अतीश दीपंकर, भागलपुर। जिले के पीरपैंती थाना क्षेत्र के सिरमतपुर गोपालीचक पंचायत अंतर्गत ओली टोला के समीप रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर गंगा स्नान करने गई तीन बच्चियों की गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद न केवल उनके परिवारों में, बल्कि पूरे इलाके में मातम पसर गया है। पर्व की खुशियां एक ही पल में चीख-पुकार और आंसुओं में तब्दील हो गईं।

​गहरे पानी का खौफनाक जाल और एक-दूसरे को बचाने की कोशिश

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को रक्षाबंधन के मौके पर कुछ बच्चे गंगा नदी में स्नान करने के लिए गए थे। इसी दौरान उनके साथ गईं तीन बच्चियां अनजाने में गहरे पानी की तरफ चली गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सबसे पहले एक बच्ची गहरे पानी में डूबी। उसे बचाने की कोशिश में बाकी दोनों बच्चियां भी आगे बढ़ीं, लेकिन पानी की गहराई और तेज बहाव का अंदाजा न होने के कारण वे भी संभल नहीं पाईं और तीनों गहरे पानी में लापता हो गईं।
​बच्चों को डूबता देख आसपास स्नान कर रहे अन्य बच्चों ने शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर आनन-फानन में ग्रामीण घटनास्थल पर दौड़े और बच्चियों की तलाश शुरू की। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर अथक प्रयास करते हुए करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों बच्चियों के शवों को गहरे पानी से बाहर निकाला। घटना की सूचना मिलते ही पीरपैंती थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। इसके साथ ही एसडीआरएफ (SDRF) की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई थी।

​मृतकों की पहचान और शोक में डूबा परिवार

​इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाली तीनों बच्चियों की पहचान कर ली गई है। मृतकों में दो सगी बहनें भी शामिल हैं:

  • ​करिश्मा कुमारी (18 वर्ष), पिता मुन्ना पासवान, माता रानी देवी (निवासी – ओली टोला, पोस्ट मोलटोला, थाना पीरपैंती)
  • ​चंदा कुमारी (16 वर्ष), पिता मुन्ना पासवान, माता रानी देवी (निवासी – ओली टोला, पोस्ट मोलटोला, थाना पीरपैंती)
  • ​अभिलाषा कुमारी (12 वर्ष), पिता अरविंद पासवान, माता क्रांति देवी (निवासी – कुसरपुर, नाथनगर)

​रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हुई इस आकस्मिक और दर्दनाक मौत से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और हर कोई स्तब्ध है। स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि उत्तम यादव ने इस अप्रत्याशित और भीषण दुर्घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृत बच्चियों के शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया है। प्रशासन की ओर से भी इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर नदी के घाटों पर सुरक्षा और बच्चों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।