Dharm Desk – ज्येष्ठ माह को तप, दान और धर्म का सबसे प्रभावशाली समय माना जाता है. इसका महत्व और भी बढ़ गया है. क्योंकि इसमें अधिकमास का विशेष संयोग बन रहा है. यानी यह पवित्र महीना पूरे दो महीने तक श्रद्धालुओं को पुण्य कमाने का अवसर देगा. ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह समय बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इसकी शुरुआत कई शुभ योग और नक्षत्रों के साथ हो रही है. ज्येष्ठ माह केवल पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का भी संदेश देता है. मान्यता है कि इस माह में किए गए दान और सेवा से व्यक्ति को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. जीवन में सुख-समृद्धि के साथ मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है.

कितने दिन रहेगा ज्येष्ठ का महीना
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा तिथि 1 मई की रात से शुरू हो जाएगी, लेकिन उदयातिथि के नियम के कारण माह की गणना 2 मई से मानी जाएगी. इस माह का समापन ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन 29 जून को होगा. इसी महीने शनि देव का जन्म हुआ था और भगवान श्रीराम की हनुमान जी से पहली भेंट भी इसी काल में हुई थी. जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.
ज्येष्ठ माह में पड़ेंगे 8 मंगलवार
ज्येष्ठ माह का स्वामी मंगल ग्रह होता है. इसके अंतिम दिन पूर्णिमा के साथ ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग इसे विशेष बनाता है. अधिकमास के कारण इस बार पूरे आठ मंगलवार पड़ेंगे, जिन्हें ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाता है. इन दिनों में हनुमान जी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है.
सूर्य देव की पूजा के साथ दान पुण्य का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह में तिल, अन्न और सत्तू का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है. साथ ही सूर्य देव और वरुण देव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. हालांकि, शास्त्रों में एक सरल उपाय भी बताया गया है. भीषण गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना. राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करना, पशु-पक्षियों के लिए जल रखना, यह छोटे-छोटे कार्य भी महान पुण्य प्रदान करते हैं.
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