Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में खेलों को लेकर युवाओं का उत्साह इस बार पंजीयन के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है. बस्तर ओलंपिक 2026 में शामिल होने के लिए जिले से अब तक 70 हजार 460 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है. खास बात यह है कि कुल पंजीयन में महिला खिलाड़ियों की संख्या पुरुषों से लगभग दोगुनी है. आंकड़ों के मुताबिक 46 हजार 949 महिला और 23 हजार 513 पुरुष खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता के लिए नाम दर्ज कराया है. यह आंकड़ा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि को भी दर्शाता है. खिलाड़ियों को जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने जागरूकता रथ रवाना किया है. कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के समन्वय से पंजीयन अभियान चलाया जा रहा है. शुभंकर, होर्डिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रतियोगिता का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. विकासखंड मुख्यालयों के खेल मैदानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है. पंजीयन की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है, यानी इच्छुक खिलाड़ियों के पास अब सीमित समय बचा है. दीपावली अवकाश को देखते हुए विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं 4 और 5 नवंबर को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है. अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती इन पंजीकृत खिलाड़ियों को बेहतर आयोजन और खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर उपलब्ध कराने की होगी.

Bastar News Update : सरकारी आवास खाली, कर्मचारी परेशान…

जगदलपुर. केंद्र सरकार के कई विभागों में पदस्थ कर्मचारी सरकारी आवास के लिए परेशान हैं, लेकिन जगदलपुर की आकाशवाणी कॉलोनी के मकान खाली पड़े हैं. करीब 49 साल पहले शुरू हुए आकाशवाणी केंद्र के कर्मचारियों के लिए इस कॉलोनी का निर्माण किया गया था. बताया जाता है कि यहां करीब 300 आवास बनाए गए थे, जिनमें कभी ढाई सौ से अधिक कर्मचारी और उनके परिवार रहते थे. लेकिन आकाशवाणी और दूरदर्शन में नई भर्ती नहीं होने और लगातार तबादलों के चलते अधिकांश मकान खाली हो गए. अब कॉलोनी के कई आवास रखरखाव के अभाव में बदहाल हो रहे हैं और परिसर में गंदगी भी पसरी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही सुनसान मकानों में असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ जाती है. जन अधिकार मोर्चा एवं सामाजिक कल्याण संघ के प्रांतीय अध्यक्ष चंद्रिका सिंह ने खाली आवासों के उपयोग का सुझाव दिया है. उनका कहना है कि संभागीय मुख्यालय में केंद्र सरकार के 23 से अधिक विभाग संचालित हैं, जिनके कर्मचारी आवास की समस्या झेल रहे हैं. ऐसे में खाली मकानों को केंद्र सरकार के दूसरे विभागों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों को आवंटित किया जा सकता है. इससे एक ओर कर्मचारियों को आवास मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सरकारी संपत्ति का बेहतर उपयोग हो सकेगा. कभी रौनक से भरी रहने वाली कॉलोनी के मौजूदा हालात ने सरकारी आवासों के रखरखाव और उपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Bastar News Update : बस्तर दशहरा खत्म, लेकिन कटे पेड़ों की भरपाई का हिसाब अब तक नहीं

जगदलपुर. बस्तर दशहरा की भव्यता के बीच हर साल सैकड़ों पुराने पेड़ों की बलि दी जाती है, लेकिन अब उनके बदले पौधे लगाने की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं.विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा 2026 संपन्न हो चुका है और आयोजन पर करीब एक करोड़ 30 लाख रुपये खर्च किए गए. विशाल विजय रथ के निर्माण के लिए प्रतिवर्ष लगभग 250 पुराने पेड़ों की कटाई की जाती है. पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से इन पेड़ों की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति पौधरोपण की परंपरा भी शुरू की गई थी. पिछले पांच वर्षों से बस्तर दशहरा समिति और वन विभाग ने मिलकर अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण कराया. कुमड़ाकोट जंगल, मारकेल के बोदामुंडा और नकटी सेमरा जैसे स्थानों पर इस दिशा में पहल की गई थी. लेकिन दशहरा 2026 संपन्न होने के बाद अब तक क्षतिपूर्ति पौधरोपण को लेकर कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है. पर्यावरण संरक्षण समितियों के सदस्यों को आशंका है कि वर्षों से चली आ रही यह पहल कहीं बंद न हो जाए. सवाल यह है कि जब रथ निर्माण के लिए हर साल पुराने पेड़ काटे जाते हैं, तो उनके बदले नए पेड़ लगाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? बस्तर दशहरा समिति, जिला प्रशासन और वन विभाग के बीच इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही. परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए क्षतिपूर्ति पौधरोपण को आयोजन का स्थायी हिस्सा बनाने की जरूरत है.

