्षण किया गया था या नहीं. राय के मुताबिक प्रस्तावित स्थल पर भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा भूमि पूजन भी किया गया था. कांग्रेस नेता ने स्वीकृति निरस्त कर राशि को जरूरत वाले विकास कार्यों में लगाने की मांग की है. उन्होंने संबंधित विभाग के सब इंजीनियर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए एस्टीमेट तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की मांग की. उनका कहना है कि सरकारी धन खर्च करने से पहले निर्माण की वास्तविक जरूरत और ग्रामीणों को मिलने वाले लाभ का आकलन होना चाहिए. यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की गई है. फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय पक्ष सामने आना बाकी है. ऐसे में अब निगाहें प्रशासन की जांच पर हैं, जिससे स्पष्ट हो सके कि यह निर्माण जनहित की जरूरत है या स्थल चयन में चूक हुई है.

यातायात नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई, 72 मामलों में 23,900 रुपये का समन शुल्क
दंतेवाड़ा. जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की है. जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चलाए गए चेकिंग अभियान के दौरान मोटरयान अधिनियम के तहत 72 प्रकरण दर्ज किए गए. इन मामलों में कुल 23 हजार 900 रुपये का समन शुल्क वसूला गया. कार्रवाई के दौरान बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने के 17 मामलों में 5 हजार 100 रुपये वसूले गए. जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के 32 मामलों में 9 हजार 600 रुपये की कार्रवाई हुई. अन्य यातायात उल्लंघनों के 14 मामलों में 4 हजार 200 रुपये का समन शुल्क लगाया गया. दोपहिया वाहन पर तीन सवारी बैठाने के पांच मामलों में 2 हजार 500 रुपये वसूले गए. बिना पंजीयन वाहन चलाने, हेलमेट नहीं पहनने और सीट बेल्ट नहीं लगाने के मामलों में भी कार्रवाई की गई. पुलिस ने वाहन चालकों को वैध ड्राइविंग लाइसेंस और जरूरी दस्तावेज रखने की हिदायत दी है. साथ ही दोपहिया वाहन पर हेलमेट और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने की अपील की गई है. पुलिस का कहना है कि जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा, लेकिन सड़क सुरक्षा के लिए चालान के साथ-साथ वाहन चालकों की जिम्मेदारी भी अहम है.
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

