दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे करना शुरू कर दिया है। यह सर्वे मुख्य रूप से आवासीय परिसरों के गैर-आवासीय उपयोग की पहचान करने के लिए किया जा रहा है। इसके तहत उन इलाकों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां रिहायशी परिसर में दुकानों, शॉप्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। दिल्ली नगर निगम के आयुक्त संजय खिरवार ने अप्रैल महीने में सभी जोन उपायुक्तों को इस संबंध में लिखित आदेश जारी किए थे। इसके बाद से दिल्ली के व्यापारियों में रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि वे समझते हैं कि इन इलाकों में सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है।

निगम आयुक्त से मिले व्यापारी

हालांकि, शुक्रवार को निगम आयुक्त संजय खिरवार से दिल्ली के व्यापारियों ने मुलाकात की और इस मुद्दे पर उनके द्वारा आश्वासन दिया गया। व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल में सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल, करोल बाग के व्यापारी नेता रमेश आहूजा, सदर बाजार के व्यापारी नेता राहुल अदलखा, गांधी नगर के व्यापारी राजेश खन्ना और अन्य व्यापारी नेता शामिल थे।

आश्वासन और व्यापारी नेताओं का विश्वास

निगम आयुक्त ने व्यापारियों को स्पष्ट किया कि इस सर्वे और सीलिंग की प्रक्रिया में व्यापारियों को किसी भी प्रकार से परेशान नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले पर दिल्ली सरकार, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC), डीडीए और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ पूरी तरह से समन्वय किया जा रहा है। इसके बाद ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। निगम आयुक्त ने व्यापारियों से कहा, “हम पूरी तरह से इस मुद्दे पर सभी एजेंसियों से सलाह-मशविरा करेंगे। व्यापारियों को इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।”

क्या है व्यापारियों की चिंता?

व्यापारी नेताओं ने निगम आयुक्त के समक्ष अपनी चिंताएं रखीं, खासकर रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर। उनका कहना था कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण उनकी रोज़ी-रोटी जुड़ी हुई है, और सीलिंग की स्थिति से उनका व्यवसाय प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, कई व्यापारी अपने व्यवसाय के लिए रिहायशी इलाकों में कार्यरत हैं, और ऐसे में अगर सीलिंग की कार्रवाई होती है तो यह उनके लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है।

सर्वे के बाद क्या होगा?

निगम आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि कोई अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधि न चला रहा हो। हालांकि, निगम ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में व्यापारियों को उचित समय और सुविधाएं दी जाएंगी ताकि वे किसी भी तरह की परेशानियों का सामना न करें।

सिर्फ सर्वे कर रहा है निगम

बुधवार को महापौर प्रवेश वाही ने यह घोषणा की कि दिल्ली में किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान या दुकान पर सीलिंग की कार्रवाई नहीं होगी।इससे पहले, दिल्ली नगर निगम प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे कर रहा था, जिससे व्यापारियों में सीलिंग की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, महापौर के इस बयान ने व्यापारियों को राहत दी है।

मास्टर प्लान 2041 की आवश्यकता: बृजेश गोयल का बयान

इस बीच, सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने निगम आयुक्त से मुलाकात के दौरान मास्टर प्लान 2041 के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की। उन्होंने कहा, “दिल्ली में जल्द ही मास्टर प्लान 2041 लागू होने वाला है, जिसके बाद दिल्ली के बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों, रेजिडेंशियल एरिया और कमर्शियल एरिया की असली तस्वीर सामने आ जाएगी। इसलिए, मास्टर प्लान 2041 के लागू होने से पहले किसी भी प्रकार की सीलिंग या सर्वे कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।” गोयल का यह भी मानना है कि दिल्ली के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को सही तरीके से परिभाषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “दिल्ली में कोई भी एरिया पूरी तरह से आवासीय (रेजिडेंशियल) नहीं है। इसके अलावा, आवासीय क्षेत्रों में भी 24 श्रेणियों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति है। इसलिए इन क्षेत्रों को अच्छी तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए ताकि कोई भ्रम न हो।”

व्यापारी नेताओं का दृष्टिकोण

व्यापारी नेताओं ने निगम आयुक्त से यह भी कहा कि व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए उन्हें एक स्पष्ट और उपयुक्त योजना की आवश्यकता है, ताकि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने का कोई भ्रम न उत्पन्न हो। व्यापारियों का कहना था कि बिना किसी स्पष्ट दिशा-निर्देश के सर्वे और सीलिंग की कार्रवाई से उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है।

निगम आयुक्त का आश्वासन

निगम आयुक्त संजय खिरवार ने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों से सलाह-मशविरा किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे केवल यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि कहीं कोई अवैध गतिविधि न चल रही हो। साथ ही उन्होंने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ले सकेंगे जनरल ट्रेड लाइसेंस

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने एक अहम घोषणा की है, जिसके तहत अब व्यापारी अपने प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही जनरल ट्रेड लाइसेंस भी प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है, क्योंकि उन्हें अब अलग से ट्रेड लाइसेंस के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि व्यापारियों ने एमसीडी कमिश्नर संजिव खिरवार से यह पुरानी मांग की थी कि प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही ट्रेड लाइसेंस भी जारी कर दिया जाए। इस पर एमसीडी कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि दिल्ली के व्यापारी और उद्यमी अब अपनी संपत्ति कर के साथ ही 15% फीस देकर जनरल ट्रेड लाइसेंस ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा अगले एक से दो दिन में आधिकारिक तौर पर शुरू की जाएगी।

जनरल ट्रेड लाइसेंस का प्रस्ताव मंजूर

इस प्रस्ताव को पहले 2025 में दिसंबर में निगम के सदन में मंजूरी दी गई थी। इसके तहत व्यापारी अब अपने वार्षिक संपत्ति कर के साथ ही लाइसेंस शुल्क अदा कर सकेंगे, जो कि प्रॉपर्टी टैक्स का 15% तक होगा। इससे व्यापारियों को बड़ी सुविधा होगी क्योंकि उन्हें अलग से लाइसेंस के लिए आवेदन और फीस जमा करने की परेशानी नहीं होगी।

क्या है जनरल ट्रेड लाइसेंस?

जनरल ट्रेड लाइसेंस वह लाइसेंस है जो छोटे व्यापारियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को किसी विशेष प्रकार की गतिविधि के लिए मिलने वाला लाइसेंस होता है। पहले व्यापारियों को इस लाइसेंस के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था, जिससे उन्हें अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ता था। लेकिन अब, व्यापारियों को अपनी संपत्ति के टैक्स के साथ ही यह लाइसेंस मिल जाएगा, जिससे प्रक्रिया सरल और समय की बचत होगी।

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