Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर दशहरा की पहचान सिर्फ विशाल रथ और अनूठी पूजा परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां सदियों पुरानी लोककलाएं भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं. इन्हीं में शामिल है मुंडा बाजा, जिसकी थाप इन दिनों दशहरा के धार्मिक आयोजनों में सुनाई दे रही है. इस पारंपरिक वाद्य का निर्माण कटहल की सार लकड़ी से किया जाता है, जिसके विशेष खोल पर बकरे की खाल चढ़ाई जाती है. बस्तर में पोटानार गांव के ग्रामीण इस कला को पीढ़ियों से सहेजते आ रहे हैं. मुंडा बाजा का इस्तेमाल मुख्य रूप से धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक पूजा विधानों में किया जाता है. करीब 600 साल से बस्तर दशहरा में इस वाद्य के उपयोग की परंपरा चली आ रही है. दंतेवाड़ा के प्रसिद्ध फागुन मेले में भी मां दंतेश्वरी की अगवानी के लिए मुंडा बाजा दल को आमंत्रित किया जाता है. हालांकि, बदलते दौर में इस पारंपरिक वाद्य और इसे बनाने वाले कारीगरों के संरक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है. ऐसे में बस्तर की इस अनमोल सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है.
तेंदुए के हमलों से वनांचल में दहशत, एक तेंदुआ पकड़ाया
कोंडागांव. धमतरी और कोंडागांव के वनांचल में तेंदुए के हमलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. धमतरी जिले के आमानारा गांव में ग्रामीणों पर हमला करने वाले तेंदुए को वन विभाग ने पकड़ लिया है, जिसके बाद इलाके में राहत की उम्मीद जगी है. जानकारी के मुताबिक, आमानारा में हमले से चार ग्रामीण घायल हुए थे और एक ग्रामीण की मौत की खबर भी सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है. उधर, धमतरी के कारीपानी में भी तेंदुए के हमले में कई ग्रामीणों के घायल होने की जानकारी मिली है. कोंडागांव जिले के बस्तर बुडरा गांव में भी तेंदुए ने पांच लोगों को घायल कर दिया. घायलों में महिलाओं के शामिल होने की जानकारी है, जबकि एक गर्भवती महिला की मौत की खबर की पुष्टि होना बाकी है. पकड़े गए तेंदुए में रेबीज की आशंका को देखते हुए उसकी चिकित्सकीय जांच की जा रही है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों क्षेत्रों में हुए हमलों के पीछे एक ही तेंदुआ जिम्मेदार है या नहीं. लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत है और अब वन विभाग की निगरानी पर सबकी नजरें टिकी हैं.
बस्तर की ढोकरा कला को राष्ट्रीय पहचान, बन्नू राम बैध को शिल्प गुरु अवार्ड
कोंडागांव. बस्तर की पारंपरिक ढोकरा शिल्पकला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले कोंडागांव के शिल्पकार बन्नू राम बैध का चयन प्रतिष्ठित शिल्प गुरु अवार्ड के लिए किया गया है. माकड़ी विकासखंड के बरकई गांव निवासी बैध ने पारंपरिक धातु शिल्प को सहेजने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उनकी कलाकृतियों में आदिवासी जनजीवन, लोक संस्कृति, देवी-देवताओं और प्रकृति की झलक देखने को मिलती है. वे प्राचीन लॉस्ट वैक्स यानी मधुच्छिष्ट तकनीक के माध्यम से ढोकरा कलाकृतियां तैयार करते हैं. इस पारंपरिक तकनीक में मोम की आकृति तैयार कर धातु की ढलाई से कलाकृति को अंतिम रूप दिया जाता है. बैध ने इस कला को संरक्षित रखने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है. केंद्रीय स्तर पर गठित चयन समिति की बैठक में उनके नाम को अंतिम रूप दिए जाने की जानकारी सामने आई है. देशभर से चयनित छह शिल्प गुरुओं में उनका नाम शामिल होना बस्तर के लिए गौरव की बात है. इस उपलब्धि से स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन मिलने और पारंपरिक कला को नई पहचान मिलने की उम्मीद है.
रावघाट खदान में परिवहन दर पर आर-पार की तैयारी, 910 रुपये प्रति टन की मांग
नारायणपुर. रावघाट खदान से लौह अयस्क परिवहन की दर में बढ़ोतरी नहीं होने से स्थानीय वाहन मालिकों और श्रमिकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति और संबद्ध यूनियनों ने अब आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है. समिति के मुताबिक, नारायणपुर से अंतागढ़ रेलवे रैक पॉइंट तक परिवहन के लिए 707 रुपये प्रति टन की दर मिल रही है, जो मौजूदा खर्च के हिसाब से नाकाफी है. महंगे डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स और जर्जर सड़कों के कारण वाहन मालिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ने का दावा किया जा रहा है. समिति ने परिवहन दर बढ़ाकर 910 रुपये प्रति टन करने की मांग रखी है. 13 अक्टूबर को खोड़गांव मिनी स्टेडियम में हुई बैठक में आंदोलन को लेकर रणनीति बनाई गई. इसके बाद जिला प्रशासन और भिलाई इस्पात संयंत्र के रावघाट परियोजना प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा गया. समिति ने मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम और परिवहन बंद करने की चेतावनी दी है. अब 17 अक्टूबर की निर्धारित समय-सीमा के बीच प्रबंधन के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं. मांगों का समाधान नहीं हुआ तो खदान क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है.
