Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर आस्था, जनभागीदारी और सांस्कृतिक विरासत के साथ आगे बढ़ रही है. जोगी बिठाई की रस्म के बाद 13 अक्टूबर से जगदलपुर में चार पहियों वाले विशाल फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई है. मंगलवार देर रात रथ की पहली परिक्रमा पूरी हुई, जिसमें जगदलपुर और तोकापाल विकासखंड के 36 गांवों से पहुंचे 400 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए. परंपरा के अनुसार, मां दंतेश्वरी के प्रतिनिधि स्वरूप उनके छत्र को दंतेश्वरी मंदिर से लाकर प्रधान पुजारी प्रेम पाढ़ी ने फूल रथ पर विराजित किया. पूजा-अर्चना और अभिवादन की रस्म के बाद सिरहासार चौक से रथ रवाना हुआ और ग्रामीणों ने उसे खींचकर गोलबाजार तथा मावली माता मंदिर की परिक्रमा कराई. रथ रवाना होने से पहले जिला पुलिस बल के जवानों ने हर्ष फायर कर माता को सलामी दी. इस दौरान जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. करीब 52 घन मीटर लकड़ी से तैयार यह विशाल फूल रथ बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है. परंपरा के मुताबिक, मां दंतेश्वरी पांच दिनों तक मावली माता मंदिर की परिक्रमा करेंगी. इस दौरान श्रद्धालुओं की भागीदारी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी. दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी उदय चंद्र पाणिग्राही के अनुसार, पहले बस्तर महाराजा माता का छत्र लेकर रथ पर सवार होते थे, जबकि अब यह जिम्मेदारी प्रधान पुजारी निभाते हैं. मान्यता है कि काकतीय नरेश पुरुषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के बाद रथपति की उपाधि से जुड़ी परंपरा बस्तर में शुरू हुई थी. आज भी ग्रामीणों के सामूहिक श्रम और आस्था के सहारे निभाई जा रही यह रस्म बस्तर दशहरा को देश के अनूठे सांस्कृतिक आयोजनों में विशेष पहचान देती है.

कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार का वादा, बेंगलुरु में शोषण के आरोप

सुकमा. सुकमा की 12 आदिवासी युवतियां बेहतर भविष्य और रोजगार की उम्मीद लेकर बेंगलुरु पहुंचीं, लेकिन अब उन्हें अपने साथ कथित धोखाधड़ी और शोषण की शिकायत लेकर प्रशासन के दरवाजे खटखटाने पड़े हैं. मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाली इन युवतियों को 22 हजार रुपये मासिक वेतन, मुफ्त रहने-खाने और आठ घंटे की ड्यूटी का भरोसा दिया गया था. युवतियों का आरोप है कि जनरल ड्यूटी असिस्टेंट यानी जीडीए के पद पर नौकरी देने के बजाय उनसे मरीजों की देखभाल के साथ बर्तन धोने, झाड़ू-पोंछा लगाने और घरेलू काम कराए गए. उनका दावा है कि कई बार ड्यूटी के घंटे बढ़कर करीब 24 घंटे तक पहुंच जाते थे और भोजन की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी. प्रभावित युवतियों के मुताबिक, रोजगार के लिए करीब छह महीने तक चली प्रशिक्षण प्रक्रिया के बाद भी उन्हें वादे के अनुरूप नौकरी नहीं मिल सकी. जब उन्होंने काम छोड़कर सुकमा लौटने की बात कही, तो उनसे पैसे मांगने और चोरी के मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप है. पायल कुलदीप, हिमानी सुना, कल्याणी नाग, सुनीता पोडियामी, मीडियम और संगीता सहित प्रभावित युवतियों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर जांच की मांग की है. शिकायत में प्रशिक्षण कराने वाली इनविजन संस्था और बेंगलुरु की दर्शन एल्डर प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका की जांच कराने की मांग उठाई गई है. युवतियों ने कथित बकाया वेतन दिलाने, वापसी के नाम पर ली गई राशि की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ में ही अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने की अपील की है. अब सवाल यह है कि आदिवासी बेटियों को रोजगार से जोड़ने की योजना के तहत हुए इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होगी और उन्हें न्याय कब मिलेगा. हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आना बाकी है.

लिखित निर्देश के बाद भी गौरव पथ पर ट्रकों का कब्जा

दंतेवाड़ा. जिले के बचेली में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जारी पुलिस के निर्देशों का पालन होता नजर नहीं आ रहा है.नंदराज पेट्रोल पंप से पुराने मार्केट तक गौरव पथ के दोनों ओर खड़े ट्रक और भारी वाहन अब भी सड़क पर आवागमन के लिए परेशानी बने हुए हैं. थाना प्रभारी ने 9 अक्टूबर 2026 को बैलाडीला ट्रक एसोसिएशन को लिखित पत्र जारी कर सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों को हटाने के निर्देश दिए थे. इससे पहले हुई बैठक में भी तय किया गया था कि वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद गौरव पथ के दोनों ओर ट्रकों की पार्किंग नहीं की जाएगी. नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन मालिकों और चालकों के खिलाफ जुर्माना तथा वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी. इसके बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से पुलिस के आदेशों के पालन और ट्रक एसोसिएशन की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं. नवरात्रि और दशहरा के दौरान दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे सड़क पर आवाजाही बढ़ जाती है. ऐसे में सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों से यातायात बाधित होने और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने का खतरा बना हुआ है. इस स्थिति का असर केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षित आवाजाही पर भी पड़ रहा है. नगरवासियों की मांग है कि गौरव पथ को भारी वाहनों की अवैध पार्किंग से मुक्त कराया जाए और निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए.अब देखना होगा कि पुलिस लिखित आदेशों के पालन के लिए आगे क्या कदम उठाती है और त्योहारों के दौरान यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने में कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है.

