गुरुग्राम में एक IVF सेंटर पर बच्चा बदलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। DNA टेस्ट में मिसमैच होने के बाद पीड़ित दंपति ने FIR दर्ज कराकर न्याय की गुहार लगाई है।
गुरुग्राम। एक दंपत्ति ने IVF सेंटर पर गंभीर आरोप लगाते हुए बच्चे को बदलने का दावा किया है। राहुल राठौर नामक शिकायतकर्ता के अनुसार, फरवरी 2025 में उनकी प्रक्रिया शुरू हुई थी और 5 जनवरी 2026 को बच्चे का जन्म हुआ। परिवार को बच्चे के चेहरे में कोई समानता न मिलने पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने DNA टेस्ट करवाया। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि बच्चा उन माता-पिता का जैविक संतान नहीं है। इस चौंकाने वाली सच्चाई ने न केवल परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि IVF केंद्रों की कार्यप्रणाली और उनकी पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
DNA रिपोर्ट से खुली धोखाधड़ी की पोल
पीड़ित पिता राहुल का कहना है कि उन्होंने इलाज के लिए 5-6 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन बदले में उन्हें जो मिला वह उनके सपनों के बिल्कुल विपरीत था। दंपति ने न्याय पाने के लिए तीन महीने तक पुलिस और उच्च अधिकारियों के दर-दर चक्कर काटे, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। अंततः, कोर्ट के सख्त हस्तक्षेप के बाद पुलिस को FIR दर्ज करनी पड़ी। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि अगले ही दिन जांच पर रोक लगा दी गई। यह लापरवाही पीड़ित परिवार को और अधिक निराश कर रही है, जो अब दोषियों पर कार्रवाई और अपने बच्चे की असली पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है।
मेडिकल नैतिकता पर खड़े हुए सवाल
यह घटना दिल्ली-NCR जैसे शहरों में बढ़ते IVF केंद्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और एम्ब्रियो हैंडलिंग की कमियों को उजागर करती है। पीड़ित दंपति ने पुलिस प्रशासन पर भी पक्षपात का आरोप लगाया है। अब यह मामला चिकित्सा क्षेत्र की नैतिकता और जवाबदेही पर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है। फिलहाल पुलिस जांच प्रक्रिया रुकी हुई है, जिससे दोषियों को बचाने के कयास लगाए जा रहे हैं। अपनी लड़ाई को जारी रखते हुए दंपति अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। वे चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और IVF केंद्रों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।
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