जगदलपुर। जगदलपुर शहर में इन दिनों सड़कों पर बहता पानी लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। लाल चर्च, महेंद्र कर्मा बंगला और पुराने बस स्टैंड के पास अचानक पानी बहने से अफवाहों का दौर तेज हुआ। लेकिन अब इस पूरे मामले में नया एंगल सामने आया है।
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दरअसल, यह कोई पाइपलाइन फटने की घटना नहीं, बल्कि अमृत मिशन के तहत चल रही टेस्टिंग प्रक्रिया है। महापौर संजय पांडे ने स्पष्ट किया कि एयरवॉल और टी-पॉइंट की टेस्टिंग के दौरान पानी निकलना सामान्य प्रक्रिया है। शहर की नियमित जल आपूर्ति पूरी तरह से सुचारू बताई गई है।

बताया गया कि पूर्व में अधूरे छोड़े गए काम और तकनीकी खामियों को अब सुधारा जा रहा है।।करीब 100 करोड़ की इस योजना में देरी का ठीकरा पिछली एजेंसियों की लेटलतीफी पर फोड़ा गया। नई व्यवस्था में काम को तेज किया गया है, और लगातार निगरानी की जा रही है।
इंटेक वेल से लेकर ट्रीटमेंट प्लांट तक सुधार और सफाई जारी है। पहले चरण में 12 से 13 वार्डों को लाभ देने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रशासन का दावा है कि टेस्टिंग पूरी होते ही साफ पानी घर-घर पहुंचेगा। फिलहाल सवाल यही क्या तकनीकी ट्रायल पर भरोसा करें या जमीन पर दिख रही तस्वीर पर?
शादी का डांस बना जानलेवा वार
बस्तर (कोडेनार)। कोडेनार थाना क्षेत्र के बड़े आरापुर गांव में शादी की खुशियां अचानक खून-खराबे में बदल गईं। डीजे पर डांस को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद हिंसक झगड़े में तब्दील हो गया। बताया जा रहा है कि एक युवक के कड़े से लगी चोट ने पूरे विवाद को भड़का दिया। देखते ही देखते चाकू और काती जैसे धारदार हथियार निकल आए।
हमले में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
मुख्य आरोपी देवेन्द्र बघेल भी फरारी के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आरोपियों के पास से चाकू, काती और स्टील का कड़ा बरामद किया गया है। मामले में गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। यह घटना अब शादी समारोहों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। क्या जश्न के नाम पर बढ़ती लापरवाही अब जानलेवा होती जा रही है?
जंगल में ‘पारध’ का खूनी खेल जारी
बस्तर (माचकोट)। माचकोट वन परिक्षेत्र में वन्यजीवों के लिए खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चीतल और हिरण जैसे दुर्लभ जानवरों का शिकार थमने का नाम नहीं ले रहा। यहां सामूहिक शिकार यानी ‘पारध’ का खेल खुलेआम जारी है। 5 दिन पहले 11 ग्रामीणों को एक चीतल के शिकार के आरोप में पकड़ा गया।
शिकार के लिए केबल के फंदे और घेराबंदी जैसे खतरनाक तरीके अपनाए जा रहे हैं। मोटरसाइकिल के जरिए फंदा लगाकर जानवरों को फंसाया जा रहा है। खाल और मांस के लिए इन बेजुबानों की बेरहमी से हत्या की जा रही है। ओडिशा सीमा से लगे इस क्षेत्र में घुसपैठ भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
वनकर्मियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। 18 किमी की फेंसिंग के बावजूद अवैध शिकार जारी है। वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए जेल भेजा है। लेकिन सवाल बरकरार क्या जंगल में कानून कमजोर पड़ रहा है?
संकरा पुल, तेज रफ्तार और बड़ा खतरा
नारायणपुर। ओरछा मार्ग एक बार फिर हादसे की वजह बना है। माड़िन नदी पुल के पास बस और ट्रक की आमने-सामने टक्कर ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। इस हादसे में 5 यात्री घायल हुए, हालांकि जनहानि टल गई। घटना के बाद कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
स्थानीय लोग लंबे समय से इस पुल को खतरनाक बताते आ रहे हैं। संकरा पुल और बढ़ता ट्रैफिक यहां हादसों को न्योता दे रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। खनन वाहनों का बढ़ता दबाव हालात को और बिगाड़ रहा है। सड़क की हालत भी लगातार खराब होती जा रही है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और जांच शुरू की। लेकिन बड़ा सवाल क्या हर हादसे के बाद ही जागेगा प्रशासन? या फिर किसी बड़े नुकसान का इंतजार किया जा रहा है?
खोया मोबाइल, वापस मुस्कान
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा पुलिस की पहल ने लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है। ‘इया आपलो।सामान निया’ अभियान के तहत 141 गुम मोबाइल बरामद किए गए। करीब 31 लाख रुपए मूल्य के मोबाइल उनके असली मालिकों को लौटाए गए।
सीईआईआर पोर्टल की मदद से अलग-अलग राज्यों से मोबाइल ट्रेस किए गए। उत्तर प्रदेश सहित कई जिलों से भी बरामदगी हुई है। कार्यक्रम में लोगों ने पुलिस की सराहना की। पुलिस ने साइबर अपराध को लेकर भी जागरूक किया। हेल्पलाइन नंबर और क्यूआर कोड के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी गई। व्हाट्सएप चैनल ‘सायबर संगवारी’ के जरिए रोजाना जानकारी साझा की जाएगी।
एसपी और साइबर टीम की निगरानी में यह अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्ध कॉल, लिंक और मैसेज से सावधान रहने की अपील की गई है। यह पहल बताती है कि टेक्नोलॉजी से भरोसा भी लौटाया जा सकता है।
जवानों के लिए नई ताकत, ऑपरेशन में नई रफ्तार
सुकमा। नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों को अब नई सुविधाओं का सहारा मिला है। 226 बटालियन कैंप में आंतरिक सड़क और नए मेस का उद्घाटन किया गया।
डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित ने इन सुविधाओं को जवानों को समर्पित किया। नई सड़क कैंप के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ेगी। इससे ऑपरेशन के दौरान तेजी और समन्वय बेहतर होगा। नया मेस जवानों के जीवन स्तर को सुधारने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में पर्यावरण का संदेश भी दिया गया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह आयोजन हुआ। अधिकारियों ने बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर को ऑपरेशन की रीढ़ बताया। जवानों के मनोबल और दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया गया। संदेश साफ है मजबूत व्यवस्था ही मजबूत सुरक्षा की गारंटी है।
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