बीईओ के खिलाफ शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

सुकमा. जिले के छिंदगढ़ विकासखंड में शिक्षा विभाग के भीतर चल रहा विवाद अब बड़े शिक्षक आंदोलन में बदलता नजर आ रहा है. खंड शिक्षा अधिकारी मनोज दुबे को पद से हटाने की मांग लेकर मंगलवार को 700 से अधिक शिक्षकों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया. शिक्षकों ने पंचायत भवन से तहसील कार्यालय तक रैली निकाली और कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा. शिक्षक संघ का आरोप है कि बीईओ की कथित प्रताड़ना से शिक्षक परेशान हैं और पहले भी इस मामले में जिला प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारी, जनप्रतिनिधियों तथा शिक्षा मंत्री तक शिकायतें की जा चुकी हैं. संघ के मुताबिक, कई बार पत्राचार और ज्ञापन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा. ब्लॉक अध्यक्ष धंसाया नाग ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर दशहरा अवकाश समाप्त होते ही शिक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर सकते हैं. शिक्षक जगन्नाथ नाग ने भी आरोप लगाया कि लंबे समय से शिकायतों की सुनवाई नहीं होने के कारण पूरे शिक्षक समुदाय में नाराजगी बढ़ी है. प्रदर्शन को स्कूल सफाई कर्मचारी संघ, ब्लॉक कांग्रेस और बस्तरिया राज मोर्चा का भी समर्थन मिला. शिक्षकों की बड़ी संख्या में भागीदारी के कारण क्षेत्र के कुछ स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है. अब प्रशासन के सामने शिक्षकों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और स्कूलों में सामान्य शैक्षणिक व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है. आंदोलन के बीच बड़ा सवाल यही है कि क्या दशहरा अवकाश के बाद टकराव बढ़ेगा या प्रशासन समय रहते कोई समाधान निकाल पाएगा.

आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर सवाल, 15 अधीक्षकों को नोटिस

सुकमा. जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में संचालित आश्रमों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है. कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर विभागीय टीमों ने जिले की आवासीय शिक्षण संस्थाओं का आकस्मिक और सघन निरीक्षण किया. निरीक्षण प्रतिवेदनों की समीक्षा में कुछ संस्थाओं में निर्धारित रोस्टर का पालन नहीं होने और मूलभूत व्यवस्थाओं में कमियां पाए जाने की बात सामने आई. इसके बाद प्रशासन ने संबंधित संस्थाओं के अधीक्षकों और अधीक्षिकाओं से जवाब तलब किया है. बालक आश्रम गुट्टागुड़ा, नीलावरम, मुनगा, नामापारा और मिरीवाड़ा सहित विभिन्न संस्थाएं इस कार्रवाई के दायरे में हैं. कन्या आश्रम चिंगावरम, पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास सुकमा तथा कोंटा, तोंगपाल और अन्य स्थानों के छात्रावासों को भी नोटिस जारी किया गया है. कुल 15 संस्थाओं के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस प्राप्त होने के दो दिन के भीतर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन का कहना है कि आवासीय संस्थाओं में बच्चों के पोषण, रहने की सुविधा, अनुशासन और शिक्षा की व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता. दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए आश्रम और छात्रावास केवल आवास नहीं, बल्कि शिक्षा और सुरक्षित जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं. ऐसे में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करना और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है. अब संबंधित अधीक्षकों के जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.

