शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अनुशासन और पार्टी गाइडलाइन्स को लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अब पूरी तरह सख्त मूड में नजर आ रहे हैं। मंदसौर सीट से लोकसभा प्रत्याशी रहीं मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मामले में पार्टी के निर्देशों की अनदेखी करना छात्र संगठन NSUI को भारी पड़ गया है। जीतू पटवारी के कड़े रुख के बाद संगठन ने घोर आपत्ति जताते हुए NSUI के 22 जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
हाल ही में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए पूरे प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन की रणनीति तैयार की थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशानुसार 15, 16 और 17 जून को राज्य के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन और पुतला दहन के स्पष्ट आदेश दिए गए थे।
जिसमें पार्टी द्वारा तय किया गया था कि 15 जून को युवा कांग्रेस प्रदर्शन करेगी। जिसके बाद 16 जून को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन यानि NSUI का प्रदर्शन और 17 जून को महिला कांग्रेस का प्रदर्शन शेड्यूल किया गया था।
विरोध न करना पड़ा भारी, संगठन ने माना ‘घोर आपत्तिजनक’
तय शेड्यूल के बावजूद मध्य प्रदेश के 22 जिलों में NSUI की जिला इकाइयों ने इस निर्देश को गंभीरता से नहीं लिया और जमीन पर कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन दर्ज नहीं कराया। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी के प्रति घोर लापरवाही माना है। इसी के चलते इन सभी 22 जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक न होने पर पद से हटाए जाने जैसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
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भोपाल में प्रदर्शन की खुली ‘पोल’, केवल 8-10 कार्यकर्ता पहुंचे
पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट नहीं किया जा सका। बताया जा रहा है कि 15 जून को जब राजधानी भोपाल में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन था तो वहां विरोध दर्ज कराने के लिए महज 8 से 10 कार्यकर्ता ही इकट्ठा हुए थे। इस ‘फ्लॉप शो’ और सुस्त प्रदर्शन के बाद से ही आलाकमान बेहद नाराज चल रहा था, जिसका नतीजा अब इस सामूहिक नोटिस के रूप में सामने आया है।


