भागलपुर। सरकारी रिकॉर्ड में ‘तनुश्री’ नाम की एक शिक्षिका का नाम दर्ज है, लेकिन वह किसी भी स्कूल में भौतिक रूप से मौजूद नहीं है। आरोप है कि फर्जी आईडी तैयार कर एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर उसकी पहचान बनाई गई, जिसके आधार पर सरकारी खजाने से वेतन और एरियर के रूप में भारी रकम की अवैध निकासी की गई।
52 लाख से 98 लाख तक की वित्तीय अनियमितता की आशंका
मामले में सामने आए वित्तीय आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच लगभग 52 लाख रुपये की कथित निकासी का जिक्र सामने आया है। वहीं दूसरी ओर, अगस्त 2026 में एक खाते में लगभग 43 से 46 लाख रुपये के बड़े ट्रांजैक्शन और कुल वित्तीय अनियमितता की राशि लगभग 96 से 98 लाख रुपये तक होने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा, लगभग 73 लाख रुपये के एक कथित ट्रांसफर के प्रयास को बैंक द्वारा रोके जाने का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग विवरणों में रकम और तारीखों में अंतर है, इसलिए वास्तविक आंकड़ों की पुष्टि बैंक स्टेटमेंट और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
बैंक द्वारा खाता फ्रीज होने पर खुली परतें
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक संदिग्ध खाते में बड़ी रकम पहुंचने पर बैंक ने उसे फ्रीज कर दिया। कथित तौर पर एक अन्य बड़े ट्रांसफर के प्रयास को भी समय रहते रोक लिया गया। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि संदिग्ध खाते में पहुंची राशि कहां-कहां ट्रांसफर की गई, उस खाते का संचालन कौन कर रहा था और इस पूरे खेल में कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन
इस गंभीर मामले में जोगसर थाने में छह लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को हिरासत में ले लिया है और डीपीओ शशि चंद चौधरी से भी पूछताछ की जा रही है।
भागलपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता ने बताया कि फर्जी आईडी के जरिए मई 2025 से वेतन भुगतान किया जा रहा था। वहीं, डीडीसी रवि कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति शिक्षा कार्यालय के अभिलेखों और एचआरएमएस पोर्टल के डिजिटल डेटा की बारीकी से जांच कर रही है, जिसके आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

