आरा। बिहार के भोजपुर में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में घटना के आठ दिन बाद महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस ने मामले में अब तक की अपनी जांच की दिशा बदलते हुए भरत के पिता और भाई को बड़ी राहत दी है।

​पुलिस ने FIR से पिता और भाई का नाम हटाया

​भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद, पुलिस ने भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को नामजद करते हुए केस दर्ज किया था। उन पर भरत को संरक्षण देने और अवैध हथियार रखने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने इन पर धारा-132, 109(1), 351(2), 352, 3(5) BNS 2023 और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि गुरुवार को पुलिस ने यू-टर्न लेते हुए एफआईआर से दोनों का नाम हटा दिया है।

​न्यायिक जांच टीम का मौके पर निरीक्षण

​मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। गुरुवार को रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में एक टीम भरत के पैतृक गांव ‘बिलौटी’ पहुंची। इस दौरान शाहबाद रेंज के DIG सत्य प्रकाश, भोजपुर के DM तनय सुल्तानिया और SP समेत आला अधिकारी मौजूद रहे। जांच टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और भरत के परिजनों से मुलाकात कर उनका पक्ष जाना।

​परिजनों का दर्द: दोषियों को मिले फांसी

​जांच टीम के समक्ष भरत की मां आशा देवी ने अपना दुख और आक्रोश साझा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा है, लेकिन वे चाहती हैं कि इस पूरे मामले की जांच CBI से हो। उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। मां का कहना था कि प्रशासन की कार्यशैली पर उन्हें संदेह है और न्याय के लिए सीबीआई जांच अनिवार्य है।

​सरकार और सियासत की प्रतिक्रिया

​मामले के तूल पकड़ने के बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार मामले को लेकर पूरी तरह चिंतित है और निष्पक्ष जांच के लिए आयोग का गठन किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी होगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि 17 जून को हुए इस एनकाउंटर को परिजनों ने ‘पुलिसिया हत्या’ करार दिया था और इसी आधार पर पुलिस कर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था।