Bastar News Update : जगदलपुर. इंद्रावती नदी ने इस बार बस्तर के किसानों और ग्रामीणों के सामने दो अलग तस्वीरें पेश की हैं. बाढ़ के दौरान नदी का पानी खेतों और सड़कों तक पहुंचा तो जनजीवन प्रभावित हुआ. कई जगह रास्ते डूब गए और नदी किनारे की धान की फसल भी पानी में घिर गई. लेकिन यही बाढ़ अपने साथ ग्रामीणों के लिए मछलियों और दूसरे जलचरों की भरपूर सौगात भी लाई. ओडिशा की ओर से आई बाढ़ के पानी के साथ टेंगना, रोहू और कतला जैसी मछलियां पहुंचीं. ग्रामीण नदी किनारे पहुंचकर मछलियां और केकड़े पकड़ रहे हैं..जरूरत भर की मछली घर रखने के बाद बाकी बाजार में बेचकर आय अर्जित की जा रही है. इससे त्योहारों के मौसम में कई ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आमदनी मिल रही है. दूसरी ओर बेलगांव क्षेत्र में इंद्रावती का पानी सड़क और रपटे के ऊपर पहुंच गया. नगरनार स्टील प्लांट और आसपास के इलाकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई. जगदलपुर के पास पुराने पुल पर पानी चढ़ने से आवागमन रोकना पड़ा, जबकि हाई लेवल ब्रिज चालू रहा. अब नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है और लोगों को राहत की उम्मीद है. इंद्रावती बस्तर के लिए खतरा भी है और जीवन-यापन का बड़ा सहारा भी.
जेडी रेल लाइन परियोजना में सिंगल ट्रैक पर सवाल
जगदलपुर. दुर्ग-जगदलपुर रेल लाइन बस्तर के लिए सिर्फ एक नई रेल कनेक्टिविटी नहीं है. यह लाइन आने वाले वर्षों में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और यात्री सुविधाओं का बड़ा आधार बन सकती है. रावघाट से जगदलपुर के बीच 144 किलोमीटर हिस्से में जल्द काम शुरू होने की तैयारी है. लेकिन लाइन के सिंगल होने को लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं. बस्तर के लोगों को डर है कि कहीं यह लाइन भी सिर्फ माल परिवहन तक सीमित न रह जाए. केके लाइन का अनुभव बताता है कि सिंगल ट्रैक पर यात्री ट्रेनों का विस्तार आसान नहीं होता. जेडी लाइन से आठ से ज्यादा लौह अयस्क खदानों को जोड़ने की योजना है. भविष्य में बड़ी संख्या में मालगाड़ियों के संचालन की संभावना भी जताई जा रही है. ऐसे में यात्री और माल परिवहन के बीच संतुलन बड़ी चुनौती बन सकता है. नागरिकों का सुझाव है कि दोहरीकरण की जरूरत को अभी से योजना में शामिल किया जाए. भूमि अधिग्रहण भी एक बार में भविष्य की जरूरत के हिसाब से करने की मांग उठ रही है. लोग चाहते हैं कि नई रेल लाइन बस्तर के लिए केवल खनिज परिवहन का रास्ता न बने. बल्कि यह सस्ती और नियमित यात्री रेल सेवा का मजबूत माध्यम भी बने.
बस्तर से निकलेगा अयस्क, सवाल है फायदा स्थानीय यात्रियों को कितना?
जगदलपुर. जगदलपुर-दुर्ग रेल लाइन बस्तर के खनिज संसाधनों को देश के औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ेगी. इस लाइन से लौह अयस्क की कई खदानों को रेल नेटवर्क का सीधा लाभ मिलेगा. भिलाई इस्पात संयंत्र समेत 85 से ज्यादा स्पंज आयरन इकाइयों तक अयस्क पहुंचने की संभावना है. इससे माल परिवहन का दबाव इस रेल लाइन पर लगातार बढ़ सकता है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस पूरी व्यवस्था में यात्री सुविधा को कितना महत्व मिलेगा. बस्तर के लोग लंबे समय से बेहतर रेल कनेक्टिविटी की मांग करते रहे हैं. नई लाइन से दुर्ग और जगदलपुर के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है. लेकिन सिंगल लाइन होने पर मालगाड़ियों की प्राथमिकता यात्री ट्रेनों की राह रोक सकती है. यही वजह है कि सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने दोहरीकरण की मांग उठाई है. लोग चाहते हैं कि लाइन का इस्तेमाल सिर्फ खनिज ढुलाई तक सीमित न हो. दोहरी लाइन होने से माल और यात्री ट्रेनों को अलग-अलग संचालन की सुविधा मिल सकती है. इससे समय की बचत के साथ यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की गुंजाइश भी बनेगी. बस्तर की नई रेल कनेक्टिविटी का असली फायदा तभी होगा जब यात्री भी इसके केंद्र में हों.
