अजय सैनी, भिवानी. भिवानी स्थित बाल सेवा आश्रम में रह रहे बच्चों के साथ कथित शारीरिक प्रताड़ना एवं दुर्व्यवहार का एक गंभीर मामला सामने आया है। आश्रम में रहने वाले कुछ बच्चों ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया असीजा के समक्ष आश्रम के मुखिया, जिन्हें बच्चे ‘प्रधान जी’ कहकर संबोधित करते हैं, पर मारपीट एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया असीजा 30 अक्टूबर 2026 को दोपहर के समय अपने परिवार के एक सदस्य का जन्मदिन मनाने के उद्देश्य से बाल सेवा आश्रम पहुंची थीं। प्रिया असीजा पिछले कई वर्षों से आश्रम में आती रही हैं तथा वहां रहने वाले कुछ बच्चे उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और दीदी कहकर संबोधित करते हैं।

इस दौरान बच्चों ने उनसे बातचीत करते हुए अपनी पीड़ा साझा की। बच्चों के अनुसार, आश्रम के मुखिया द्वारा उनके साथ शारीरिक मारपीट की जाती है। बच्चों ने विशेष रूप से एक हालिया घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले दिनों आश्रम के एक बच्चे को बिना किसी उचित कारण के पीटा गया था।

बच्चों ने यह भी बताया कि उन्होंने इस घटना के संबंध में बाल कल्याण समिति के सदस्यों के समक्ष शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बच्चों ने बातचीत में यह गंभीर आरोप भी लगाया कि आश्रम के मुखिया चाहते हैं कि वे आश्रम छोड़कर वहां से भाग जाएं।

प्रिया असीजा ने बच्चों द्वारा बताई गई परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाल सेवा आश्रम जैसे संस्थानों में रहने वाले बच्चे पहले से ही विशेष संरक्षण एवं देखभाल के पात्र होते हैं। ऐसे बच्चों को सुरक्षित वातावरण, स्नेह और सम्मान मिलना चाहिए, न कि भय, मारपीट अथवा प्रताड़ना का सामना करना पड़े।

उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह न केवल बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि उन संस्थागत व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े करता है जिनका दायित्व बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

इस मामले में प्रिया असीजा ने 31 अक्टूबर 2026 को हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, पंचकूला की अध्यक्ष को लिखित शिकायत भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

शिकायत में आयोग से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

  1. बाल सेवा आश्रम, भिवानी का तत्काल औचक निरीक्षण करवाया जाए।
  2. आश्रम में रह रहे बच्चों से प्रबंधन की अनुपस्थिति में स्वतंत्र एवं गोपनीय वातावरण में बातचीत की जाए।
  3. बच्चों के साथ कथित मारपीट एवं शारीरिक प्रताड़ना के आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
  4. बाल कल्याण समिति को पूर्व में की गई शिकायत तथा उस पर हुई कार्रवाई की जांच की जाए।
  5. शिकायत करने वाले बच्चों को किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या प्रतिशोध से सुरक्षा प्रदान की जाए।
  6. आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

प्रिया असीजा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि आश्रम में रह रहे बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रशासन एवं संबंधित विभागों से भी अपील की कि इस मामले को सामान्य शिकायत समझकर नजरअंदाज न किया जाए।

उन्होंने कहा कि बच्चों की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए। जिन बच्चों के संरक्षण की जिम्मेदारी समाज और संस्थाओं ने ली है, उन्हें किसी भी परिस्थिति में असुरक्षित महसूस नहीं होना चाहिए।
प्रिया असीजा ने मांग की है कि आयोग इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर जांच शुरू करवाए और बच्चों को भयमुक्त एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।