Bastar News Update, दंतेवाड़ा:, आंध्र प्रदेश के एएसआर जिले में भारी बारिश का असर अब बस्तर की रेल कनेक्टिविटी पर भी दिखाई देने लगा है। बारिश और खराब मौसम को देखते हुए विशाखापट्टनम से किरंदुल चलने वाली यात्री ट्रेनों को दो दिनों के लिए स्थगित किया गया है। 23 और 24 सितंबर को पैसेंजर और नाइट एक्सप्रेस का संचालन प्रभावित रहेगा। बुधवार सुबह विशाखापट्टनम से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन जगदलपुर नहीं पहुंची।

वहीं बुधवार रात 10 बजे रवाना होने वाली नाइट एक्सप्रेस को भी स्थगित कर दिया गया। इसका सीधा असर किरंदुल और बस्तर के बीच आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ा है। रेलवे के मुताबिक फिलहाल मौसम की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अगर बारिश और हालात ऐसे ही बने रहे तो आगे भी ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ सकता है। यानी अगले दो दिन बस्तर की इस अहम रेल लाइन पर यात्री सेवाएं प्रभावित रहेंगी। यात्रियों को सफर से पहले ट्रेन के संचालन की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

NMDC के खिलाफ 13 पंचायतों का आंदोलन जारी

जगदलपुर। नगरनार स्टील प्लांट से प्रभावित 13 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार के मूड में हैं। 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। रिमझिम बारिश के बीच किसान और महिलाएं प्लांट के मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से प्रभावित पंचायतों में विकास कार्यों के लिए राशि का इंतजार है। शिक्षा, स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा आंदोलन के केंद्र में है। किसानों ने प्लांट से निकलने वाले दूषित पानी से फसलों को नुकसान होने का भी आरोप लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान अब जरूरी है। बारिश भी प्रदर्शनकारियों का हौसला नहीं तोड़ सकी और महिलाएं छाता लेकर धरने में डटी रहीं। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया है कि मांगों पर ठोस पहल होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अब नजर इस बात पर है कि प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।

सीप में मोती तैयार, लेकिन किसानों की दिलचस्पी गायब… बाजार बना सबसे बड़ी चुनौती

बस्तर में खेती के एक ऐसे विकल्प की पहचान हुई है, जो किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बन सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र में मोती की खेती के प्रयोग को सफलता मिलने के बाद किसानों को इसका प्रशिक्षण भी दिया गया। महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण किसानों को भी मोती उत्पादन की तकनीक समझाई गई। मोती की खेती तालाब के साथ छोटे टैंक में भी की जा सकती है। सीप में कैल्शियम के छोटे कण प्रत्यारोपित करने के बाद करीब 12 से 14 महीने में मोती तैयार होता है। मोती का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है।

बस्तर में तालाब, पानी और सीप जैसे संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद किसानों में ज्यादा रुचि नहीं दिख रही। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बाजार की समस्या बताई जा रही है। यानी उत्पादन की तकनीक मौजूद है, लेकिन तैयार मोती बेचने के लिए मजबूत बाजार व्यवस्था का अभाव है। अगर उत्पादन के साथ बाजार और खरीद की व्यवस्था विकसित हो, तो यह ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन सकता है।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए खोजी कुत्तों की मदद

बीजापुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अब आधुनिक तकनीक के साथ खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। पिल्लूर परिक्षेत्र में वन कर्मचारियों के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास में शिकार की सूचना मिलने के बाद मौके तक पहुंचने और सबूत जुटाने की प्रक्रिया समझाई गई। संदिग्धों की तलाश और वन अपराध की जांच में प्रशिक्षित डॉग की भूमिका का भी प्रदर्शन किया गया। वन कर्मचारियों और सुरक्षा श्रमिकों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया गया। फिलहाल टाइगर रिजर्व में एक प्रशिक्षित ट्रैकिंग डॉग उपलब्ध है। इसे विशेष प्रशिक्षण के बाद वन अपराध की जांच और गश्त में इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके साथ ही एंटी स्नेयर वॉक और टाइगर मॉनिटरिंग जैसी गतिविधियां भी लगातार की जा रही हैं। विभाग भविष्य में डॉग स्क्वाड को और मजबूत करने की तैयारी में है। यानी जंगल में शिकारियों की तलाश से लेकर वन अपराध की जांच तक अब तकनीक और प्रशिक्षित अमले को साथ लेकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर है।

साल में एक दिन खुला मां लिंगेश्वरी का दरबार

कोंडागांव। आलोर-झाटीबन की पहाड़ी गुफा में विराजमान मां लिंगेश्वरी का दरबार बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। साल में सिर्फ एक दिन खुलने वाले इस गुफा मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। छत्तीसगढ़ समेत अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचे। कई श्रद्धालु दर्शन के लिए दो दिन पहले ही पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। संतान प्राप्ति की कामना लेकर बड़ी संख्या में दंपति भी मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार 10 घंटे से ज्यादा समय तक भंडारे की व्यवस्था की गई। खिचड़ी, हलवा और खीर समेत प्रसाद की व्यवस्था के साथ पानी और भोजन की सेवा भी की गई।

बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। स्थानीय मान्यता के अनुसार गुफा के भीतर दिखाई देने वाले शेर के पदचिह्न शुभ माने जाते हैं। मंदिर समिति के मुताबिक इस साल भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मां के दरबार पहुंचे।

सुकमा कोंटा में लगातार चोरी से बढ़ी चिंता

कोंटा नगर में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले तीन दिनों में गणेश पंडाल और सूने मकानों को चोरों ने निशाना बनाया। एसबीआई चौक के गणेश पंडाल से 50 रुपये के नोटों से बनी माला चोरी हुई।

वहीं अटल चौक के पंडाल से 20 रुपये के नोटों की माला गायब मिली। दोनों घटनाएं लगभग एक ही समय के आसपास हुईं। इसके अलावा नयापारा में एक सूने मकान का ताला तोड़कर चोर अंदर दाखिल हुए। हालांकि वहां से सामान चोरी होने की जानकारी नहीं मिली।

वार्ड क्रमांक 11 में भी सूने मकान का ताला तोड़कर अंदर घुसने की घटना सामने आई। एक अन्य मामले में घर के आंगन में खड़ी रॉयल इनफील्ड बाइक भी चोर ले गए। लगातार घटनाओं के बाद पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

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