Bastar News Update : दंतेवाड़ा. शारदीय नवरात्र की पंचमी पर बस्तर दशहरा की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय दंतेवाड़ा में देखने को मिला.बस्तर राजपरिवार अपनी आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को दशहरा में शामिल होने का आमंत्रण देने मंदिर पहुंचा. राजपरिवार के उत्तराधिकारी कमलचंद भंजदेव, उनकी धर्मपत्नी भुवनेश्वरी देवी और राजमाता कृष्ण कुमारी देवी इस दौरान मौजूद रहे. राजपुरोहित के साथ पहुंचे राजपरिवार का मंदिर के पुजारियों, मांझी, मुखिया, चालकी, कुम्हार और सेवादारों ने स्वागत किया. इसके बाद राजपरिवार ने मां दंतेश्वरी और मावली माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. पूजा के उपरांत मां दंतेश्वरी को विनय पत्रिका भेंट कर बस्तर दशहरा में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया गया. बस्तर की परंपरा में यह आमंत्रण इसलिए विशेष है, क्योंकि दशहरा की शुरुआत से ही माईजी की सहभागिता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है. हर साल राजपरिवार नवरात्र की पंचमी पर दंतेवाड़ा पहुंचकर यह परंपरा निभाता है. आमंत्रण स्वीकार करने के बाद अष्टमी तिथि पर मां दंतेश्वरी की डोली जगदलपुर के लिए रवाना होगी. माईजी की डोली के जगदलपुर पहुंचने के बाद बस्तर दशहरा की धार्मिक परंपराओं को पूर्ण स्वरूप मिलता है. यह आयोजन बस्तर की राजपरंपरा, जनआस्था और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत के जीवंत रिश्ते को दर्शाता है.

केके लाइन बहाली के लिए दिन-रात जंग, 800 मजदूर और 80 मशीनें मैदान में

बस्तर. केके रेललाइन पर भूस्खलन के कारण पैदा हुआ संकट अब रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. मल्लीगुड़ा रेलवे स्टेशन के पास रेलमार्ग बाधित हुए 21 दिन बीत चुके हैं, लेकिन यात्री और माल परिवहन अब भी प्रभावित है. 25 सितंबर को हुए भूस्खलन में करीब 60 मीटर रेलखंड के नीचे की मिट्टी बह गई थी, जिससे पटरी को गंभीर नुकसान पहुंचा. घटनास्थल पर लगभग 40 फीट गहरा गड्ढा बनने से बहाली का काम और कठिन हो गया. पहाड़ से लगातार बहते पानी के कारण मिट्टी हटाने और रेललाइन को दोबारा सुरक्षित बनाने में बाधाएं आ रही हैं. हालात को देखते हुए रेलवे ने अब मरम्मत अभियान तेज कर दिया है. मौके पर जेसीबी, भारी ट्रक, ट्रैक्टर समेत करीब 80 मशीनें और वाहन लगाए गए हैं. करीब 800 मजदूर दिन-रात काम कर रहे हैं, जबकि विशाखापट्टनम और रायगड़ा रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी भी निगरानी कर रहे हैं. रेलमार्ग बंद होने से यात्री ट्रेनों की आवाजाही रुकी हुई है और लौह अयस्क की ढुलाई भी प्रभावित हुई है. इस व्यवधान से रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान होने के साथ यात्रियों और उद्योगों की परेशानी बढ़ी है. रेलवे सूत्रों के अनुसार, 18 अक्टूबर तक लाइन बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि परिचालन बहाली सुरक्षा जांच और कार्य की प्रगति पर निर्भर करेगी.

नेशनल हाईवे-30 पर एक रात में तीन मौतें, सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बस्तर. बस्तर जिले में नेशनल हाईवे-30 पर सड़क हादसों ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. बुधवार देर रात दो अलग-अलग दुर्घटनाओं में तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि एक युवती समेत तीन लोग घायल हो गए. पहला हादसा दहीकोंगा के पास हुआ, जहां बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही जान चली गई. मृतकों की पहचान काकड़ाबेड़ा निवासी आयतु राम मंडावी, उम्र 25 वर्ष, और नारायणपुर जिले के सुलेंगा निवासी अमित बेसरा, उम्र 18 वर्ष, के रूप में हुई है. इस दुर्घटना में घायल एक युवती समेत तीन लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया. दूसरी घटना सिटी कोतवाली क्षेत्र के बनियागांव स्थित नीलगिरि प्लांट के पास हुई. जानकारी के मुताबिक, डीएनके निवासी 24 वर्षीय कृष्णा समरथ दूधगांव के एक ढाबे से खाना लेकर बाइक से घर लौट रहा था. इसी दौरान वह अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया और गंभीर हादसे में उसकी मौत हो गई. दोनों दुर्घटनाओं में अज्ञात वाहन की भूमिका की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी. एक ही रात में तीन युवकों की मौत ने हाईवे पर रात के समय सुरक्षित आवागमन और दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर सवाल खड़े किए हैं. अब जरूरी है कि वाहन चालक गति और यातायात नियमों को लेकर सतर्क रहें तथा दुर्घटनाओं के कारणों की जांच कर प्रभावी सुरक्षा उपाय किए जाएं.