Bastar News Update : किसान के बकाया भुगतान पर सरकार को घेरा

जगदलपुर. धान बेचने के बाद भी भुगतान और दूसरी कृषि योजनाओं की राशि का इंतजार कर रहे किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है. गुरुवार को प्रदेश किसान संघ ने जिला मुख्यालय के चौपाटी मैदान में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया. किसान संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम तहसीलदार को 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा. संघ ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 की धान खरीदी की अंतर राशि तथा राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चौथी किस्त का भुगतान मांगा. किसान संघ के मुताबिक विभिन्न मदों में कुल 6066 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. इसके साथ ही तीन बार की समर्थन मूल्य वृद्धि जोड़कर 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की मांग उठाई गई. किसानों ने समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने की भी मांग की. धरने में खाद की कालाबाजारी, धान खरीदी केंद्रों में अवैध वसूली और बिजली कटौती का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. फसल बीमा की लंबित राशि जारी करने और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की गई. इसके अलावा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, मनरेगा बहाली और सूदखोरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी गई. कोकोड़ी स्थित दंतेश्वरी मक्का प्रोसेसिंग प्लांट को लेकर भी संघ ने सवाल उठाते हुए शेयरधारक किसानों की राशि लौटाने और इथेनॉल प्लांट बंद करने की मांग की. सुदेश टीकम, चंदू साहू और बंगाराम सोढ़ी सहित किसान नेताओं ने भुगतान की मांग पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन तेज करने के संकेत दिए.

Bastar News Update : 44 साल पुराना विस्थापन आदेश बेअसर, रेलवे की जमीन पर 530 से ज्यादा कब्जे

जगदलपुर. रेलवे स्टेशन के विस्तार और विकास की तैयारी के बीच रेलवे की जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण ने नई चुनौती खड़ी कर दी है. हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को लेकर 44 साल पहले ही विस्थापन का आदेश जारी किया जा चुका था. जानकारी के मुताबिक वर्ष 1982 में वन मंत्रालय भोपाल ने रेलवे और वन भूमि पर बसे 45 परिवारों को विस्थापित करने के निर्देश दिए थे. तत्कालीन राजस्व कार्यालय को इन परिवारों को दूसरी जगह बसाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उस समय कार्रवाई नहीं हुई. धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया और रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार अब इस इलाके में 530 से अधिक लोग काबिज हैं. स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का खामियाजा अब रेलवे और प्रशासन दोनों को उठाना पड़ रहा है. जगदलपुर स्टेशन को जंक्शन के रूप में विकसित करने के साथ यहां वाशिंग सेंटर और अन्य सुविधाओं के निर्माण की योजना है. इन परियोजनाओं के लिए रेलवे को अपनी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी होगा. बताया जा रहा है कि पहले विशाखापट्टनम जोन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन बाद में प्रक्रिया रुक गई. इधर जहाजभाटा क्षेत्र के कब्जाधारियों को करकापाल और डोंगरीपारा कंगोली में विस्थापित किए जाने का उदाहरण भी मौजूद है. अब सवाल यह है कि 44 साल पुराने आदेश पर समय रहते अमल क्यों नहीं हुआ और मौजूदा कब्जाधारियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी कौन लेगा?.रेलवे के विकास की जरूरत और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के बीच प्रशासन को अब ठोस समाधान निकालना होगा.

बादलों ने बढ़ाया करवा चौथ का इंतजार

जगदलपुर. करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा. सुबह से ही घरों में पूजा और श्रृंगार की तैयारियां शुरू हो गई थीं. दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर चंद्र दर्शन के इंतजार में जुटीं. शहर के गीता भवन में पंजाब सनातन समाज की महिलाओं ने सामूहिक रूप से करवा चौथ की पूजा की. महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर पति की सलामती की कामना की. लेकिन इस बार चक्रवाती तूफान अर्नब के असर से आसमान में छाए बादलों ने व्रत की परीक्षा और बढ़ा दी. चांद निकलने के निर्धारित समय के बाद भी महिलाएं छतों और आंगनों में निगाहें टिकाए रहीं. काफी इंतजार के बाद चंद्रमा के आंशिक दर्शन होने पर महिलाओं ने अर्घ्य देकर पूजा संपन्न की. इसके बाद छलनी से पति का चेहरा देखकर उनके हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला. नवविवाहित महिलाओं में इस पर्व को लेकर खास उत्साह रहा, कई महिलाओं ने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा. पूनम, उर्मिला और चंद्रिका ने बताया कि पहली बार इस परंपरा का हिस्सा बनना उनके लिए खास अनुभव रहा. पूजा के बाद महिलाओं ने पति और परिवार के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेकर पर्व की खुशियां मनाईं.

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H