Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में खेती की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस इलाके से इन्द्रावती जैसी नदी बहती है, उसी इलाके के किसान सिंचाई के लिए बारिश के भरोसे बैठे हैं. नदी में पानी है, एनीकट में जलभराव भी है, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने का इंतजाम अब तक नहीं हो सका. लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक के टाकरागुड़ा, उसरीबेड़ा, धुरागांव और बड़ांजी में सामूहिक उद्वहन सिंचाई योजनाओं को वर्ष 2022 में मंजूरी मिली थी. तीन साल से ज्यादा वक्त गुजर गया, लेकिन योजनाएं जमीन पर उतरने के बजाय फाइलों में ही अटकी हुई हैं. इसका सीधा नुकसान उन किसानों को उठाना पड़ रहा है, जो रबी और ग्रीष्मकालीन फसल लेने का सपना देखते हैं. यह पहली बार नहीं है, जब सिंचाई योजनाएं बदहाली का शिकार हुई हैं. इन्द्रावती और नारंगी नदी पर पुरानी उद्वहन योजनाएं भी रखरखाव के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं. कुम्हली योजना का विस्तार भी प्रस्तावित था, लेकिन उसकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. दूसरी तरफ सीमावर्ती ओडिशा में किसान सिंचाई सुविधाओं के दम पर साल में तीन फसल ले रहे हैं. सवाल यह है कि जब बस्तर में पानी का प्राकृतिक स्रोत मौजूद है, तो किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था आखिर कब बनेगी?
Bastar News Update : 37 दिन बाद पटरी पर लौटी यात्री ट्रेनें, लेकिन बदले हुए समय से यात्रियों को रखनी होगी नजर
जगदलपुर. बस्तर के रेल यात्रियों का लंबा इंतजार अब खत्म होने लगा है, लेकिन ट्रेन पकड़ने के लिए अब पुरानी समय सारणी पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है. केके रेललाइन पर भूस्खलन के कारण बाधित यात्री परिवहन धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है. 25 सितंबर को मल्लीगुड़ा और जरति के बीच हुए भूस्खलन ने रेल संपर्क रोक दिया था. इसके बाद ट्रेनों को दोबारा चलाने की तैयारी हुई, लेकिन चक्रवाती तूफान के कारण बहाली की तारीख आगे बढ़ानी पड़ी. अब समलेश्वरी और हीराखंड एक्सप्रेस का परिचालन 1 नवंबर से शुरू हो रहा है. वहीं राउरकेला इंटरसिटी और नाइट एक्सप्रेस 4 नवंबर से फिर पटरी पर लौटेंगी. राहत के साथ रेलवे ने तीन एक्सप्रेस ट्रेनों की समय सारणी में भी बदलाव किया है. जगदलपुर से राउरकेला इंटरसिटी अब दोपहर 2:10 के बजाय 2 बजे रवाना होगी. नाइट एक्सप्रेस शाम 7:50 के बजाय 6:45 बजे ही जगदलपुर से छूटेगी. वहीं समलेश्वरी एक्सप्रेस का प्रस्थान समय सुबह 5:32 से बदलकर 5:20 बजे कर दिया गया है. ऐसे में यात्रियों को सफर से पहले नई समय सारणी की जानकारी लेना जरूरी होगा.
शहर की सड़कों पर मलबा फैलाने वालों की खैर नहीं, निगम ने वसूला 17 हजार 500 का जुर्माना
जगदलपुर. शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ नगर निगम की नहीं, बल्कि उन कारोबारियों की भी है, जिनकी लापरवाही से सार्वजनिक रास्ते और नालियां प्रभावित हो रही हैं. जगदलपुर में इसी लापरवाही पर अब नगर निगम ने सख्ती दिखाई है. निगम की उड़नदस्ता टीम ने अलग-अलग वार्डों में औचक निरीक्षण कर गंदगी फैलाने और निर्माण मलबा सड़क पर डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की. अभियान में कुल 17 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला गया. गांधीनगर वार्ड में अनीश मेंस वेयर पर सरकारी भवन परिसर में गंदगी फैलाने के लिए 5 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया. मुख्य मार्ग पर निर्माण सामग्री और मलबा फैलाने के मामले में दूल्हा साहब कपड़ा दुकान पर भी 5 हजार रुपए की कार्रवाई हुई. प्रताप देव वार्ड में तस्वीर इलेक्ट्रॉनिक्स पर 2500 रुपए का जुर्माना लगाया गया. वहीं बालाजी वार्ड में बंसल नर्सिंग होम से सड़क और नाली अवरुद्ध करने पर 5 हजार रुपए वसूले गए. निगम अधिकारियों ने मौके पर ही जुर्माना वसूलते हुए दोबारा ऐसी लापरवाही नहीं करने की चेतावनी दी है. अब देखना होगा कि जुर्माने की यह कार्रवाई शहर की सफाई व्यवस्था में कितना स्थायी बदलाव ला पाती है.