पांच महीने से जंजीर में युवक, मानसिक स्वास्थ्य के इलाज पर गंभीर सवाल

सुकमा. जिले के देवरपल्ली गांव से मानसिक स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा से जुड़ा चिंताजनक मामला सामने आया है. यहां आदिवासी युवक माड़वी गंगा को पिछले करीब पांच महीने से पैरों में जंजीर बांधकर रखे जाने का आरोप है. जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 से उसकी मानसिक स्थिति में उतार-चढ़ाव आने लगा था. परिजनों और ग्रामीणों ने शुरुआत में झाड़-फूंक और पूजा-पाठ के जरिए उसे ठीक करने का प्रयास किया. बाद में उसकी स्थिति दोबारा बिगड़ने पर उसे एक ऐसे परिवार के पास ले जाया गया, जहां प्रार्थना के माध्यम से उपचार किए जाने की बात सामने आई है. आरोप है कि युवक को घर से भागने और दूसरों के साथ विवाद करने से रोकने के लिए जंजीर से बांधा गया. कुछ लोगों ने इलाज के नाम पर उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया है. दूसरी ओर, युवक की देखभाल कर रहे लोगों का कहना है कि उसका व्यवहार उग्र होने और घरों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के कारण यह कदम उठाया गया. हालांकि, जंजीर से बांधकर रखने और कथित मारपीट की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है. मामला यह सवाल भी उठाता है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति को उचित चिकित्सकीय सहायता के बजाय इस तरह प्रतिबंधित रखना कितना उचित है. जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन युवक की स्थिति का आकलन कर उसे विशेषज्ञ उपचार, सुरक्षित देखभाल और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें.

अबूझमाड़ में सड़क नहीं, ग्रामीण खुद उठा रहे विकास का बोझ

नारायणपुर. अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. नारायणपुर जिले की ग्राम पंचायत गुदाड़ी के आश्रित गांव दुर्गीपारा में सड़क की बदहाली ने रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है. ओरछा से दुर्गीपारा और हांदावाड़ा जलप्रपात की ओर जाने वाला करीब 25 किलोमीटर का रास्ता बड़े पत्थरों और खराब पगडंडियों से भरा है. हालात ऐसे हैं कि बाइक और सामान्य वाहनों की आवाजाही भी कई जगह मुश्किल हो जाती है. सड़क की समस्या से परेशान ग्रामीण अब कुदाल, फावड़ा, गैंती और सब्बल लेकर खुद रास्ते से पत्थर हटाने में जुटे हैं. इसका सीधा असर राशन और जरूरी सामान की आपूर्ति से लेकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने तक पड़ रहा है. कई ग्रामीण पेयजल के लिए नदी-नालों पर निर्भर हैं, जबकि सड़क नहीं होने से बोर खनन और दूसरी सरकारी योजनाओं का काम भी प्रभावित होता है. शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है, क्योंकि दुर्गीपारा में अलग स्कूल भवन नहीं होने से घोटुल में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. गांव में आंगनबाड़ी भवन का भी अभाव है, वहीं मंडाली के स्कूल भवन में बारिश के दौरान पानी टपकने की समस्या सामने आई है. जिला पंचायत सदस्य एवं शिक्षा समिति सदस्य राकेश उसेंडी और गुड्डू उसेंडी ने गांवों का निरीक्षण कर समस्याएं सुनीं तथा प्रशासन से सड़क निर्माण और सुधार कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की. जनप्रतिनिधियों ने अधिकतम 10 दिनों में काम शुरू कराने की मांग उठाते हुए सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य और पेयजल की समस्याएं प्रशासन के सामने रखने का भरोसा दिलाया. अब चुनौती यह है कि ग्रामीणों की मांग और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन को जमीन पर काम में बदला जाए, ताकि अबूझमाड़ के इन गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंच सकें.

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