शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने की तैयारी में जुट गई है। वहीं इसे लेकर अब सियासी बवाल शुरू हो गया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सीएम डॉ. मोहन यादव के बयान पर पलटवार कर UCC के प्रावधानों का खुलकर विरोध किया है। 

‘लिव इन रिलेशन के लिए महाकाल की कृपा नहीं होती’

सीएम डॉ. मोहन यादव के बयान पर आरिफ मसूद ने कहा, सीएम महाकाल की कृपा का जिक्र कर रहे हैं। लिव इन रिलेशन के लिए महाकाल की कृपा नहीं होगी। इसको बढ़ावा देना कोई नहीं चाहेगा। उन्होंने आगे कहा कि जब एक कम्यूनिटी को अलग कर दिया तो कॉमन सिविल कैसे हुआ। यूसीसी बचा ही नहीं तो कॉमन सिविल कोड किस बात का हुआ। 

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मसूद बोले- शरीयत का वॉयलेशन होगा

उन्होंने लिव इन रिलेशनशिप का विरोध कर कानून को शरीयत के हिसाब से बताया। उन्होंने कहा कि उनका वॉयलेशन होगा। आरिफ मसूद ने कहा, मैने सभी लोगों से अपील की है लिव इन रिलेशनशिप को बढ़ावा, वैधता दे रहे हैं, हम इसका विरोध करते हैं। शरीयत के बहुत से कानून हैं जिनका वॉयलेशन होगा। इसमें मुस्लिम ही नहीं हर समाज का व्यक्ति जो देश के संविधान को चाहता है इसका विरोध करेंगे। 

मानसून सत्र के दौरान UCC बिल का विरोध करेगी कांग्रेस

आरिफ मसूद ने बताया कि कांग्रेस विधानसभा सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध करेगी। उन्होंने कहा, विधानसभा सत्र में कांग्रेस इसका पूरी ताकत से विरोध करेगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इसमें संज्ञान लेगा। मुस्लिम वर्ग को टारगेट करके कानून लाते हैं लेकिन दूसरे वर्ग भी इससे प्रभावित होते हैं। 

सीएम ने कहा था- महाकाल की कृपा से विधेयक होगा पास

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC विधेयक पास होने को महाकाल की कृपा बताई थी। उन्होंने कहा था, ‘मानसून सत्र में UCC को लेकर विधेयक लाया जाएगा। महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में UCC विधेयक पास होगा। सीएम ने आगे कहा कि विधानसभा के सत्र में हमारी सरकार के कई विषयों को लेकर हम आएंगे। इसमें से एक सौभाग्य से कॉमन सिविल कोड की तरफ हम बढ़ रहे हैं। महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में यह पारित होगा।’

लिव-इन रिलेशनशिप पर सवालों से बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि UCC के लिए पोर्टल पर दिए गए सुझाव फॉर्म में दो ऐसे सवाल हैं जिनसे कांग्रेस को विरोध करने का मौका मिल गया है।

  • क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के वित्तीय और उत्तराधिकार अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए?
  • क्या ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को भी भरण-पोषण और संपत्ति के अधिकार मिलने चाहिए?

इन सवालों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर पारंपरिक सामाजिक संरचनाओं में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।

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