रावघाट-रायपुर मेमू सेवा की चर्चा, जिले तक रेल पहुंचने का इंतजार बरकरार

नारायणपुर. जिले में रेल कनेक्टिविटी को लेकर नई उम्मीदें जरूर जगी हैं, लेकिन जिला मुख्यालय तक ट्रेन पहुंचने की तस्वीर अभी साफ नहीं है. रेलवे बोर्ड के एक पत्र में रावघाट और रायपुर के बीच प्रस्तावित मेमू ट्रेन सेवा की समय-सारणी और संचालन संबंधी निर्देशों का उल्लेख है. प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, ट्रेन रावघाट से सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर रवाना होकर दोपहर 1 बजकर 5 मिनट पर रायपुर पहुंचेगी. वहीं रायपुर से दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर रवाना होकर शाम 7 बजे रावघाट पहुंचने का प्रस्ताव है. इस सेवा में ताड़ोकी, दल्लीराजहरा और दुर्ग प्रमुख ठहराव बताए गए हैं. प्रस्ताव के अनुसार, शनिवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन ट्रेन चलाने का उल्लेख है. हालांकि, उपलब्ध पत्र में नारायणपुर स्टेशन तक ट्रेन चलाने या रेल लाइन को जिले तक बढ़ाने की स्पष्ट मंजूरी का उल्लेख नहीं है. इसलिए रावघाट-रायपुर सेवा को नारायणपुर तक रेल पहुंचने की पुष्टि मानना फिलहाल सही नहीं होगा. अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में रेल संपर्क का विस्तार होने पर विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है. बेहतर कनेक्टिविटी से स्थानीय कृषि उत्पादों, कारोबार और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावनाएं बनेंगी. लेकिन इसके लिए अलग सर्वेक्षण, विस्तृत योजना, स्वीकृति और निर्माण कार्य जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी. नारायणपुर के लोगों की निगाह अब इस बात पर है कि रावघाट तक रेल संपर्क की पहल के बाद जिले और अबूझमाड़ को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम कब उठाए जाएंगे.

केके रेललाइन पर भू-स्खलन से यात्री और मालगाड़ी सेवाएं प्रभावित

जगदलपुर. बस्तर की रेल कनेक्टिविटी पर भारी बारिश और भू-स्खलन का असर अब लंबा खिंचता जा रहा है. केके रेललाइन पर मल्लीगुड़ा रेलवे स्टेशन के समीप हुए भू-स्खलन के कारण जगदलपुर की ओर यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित है. जानकारी के मुताबिक, 25 सितंबर को भारी बारिश के दौरान करीब 60 मीटर पटरी के नीचे की मिट्टी बह गई थी, जिससे रेल मार्ग असुरक्षित हो गया. इस घटना के बाद से यात्री ट्रेनें कोरापुट तक ही संचालित हो रही हैं और बस्तर की ओर रेल सेवा बहाल होने का इंतजार जारी है. रेलवे कर्मचारी और मशीनें क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने में जुटे हैं. राहत कार्य में एक दर्जन से अधिक जेसीबी और करीब 200 मजदूर लगाए जाने की जानकारी दी गई है. स्टेशन मास्टर श्याम सुंदर चंद्रा के अनुसार, नुकसान की गंभीरता को देखते हुए 22 अक्टूबर से पहले परिचालन बहाल होना मुश्किल है. उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि मरम्मत के दौरान दोबारा बारिश हुई, तो काम प्रभावित होने से बहाली में और देरी हो सकती है. रेल मार्ग बाधित होने का असर माल परिवहन पर भी पड़ा है. जानकारी के अनुसार, करीब 40 मालगाड़ियों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इससे लौह अयस्क के परिवहन और बस्तर को विशाखापत्तनम तथा रायगढ़ की दिशा से जोड़ने वाली रेल व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है. अब यात्रियों और कारोबारियों की निगाह मरम्मत कार्य पूरा होने तथा सुरक्षित रेल परिचालन की बहाली पर टिकी है. रेलवे के सामने चुनौती केवल पटरी की मरम्मत नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र में भविष्य में ऐसे नुकसान से बचाव के उपाय सुनिश्चित करने की भी है.

मुआवजे पर भड़के बाढ़ प्रभावित किसान, सर्वे टीम को लौटाया

बकावंड. बस्तर जिले के बकावंड जनपद के धोबीगुड़ा गांव में बाढ़ प्रभावित किसानों का गुस्सा अब राहत राशि के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है. सरकार की ओर से घोषित 8 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए किसानों ने राजस्व सर्वे टीम को बिना मुआयना किए वापस लौटा दिया. किसानों का कहना है कि हालिया बाढ़ में धान सहित दूसरी फसलें बर्बाद हो गई हैं और अब अगली खेती तथा परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा है. इंद्रावती नदी के आसपास के धोबीगुड़ा, मालगांव, गुमडेल, कोरपाल, कानापाल, उलनार, कारितगांव और बजावंड जैसे गांवों में फसल नुकसान की शिकायतें सामने आई हैं. प्रभावित किसानों के मुताबिक, एक एकड़ में करीब 21 क्विंटल धान की उपज होती है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 65 हजार रुपये बैठती है. उनका कहना है कि बीज, खाद, दवा, जुताई और मजदूरी सहित खेती की लागत ही करीब 30 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है. ऐसे में पूरी फसल नष्ट होने के बाद घोषित सहायता राशि को किसान अपनी वास्तविक क्षति की तुलना में बेहद कम मान रहे हैं. किसानों की मांग है कि खेतों में हुए नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाए और उसी के अनुरूप मुआवजा तय किया जाए. ग्राम पंचायत धोबीगुड़ा के सरपंच संतोष कश्यप ने किसानों को समझाइश देते हुए उनकी मांग जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने की पहल की है. उन्होंने प्रभावित किसानों से सांसद महेश कश्यप से मिलकर सामूहिक रूप से अपनी बात रखने की अपील की है. अब प्रशासन के सामने किसानों की आपत्तियों का समाधान करने, नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने और राहत को लेकर भरोसा बहाल करने की चुनौती है.

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