Bastar News Update : तीन दशक बाद जंगल सफारी का रास्ता खुला
बीजापुर. नक्सल प्रभावित पहचान से आगे बढ़कर बीजापुर अब अपने प्राकृतिक खजाने के दम पर पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान बनाने की तैयारी में है. करीब तीन दशक बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू होने जा रही है. 1 नवंबर से पर्यटक यहां घने जंगलों और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव ले सकेंगे. पहले चरण में उल्लूर गांव से उंडलापर्ती तक करीब 9 किलोमीटर का सफारी ट्रैक तैयार किया गया है. सफारी संचालन के लिए चार जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं और प्रति सफारी 2 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है. 2,799.07 वर्ग किलोमीटर में फैला इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश के बड़े टाइगर रिजर्व में शामिल है. यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल और ऊदबिलाव जैसे वन्यजीवों के साथ दुर्लभ पक्षियों की कई प्रजातियां मौजूद हैं. इस पहल की खास बात यह है कि पर्यटन के साथ स्थानीय युवाओं को भी रोजगार से जोड़ने की तैयारी है. छह युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में प्रशिक्षण दिया गया है. सफारी गेट के पास पारंपरिक मिट्टी के घरों की थीम पर जलपान गृह भी बनाया गया है. अब उम्मीद है कि जंगल सफारी के जरिए स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी.
Bastar News Update : 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग, पिछड़ा वर्ग ने खोला मोर्चा
जगदलपुर. छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर सड़क पर पहुंच गया है. अपनी आबादी के अनुपात में अधिकार और भागीदारी की मांग को लेकर सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने जिला मुख्यालय में रैली निकालकर प्रदर्शन किया. समाज का दावा है कि प्रदेश की आबादी में पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत से अधिक है, लेकिन उसे अब तक उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा. प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई. इसके साथ ही आगामी राष्ट्रीय जनगणना में जातिगत जनगणना कराने और ओबीसी के लिए अलग कॉलम निर्धारित करने की मांग भी रखी गई. समाज ने पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व प्रभावित होने पर भी चिंता जताई. प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए पांचवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी रखी गई है. प्रदर्शन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए. समाज ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा.
पहले बाढ़ ने छीनी फसल, अब कीटों का हमला… किसानों की सालभर की मेहनत पर संकट
जगदलपुर. बस्तर संभाग के किसानों के लिए इस बार खरीफ सीजन लगातार मुश्किलों का दौर बनता जा रहा है. खेतों में फसल तैयार होने से पहले ही कुदरत ने ऐसा चक्र चलाया कि किसानों की उम्मीदें कमजोर पड़ने लगी हैं. शुरुआत में अतिवृष्टि और बाढ़ ने हजारों एकड़ खेतों को प्रभावित किया. लंबे समय तक पानी में डूबी फसल कहीं सड़ गई तो कहीं पौधों की जड़ें कमजोर पड़ गईं. जिन किसानों को बची हुई फसल से कुछ राहत की उम्मीद थी, उनके सामने अब कीट प्रकोप ने नई चुनौती खड़ी कर दी है. कई इलाकों में धान की बालियां कटकर गिर रही हैं और दाने भी नुकसान झेल रहे हैं. कहीं बालियां निकलने के बाद दाने नहीं भर रहे, तो कहीं भूरा माहू और तनाछेदक जैसे कीट फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसका असर सीधे उत्पादन और धान की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका है. किसानों के सामने अब खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी और खेती की तैयारी में लगी लागत निकालने का संकट है. ऊपर से कटी हुई फसल को खेतों से सुरक्षित निकालना भी आसान नहीं है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल फसल नुकसान के वास्तविक आकलन और किसानों को मिलने वाली राहत का है. यदि समय रहते उचित मुआवजा नहीं मिला तो इस साल खेती का घाटा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ सकता है.

20 फीट की ऊंचाई पर जगमगा रहा आकाशदीप, कार्तिक मास में लक्ष्मी नारायण मंदिर में विशेष आयोजन
जगदलपुर. कार्तिक मास की शाम जगदलपुर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में कुछ अलग ही आध्यात्मिक छटा बिखेर रही है. यहां श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है करीब 20 फीट की ऊंचाई पर प्रज्ज्वलित आकाशदीप, जिसकी रोशनी धार्मिक परंपरा और आस्था का संदेश दे रही है. भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित कार्तिक मास में मंदिर परिसर में विशेष दीपदान और आकाशदीप महोत्सव आयोजित किया जा रहा है. 26 अक्टूबर से शुरू हुआ यह आयोजन 24 नवंबर तक चलेगा. हर शाम बांस के सहारे ऊंचाई पर रखी मिट्टी की नई मटकी में घी का दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है. इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि कार्तिक मास में दीपदान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान श्रीहरि की कृपा बनी रहती है. मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचकर भगवान लक्ष्मी नारायण के चरणों में दीप अर्पित कर रहे हैं. इस दौरान विशेष पूजा, मंगल आरती और भजन-कीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय बना हुआ है. अन्नकूट महोत्सव और गोवर्धन पूजा के बाद भी मंदिर में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी है. आकाशदीप की यह परंपरा देवताओं और पितरों के मार्ग को प्रकाशमान करने की धार्मिक मान्यता से जुड़ी हुई है.
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