Bastar News Update : बस्तर में रेल कनेक्टिविटी बहाल होने की उम्मीद लगाए बैठे यात्रियों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। मल्लीगुड़ा और जरति स्टेशनों के बीच भूस्खलन के बाद 25 सितंबर से यात्री रेल सेवाएं बंद हैं। पहले 30 अक्टूबर से ट्रेनों का परिचालन शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन अब संभावित चक्रवाती तूफान के कारण 10 नवंबर तक सेवा स्थगित रहने की खबर है। इसका सीधा असर जगदलपुर से दूसरे राज्यों की यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ रहा है। मरम्मत के लिए 800 से अधिक मजदूर और 80 से ज्यादा मशीनें तैनात की गई थीं। रेललाइन पर मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू हो चुकी है और पिछले तीन दिनों में लौह अयस्क से लदी 15 मालगाड़ियां चलाई गई हैं। इसके बावजूद यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं होने से रेलवे की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जगदलपुर से हावड़ा, राउरकेला, भुवनेश्वर और विशाखापट्टनम जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ पैसेंजर सेवा भी प्रभावित है। इन ट्रेनों से प्रतिदिन करीब 2 हजार यात्री सफर करते थे, जिन्हें अब वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहीं, नई तारीख स्पष्ट नहीं होने से आरक्षण प्रक्रिया भी प्रभावित है और यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

खेतों में धान तैयार, आसमान में तूफान का खतरा; किसानों की बढ़ी चिंता

बस्तर में किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती है—पहले बाढ़ से प्रभावित फसल को बचाना और अब संभावित चक्रवाती तूफान से मुकाबला करना। कई इलाकों में कम अवधि वाली धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है और किसान कटाई की तैयारी में जुटे हैं। इसी बीच बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती सिस्टम ने एक बार फिर मौसम बिगड़ने की आशंका बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने बस्तर संभाग के कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बीते दिनों इंद्रावती नदी में आई बाढ़ से नदी किनारे के गांवों के खेत लंबे समय तक पानी में डूबे रहे थे। इससे धान की बढ़वार प्रभावित हुई, कई जगह फसल सड़ने और दाने नहीं भरने की समस्या भी सामने आई। अब कटाई के समय लगातार बारिश होती है तो खेतों में खड़ी फसल गिरने के साथ कटी हुई धान की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। खासकर उन किसानों की मुश्किलें बढ़ेंगी, जो पहले ही बाढ़ से नुकसान झेल चुके हैं। ओडिशा के खातिगुड़ा डेम का गेट खोले जाने और इंद्रावती नदी के जलस्तर को लेकर भी किसानों की निगाहें बनी हुई हैं। संभावित खतरे को देखते हुए बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने प्रशासनिक अमले को सतर्क रहने और हालात पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अब किसानों को मौसम साफ रहने की उम्मीद है, ताकि बची हुई फसल की कटाई समय पर पूरी कर नुकसान को और बढ़ने से रोका जा सके।

75 दिन के दशहरा पर्व का अंतिम पड़ाव, 27 अक्टूबर को मावली माता की विदाई

बस्तर दशहरा की 75 दिवसीय परंपरा अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है और 27 अक्टूबर को मावली माता की विदाई के साथ पर्व का समापन होगा। इस वर्ष संभाग के 81 परगनों के ग्रामीण देवी-देवताओं के साथ ओडिशा और धमतरी के नगरी-सिहावा क्षेत्र से भी देवी-देवता शामिल हुए। घंटियों वाले कोलादेव, आंगादेव, छत्र, डोली और लाट सहित एक हजार से अधिक देवी-देवताओं की उपस्थिति ने पर्व की व्यापकता को दर्शाया। बाहरी रैनी रस्म के बाद कुटुंब जात्रा का विधान संपन्न हुआ, जिसमें शामिल ग्राम देवी-देवताओं को परंपरानुसार विदाई दी गई। अब दंतेवाड़ा से आई मावली माता की डोली और छत्र की विदाई की तैयारियां की जा रही हैं।

परंपरा के अनुसार, माता को संस्कृत में लिखी विनय-पत्रिका भेजकर बस्तर दशहरा में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाता है। आमंत्रण स्वीकार कर पहुंचीं माता की दंतेश्वरी मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना की जा रही है। 27 अक्टूबर को राजपरिवार, मांझी-चालकी और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में समारोहपूर्वक विदाई दी जाएगी। इस दौरान महाआरती, गुलाब के फूलों की वर्षा और सशस्त्र पुलिस बल की ओर से हर्ष फायर कर सलामी देने का विधान होगा। श्रद्धालुओं के लिए 51 किलो लड्डू और बूंदी से पांच हजार से अधिक प्रसाद पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। मावली माता की वापसी के साथ बस्तर की विशिष्ट लोकपरंपराओं से जुड़ा यह ऐतिहासिक पर्व अगले वर्ष तक के लिए संपन्न हो जाएगा।

