शब्बीर अहमद, भोपाल। राजधानी भोपाल में सीलिंग की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। इस दौरान कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। सुबह सीलिंग की कार्रवाई और शाम को प्रतिष्ठानों के खुलने पर नाराजगी जताई। सीलिंग की कार्रवाई का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। 

सुप्रीम कोर्ट से मास्टर प्लान को लेकर हरी झंडी मिल गई है। सरकार मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी कर सकेगी। सरकार की तरफ से कोर्ट में पक्ष रखा गया। सीलिंग मामले में अब कोई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। पहले बनाई गई कमेटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। वह कमेटी पहले ही भंग हो चुकी है।

SC ने 5 बिंदुओं के निर्देश किए जारी

SC ने कहा है कि रहवासी इलाकों में किसी भी प्रकार की कमर्शियल गतिविधियों न हो

सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहे

जिन इलाकों के लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या मिक्स्ड लैंड यूज हैं उनको सीलिंग की कार्रवाई पर कोई न मिलाए, रहवासी इलाकों में कार्रवाई नहीं रुके

MP सरकार की कमेटी के कारण कंटेंप्ट वाले मामले में कोर्ट के “एमिकस क्यूरी” AK सिन्हा ने जांच किया था। सिन्हा ने SC को बताया कि कमेटी गठित कर सरकार ने कंटेंप्ट किया। जिसके बाद MP सरकार के वकील KN नटराजन ने बताया कि सरकार से बात हो गई है। सरकार ने आश्वासन दिया कि अब कोई कमेंट नहीं बनेगी, न ही सीलिंग की कार्रवाई बाधित की जाएगी। SC ने सरकार के आश्वासन को स्वीकार किया (कंटेंप्ट नहीं लगाया, लेकिन लिखित ऑर्डर से स्पष्ट होगा)।

इसके बाद एमिकस क्यूरी AK सिन्हा ने SC को बताया कि आज सुबह सुनवाई से पहले भोपाल के लगभग 10 रहवासियों की शिकायतें आई। सुबह सीलिंग की कार्रवाई और शाम को प्रतिष्ठानों के खुलने पर जताई नाराजगी। SC ने भोपाल से मिली शिकायतों पर कोर्ट ने नोट किया कि कई जगह (Full compliance) “पूर्णतः पालन” नहीं हो रहा है विशेष रूप से भोपाल में। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई का सख्ती से पालन करने के निर्देश हैं तो पूर्णतः पालन हो। वकील नटराजन ने कोर्ट को बताया कि भोपाल में 1995 से अभी तक कोई मास्टर प्लान नहीं आया (2005 में एक्सपायर हुआ था)। नटराजन ने SC से निवेदन किया कि नया मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सरकार के पास है, अब उसे लागू करना है।

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