Bharatpur Deeg Congress: भरतपुर और डीग में शहरी निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। दोनों जिलों में कांग्रेस का एक भी बोर्ड नहीं बनने के बाद पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा और डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी को निशाने पर लिया है। विश्वेंद्र सिंह ने चुनावी हार के लिए तीनों को जिम्मेदार बताया और डोटासरा को भरतपुर आने की चुनौती तक दे दी।

विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा और दोनों जिलाध्यक्षों पर तीखी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष इस मामले में मूक-बधिर बने बैठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता इस बार दोनों जिलाध्यक्षों और डोटासरा को सबक सिखाने के लिए तैयार है।
डोटासरा भरतपुर आने की हिमाकत करके देखें
विश्वेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में डोटासरा को भरतपुर आने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि डोटासरा कभी भरतपुर आने की हिमाकत करके देखें, वे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से भी अच्छा स्वागत करेंगे। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने यह बात सोच-समझकर कही है। उनके मुताबिक भरतपुर-डीग में कांग्रेस की हार के लिए दोनों जिलाध्यक्ष जिम्मेदार हैं और इसके लिए प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
चहेतों को टिकट दिए, असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया
विश्वेंद्र सिंह ने फेसबुक पोस्ट के जरिए भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों जिलाध्यक्षों ने अपने चहेतों को टिकट दिए और कांग्रेस के पुराने व सक्रिय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया। उन्होंने लिखा कि भरतपुर-डीग कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए यही वजह जिम्मेदार है और जनता ने चुनाव में इसका जवाब दे दिया।
डोटासरा के पुराने बयान का भी किया जिक्र
विश्वेंद्र सिंह ने बातचीत के दौरान डोटासरा से जुड़ा एक पुराना कथित बयान भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि एक बार डोटासरा ने भरतपुर के लोगों के बारे में कहा था कि यहां के लोग रास्ता पूछने के भी पैसे मांग लेते हैं। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि इस बयान से भरतपुर के लोगों के प्रति डोटासरा की सोच का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मैं कांग्रेस में ही रहूंगा
अपने बयानों के बीच विश्वेंद्र सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके कांग्रेस छोड़ने की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई यह गलतफहमी न पाले कि वे भाजपा में जा रहे हैं। वे कांग्रेस में ही रहेंगे और पार्टी को मजबूत करने के लिए आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में कांग्रेस की हार से उन्हें दुख हुआ है। इसी वजह से उन्होंने पार्टी के भीतर जिम्मेदारी तय करने की बात उठाई है।
2013 के विवाद का भी आया जिक्र
डोटासरा को भरतपुर आने पर डॉ. चंद्रभान जैसा स्वागत करने के बयान के साथ 2013 का एक पुराना विवाद भी चर्चा में आ गया है। 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान भरतपुर में संभाग स्तरीय बैठक लेने पहुंचे थे। उस बैठक में विश्वेंद्र सिंह भी मौजूद थे। खबर के मुताबिक बैठक के दौरान विश्वेंद्र सिंह के समर्थकों ने तत्कालीन जिलाध्यक्ष सहित वहां मौजूद नेताओं के साथ मारपीट की थी। बताया गया कि डॉ. चंद्रभान को बीच-बचाव कर बैठक स्थल से बाहर निकाला गया था और इसके बाद वे जयपुर लौट गए थे। उस समय विश्वेंद्र सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
पंचायतीराज चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
विश्वेंद्र सिंह का यह हमला ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव होने हैं। निकाय चुनाव के नतीजों के बाद भरतपुर-डीग में कांग्रेस संगठन को लेकर सवाल उठे हैं। भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस को सात सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने 36 और भाजपा ने 20 वार्ड जीते। भरतपुर और डीग के कुल 415 शहरी वार्डों में कांग्रेस के हिस्से 19 वार्ड आए। फिलहाल विश्वेंद्र सिंह के आरोपों पर प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और कांग्रेस प्रवक्ताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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