सांसद के आश्वासन पर बेरोजगारों का धरना स्थगित, भर्ती की तारीख का इंतजार
दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा में एल-1 और एल-2 भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे युवाओं ने सांसद महेश कश्यप के आश्वासन के बाद फिलहाल धरना स्थगित कर दिया है. दंतेवाड़ा युवा बेरोजगार संघ के बैनर तले युवा चार दिनों से आंदोलन कर रहे थे. गुरुवार को सांसद के जिला मुख्यालय पहुंचने पर युवाओं के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर धरनास्थल पर आने का अनुरोध किया. इसके बाद सांसद शाम करीब छह बजे प्रदर्शन स्थल पहुंचे और आंदोलनकारियों से चर्चा की. सांसद ने भरोसा दिलाया कि बस्तर दशहरा के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों, युवा संगठनों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों का दल दिल्ली जाकर केंद्रीय इस्पात मंत्रालय से भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा करेगा. उन्होंने पूर्व भर्ती के आधार पर अभ्यर्थियों को दोबारा अवसर देने और भर्ती जल्द शुरू कराने के प्रयास की बात कही. हालांकि, युवाओं का कहना है कि उन्हें अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि आश्वासन के बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी तो आंदोलन बड़े स्तर पर किया जाएगा. युवाओं ने प्रोजेक्ट नंबर चार में कथित अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग भी उठाई है. फिलहाल धरना स्थगित है, लेकिन युवाओं की निगाहें भर्ती की तारीख तय होने पर टिकी हैं.
पांच महीने से जंजीर में बंधे गंगा के इलाज की तैयारी, गांव पहुंचेगी डॉक्टरों की टीम
सुकमा. जिले के देवरपल्ली गांव में पैरों में जंजीर बांधकर रखे गए आदिवासी युवक गंगा के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने इलाज की पहल की है. गोरगुंडा पंचायत के इस गांव में युवक की स्थिति सामने आने के बाद मामले ने गंभीर चिंता पैदा कर दी थी. जंजीर बांधने को लेकर ग्रामीणों और परिवार के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल युवक को समुचित उपचार उपलब्ध कराने का है. मामले को गंभीरता से लेते हुए कोंटा के खंड चिकित्सा अधिकारी ने छह सदस्यीय डॉक्टरों की टीम गठित की है. जारी आदेश के मुताबिक, 17 अक्टूबर से डॉक्टर स्वास्तिक भगत के नेतृत्व में टीम गांव पहुंचकर उपचार शुरू करेगी. जरूरत पड़ने पर गंगा को उच्च स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इससे पहले भी युवक को सुकमा जिला अस्पताल ले जाकर इलाज शुरू किया गया था, लेकिन परिवार उसे वापस घर ले आया था. इसके चलते उसका उपचार नियमित रूप से नहीं हो सका. अब गांव में ही डॉक्टरों की टीम पहुंचने से इलाज जारी रहने की उम्मीद है. साथ ही युवक की सुरक्षा, गरिमा और उचित देखभाल सुनिश्चित करने की जरूरत है. अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग की यह पहल गंगा को नियमित उपचार दिलाने में कितनी कारगर साबित होती है.

धान में बालियां निकलने का समय, कमजोर बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
जगदलपुर. बस्तर में खरीफ धान की फसल अब अहम दौर में पहुंच रही है, लेकिन कमजोर बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ने लगी है. बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के प्रभाव से गुरुवार रात से मौसम में बदलाव देखने को मिला और आसमान में बादल छाने लगे. शुक्रवार को कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिल सका. कई जगह खेतों में पहले जमा पानी सूखने लगा है. ऐसे समय में धान की फसल में बालियां निकलने की प्रक्रिया शुरू हो रही है, जिसके लिए पर्याप्त नमी जरूरी मानी जाती है. खेतों में पानी की कमी रहने से फसल की बढ़वार और दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है. किसानों को उम्मीद थी कि आसमान में छाए बादल अच्छी बारिश लेकर आएंगे, लेकिन हल्की बूंदाबांदी से उनकी चिंता दूर नहीं हुई. अब किसान खेतों में नमी बनाए रखने के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. मौसम में बदलाव के बावजूद पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसल की स्थिति को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं. आने वाले दिनों में बारिश का रुख बस्तर के किसानों के लिए काफी अहम रहने वाला है.
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