जेडी रेल लाइन के लिए दोहरीकरण के हिसाब से भूमि अधिग्रहण की मांग
जगदलपुर. दुर्ग-जगदलपुर रेल परियोजना को लेकर अब सिर्फ पटरी बिछाने की नहीं, भविष्य की तैयारी की बात हो रही है. रावघाट से जगदलपुर के बीच 144 किलोमीटर हिस्से में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. इसी बीच नागरिकों ने परियोजना की दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखने का सुझाव दिया है. उनका कहना है कि यदि भविष्य में दोहरीकरण होना ही है तो जमीन अभी से उसी हिसाब से चिन्हित हो. इससे आने वाले समय में दोबारा भूमि अधिग्रहण की जरूरत कम होगी. बार-बार भूमि अधिग्रहण से ग्रामीणों और वन क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. वहीं दोहरीकरण के लिए अभी से जगह सुरक्षित होने पर भविष्य का विस्तार आसान होगा. परियोजना के निर्माण में पेड़ों और पर्यावरण का प्रभाव भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. इसलिए योजना ऐसी होनी चाहिए जिसमें विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे. नागरिकों का कहना है कि अधूरी सोच के साथ बनाई गई लाइन भविष्य में बड़ी बाधा बन सकती है. जेडी लाइन को सिर्फ आज की जरूरत नहीं बल्कि अगले कई दशकों की जरूरत के हिसाब से तैयार करने की मांग है. बस्तर में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने का मौका मिला है तो इसका पूरा लाभ सुनिश्चित करना जरूरी है. दोहरीकरण की तैयारी पहले से होने पर भविष्य की लागत, समय और जमीन विवाद भी कम किए जा सकते हैं.
आफ्टर केयर से युवाओं को नई राह
जगदलपुर. बाल देखरेख संस्थाओं से बाहर निकलने वाले युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती आगे की राह तय करने की होती है. बस्तर में आफ्टर केयर कार्यक्रम ऐसे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है. बाल कल्याण समिति के मार्गदर्शन में युवाओं को शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है. बुकालू पोयामी और लक्ष्मण नाग को प्रशिक्षण के लिए एक-एक साइकिल दी गई है. इस छोटी सी मदद ने उनके लिए प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचना आसान कर दिया है. बुकालू को तीन महीने के माइक्रो फाइनेंस एग्जीक्यूटिव प्रशिक्षण में प्रवेश मिला है. वहीं लक्ष्मण नाग एक वर्षीय डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन कर रहे हैं. संस्था दोनों युवाओं की प्रशिक्षण फीस भी वहन कर रही है. कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सिर्फ प्रशिक्षण दिलाना नहीं बल्कि रोजगार से जोड़ना है. युवाओं की रुचि और क्षमता के अनुसार उनके लिए प्रशिक्षण का चयन किया जा रहा है. अब तक पांच युवाओं को इस पहल का लाभ मिल चुका है. जरूरी संसाधन मिलने से युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ने की बात सामने आई है. आफ्टर केयर कार्यक्रम इन युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दे रहा है.
दूध से लेकर पैक्ड खाद्य पदार्थों की हो जांच : बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा
जगदलपुर. बस्तर में दूध, क्रीम, पनीर और चीज की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच जांच की मांग तेज हुई है. बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा ने मामले में वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच की मांग की है. मोर्चे का कहना है कि किसी आरोप को बिना जांच सच मानना उचित नहीं है. लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़े सवालों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा. त्योहारों के दौरान दूध और उससे बने उत्पादों की खपत तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने निगरानी की बड़ी जिम्मेदारी होती है. मांग की गई है कि सिर्फ एक-दो उत्पादों तक जांच सीमित न रहे. दूध, मिठाई, नमकीन, तेल-घी, बेकरी और पैक्ड खाद्य पदार्थों की भी जांच हो. होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, डेयरी और कैटरिंग संचालकों के यहां भी निरीक्षण की बात कही गई है. लाइसेंस, लेबल, बैच नंबर, सामग्री और एक्सपायरी डेट की जांच की मांग की गई है. संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने अधिकृत प्रयोगशाला भेजने की मांग भी उठी है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. दोष साबित होने पर नियमों के तहत कार्रवाई और आम लोगों को सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराना सबसे अहम होगा.
हेलमेट बिना नहीं मिलेगा पंप पर पेट्रोल
कोण्डागांव. जिले के पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल न दिए जाने का निर्णय समय सीमा की बैठक में लिया गया. कलेक्टर नुपूर राशि पन्ना की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान सड़क सुरक्षा को कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए. बता दें जिले से होकर गुजरने वाले नेशनल हाइवे-30 पर ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जब घातक सड़क हादसा न होता हो. दो दिन पहले ही प्रदेश के वनमंत्री केदार कश्यप के काफिले में शामिल फालोगार्ड वाहन की दुर्घटना में कई लोग घायल हुए थे. यात्री बसों की आगे निकलने की होड़ में भी कई हादसे हो चुके हैं.
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