भागलपुर। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रवीण सिंह कुशवाहा की उत्तर प्रदेश के कन्नौज में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। हादसा शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुआ। प्रवीण सिंह दिल्ली से कार द्वारा पटना लौट रहे थे, तभी चालक को झपकी आने के कारण अनियंत्रित होकर गाड़ी डिवाइडर और खंभे से टकरा गई।

​ड्राइवर की झपकी बनी काल

​जानकारी के अनुसार, तालग्राम थाना क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे पर कार चला रहे विनोद मंडल को अचानक नींद का झोंका आ गया। रफ्तार तेज होने के कारण कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से रगड़ती हुई बीच में लगे एक भारी पिलर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय पुलिस और गश्ती दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन शाम होते-होते डॉक्टरों ने प्रवीण सिंह कुशवाहा को मृत घोषित कर दिया।

​साली और भतीजे सहित 4 घायल

​इस हादसे में प्रवीण सिंह के साथ मौजूद उनकी साली कुमारी सपना (23), भतीजा विभु आर्यन (20) और चालक विनोद मंडल (40) गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का प्राथमिक उपचार मेडिकल कॉलेज तिर्वा में किया गया, जिसके बाद दो की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रेफर कर दिया गया है।

​राहुल गांधी ने व्यक्त किया शोक

​प्रवीण सिंह कुशवाहा की मृत्यु पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा दुख जताया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और जनसेवा के प्रति उनका समर्पण सदैव याद रखा जाएगा। बिहार कांग्रेस ने इसे पार्टी के लिए एक “अपूरणीय क्षति” करार दिया है।

​हादसे से चंद घंटे पहले की थी न्याय की मांग

​52 वर्षीय प्रवीण सिंह कुशवाहा महज एक महीने पहले ही जिलाध्यक्ष नियुक्त हुए थे। विडंबना यह है कि अपनी मौत से करीब 6 घंटे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर दिल्ली में मारे गए बिहारी युवक पांडव कुमार के लिए न्याय की मांग उठाई थी। उन्होंने “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के नारे पर सवाल उठाते हुए सिस्टम की चुप्पी पर कड़ा प्रहार किया था।

​सक्रिय राजनीतिक जीवन

​2007 में देवघर विद्यापीठ से स्नातक करने वाले प्रवीण सिंह बिहार कांग्रेस के सबसे कर्मठ नेताओं में से एक थे। वे स्थानीय किसानों, बेरोजगारी और सामाजिक मुद्दों पर निरंतर संघर्षरत रहते थे। उनके पिता स्वर्गीय रामदास सिंह थे और उनका पूरा परिवार सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है। उनके निधन से भागलपुर सहित पूरे बिहार के राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर है।