कांकेर-नारायणपुर-रावघाट परियोजना में कर्मचारियों की हड़ताल तेज, खनन और परिवहन बंद करने की चेतावनी

रावघाट लौह अयस्क परियोजना में कर्मचारियों की 16 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब खनन और परिवहन पर असर डालने की स्थिति में पहुंच गया है। 23 अक्टूबर से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही और कर्मचारियों ने मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटने का ऐलान किया है। नारायणपुर क्षेत्र के 417 से अधिक कर्मचारी वेतन, भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा और अन्य भत्तों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर अब तक ठोस पहल नहीं हुई है। केसीसीएल और बीएसपी के सक्षम अधिकारियों के आंदोलन स्थल पर नहीं पहुंचने से नाराजगी बढ़ने की बात कही जा रही है। हड़ताल के दौरान दंडकवन कैंप में आंदोलनकारियों को रोके जाने की घटना भी चर्चा में रही। इस कार्रवाई के कारणों पर पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर से खनन और परिवहन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। ऐसे में परियोजना से जुड़े कामकाज और लौह अयस्क की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और सकारात्मक निर्णय मिलने तक हड़ताल जारी रहेगी। अब निगाहें संबंधित प्रबंधन पर हैं कि वह कर्मचारियों से बातचीत कर गतिरोध दूर करता है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर कांग्रेस का अभियान, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

नारायणपुर। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने अब गांव-गांव तक जनसंपर्क अभियान चलाने की तैयारी की है। नारायणपुर के पूर्व विधायक चंदन कश्यप ने राजीव भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटना गंभीर विषय है। कांग्रेस का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। पार्टी ने 13.3 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा करते हुए इसकी प्रक्रिया और प्रभावित मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस चाहती है कि नाम हटाने के प्रत्येक मामले में संबंधित मतदाता को स्पष्ट जानकारी मिले और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। पार्टी ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। हालांकि, नाम हटाए जाने के आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गांवों में जनसंपर्क, बूथ स्तर पर मतदाता सूची का सत्यापन और चौपाल आयोजित करने की योजना है। कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के साथ राष्ट्रीय रैली का भी कार्यक्रम बताया है। अब इस अभियान के दौरान मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जनता की भागीदारी और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रमुख विषय रहने वाले हैं।

ओडिशा में बाढ़ का खतरा, भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 जलद्वार खोले गए

बस्तर। संभावित चक्रवाती तूफान और भारी बारिश के बीच बस्तर में अंतरराज्यीय जल प्रबंधन की बड़ी कवायद की गई है। ओडिशा में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 जलद्वार खोल दिए गए हैं। यह फैसला छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जल संसाधन विभागों के बीच समन्वय के बाद लिया गया। ओडिशा की ओर से सहयोग का आग्रह मिलने पर छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की विद्युत एवं यांत्रिकी शाखा, बस्तर ने कार्रवाई की। एनएमडीसी के समन्वय से पहले से क्रियाशील 28 जलद्वारों के अलावा शेष 10 जलद्वार भी खुलवा दिए गए। हालांकि, इस फैसले से स्थानीय किसानों की चिंता भी जुड़ी रही, क्योंकि एनीकट में पानी का संचयन सिंचाई, निस्तारी और भूजल पुनर्भरण के लिए महत्वपूर्ण है। जलद्वार खोलने की कार्रवाई के दौरान किसानों ने शुरुआत में अपनी जरूरतों को लेकर विरोध जताया। प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने उन्हें संभावित आपदा तथा ओडिशा में बाढ़ के खतरे की गंभीरता से अवगत कराया। इसके बाद सभी जलद्वार खोलने पर सहमति बनी और स्थानीय जरूरतों के साथ व्यापक जनहित को ध्यान में रखा गया। अब संभावित बारिश के दौरान जलस्तर और आसपास के इलाकों की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। इस निर्णय ने एक ओर आपदा के खतरे से निपटने के लिए अंतरराज्यीय सहयोग को सामने रखा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जल जरूरतों के प्रबंधन की चुनौती भी कायम है।

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