नीरज काकोटिया, बालाघाट। नगरपालिका प्रशासन द्वारा की गई एक कार्रवाई ने सियासी और सामाजिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। नगर मुख्यालय के त्रिपुर सुंदरी मंदिर के पीछे पिछले 7 सालों से रोजी-रोटी कमा रहे करीब तीन दर्जन विस्थापित मोटर मैकेनिकों को नगरपालिका ने अचानक अवैध अतिक्रमण बताते हुए बेदखली का नोटिस थमा दिया है। इस कार्रवाई से नाराज स्थानीय कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने प्रभारी CMO को जमकर फटकार लगाई और विस्थापितों के समर्थन में धरने पर बैठने की चेतावनी दी है।
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छुट्टी के दिन नोटिस चस्पा करने पर भड़कीं विधायक
नगरपालिका द्वारा अचानक दुकानों पर नोटिस चस्पा किए जाने के बाद परेशान मोटर मैकेनिकों ने तत्काल क्षेत्रीय विधायक अनुभा मुंजारे से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। जानकारी मिलते ही विधायक मुंजारे एक्शन में आईं और उन्होंने प्रभारी सीएमओ को फोन पर जमकर आड़े हाथों लिया।
विधायक अनुभा मुंजारे ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब प्रशासन ने खुद इन गरीबों को जमीन अलॉट करके यहां विस्थापित किया था तो नगरपालिका इसे अवैध अतिक्रमण कैसे बता सकती है? मैं खुद प्रभावितों से मिलने पहुंची थी। मेरे आने के तुरंत बाद छुट्टी के दिन इस तरह नोटिस थमाने का क्या औचित्य है? अगर इन विस्थापितों को अपनी जगह से जबरन हटाया गया तो मैं इनके समर्थन में खुद वहीं धरने पर बैठ जाऊंगी।
साल 2018 में प्रशासन ने ही किया था विस्थापित
इस पूरे विवाद के पीछे का सच यह है कि प्रभावित मोटर मैकेनिक पहले शहर के अलग-अलग मुख्य मार्गों पर गैरेज और छोटी दुकानों का संचालन करते थे। साल 2018 में शहर के सौंदर्यीकरण अभियान के तहत तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य ने इन दुकानदारों को वहां से हटाकर त्रिपुर सुंदरी मंदिर के पीछे जगह आवंटित की थी।
विगत 7 वर्षों से लगभग 90 की संख्या में मोटर मैकेनिक यहां अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं। हालांकि आउटर इलाका होने के कारण यहां पहले से ही ग्राहक बहुत कम पहुंचते हैं, जिससे उनका व्यापार बमुश्किल चल पा रहा है।
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वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के नाम पर रोजगार पर संकट
अब नगरपालिका बालाघाट ने इस जगह पर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (Water Treatment Plant) बनाने की योजना तैयार की है। इसी प्रोजेक्ट के लिए जगह खाली कराने के उद्देश्य से लगभग तीन दर्जन मैकेनिकों को अचानक दुकानें खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया गया है। अचानक आए इस संकट से प्रभावितों में अपने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण को लेकर गहरी चिंता और आक्रोश है। दुकानदारों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें इसी स्थान पर यथावत रहने दिया जाए।

