संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस के दावे, सुरक्षा के इंतजाम और कमिश्नरी सिस्टम… इसके बावजूद महिला अपराधों का बढ़ता ग्राफ चिंता बढ़ाने वाला है। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर लगाम लगाने की चुनौती लगातार बड़ी होती जा रही है। भोपाल के अलग अलग थानों में 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक महज नौ महीने में महिला अपराध के 2 हजार 801 मामले दर्ज हुए हैं। सवाल ये है कि आखिर महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के दावे जमीन पर कितने असरदार साबित हो रहे हैं ?

जब राजधानी में ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं तो पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। हालांकि सवाल जरूर उठ रहा है कि बीते 9 महीने में भोपाल में महिला अपराध का ग्राफ 26 फीसदी तक बढ़ गया है..जो अपने आप मे जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा कर रहा है। 

राजधानी में महिला सुरक्षा पर उठे सवाल

भोपाल में महिलाओं के खिलाफ 26% अपराध बढ़े

अपहरण के मामलों में 50% का उछाल

पिछले 9 महीने में 2801 केस हुए दर्ज

2025 में महिलाओं के खिलाफ कुल 2216 मामले दर्ज हुए

2024 में कुल मामलों की संख्या 2482 थी

अपहरण के मामले 337 से बढ़कर 505 हो गए

दुष्कर्म के मामले 276 से बढ़कर 301

सामूहिक दुष्कर्म का एक मामला दर्ज हुआ

2025 में सामूहिक बलात्कर का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ

छेड़छाड़ के मामले 289 से बढ़कर 323 हो गए,2024 में यह संख्या 277 थी

इधर भोपाल में महिलाओं के साथ बढ़ते अपराधों ने सियासी गर्माहट महसूस करवा दी है। कांग्रेस इस बात का दावा कर रही है कि भले ही मध्य प्रदेश की सरकार महिला सुरक्षा,आर्थिक मजबूती सहित कई मामलो में अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन जमीन स्तर पर यह सिद्ध हो रहा है कि प्रदेश के अंदर महिलाओं के साथ अपराध बढ़ रहे हैं कांग्रेस ने आगे कहा कि महिला अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। सरकार को विचार करना चाहिए राजधानी में  कमिश्नर प्रणाली लागू करने का मकसद क्या था, शहर में अपराध कम करना जबकि अपराध कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहे हैं।

वही दूसरी तरफ बीजेपी इस पूरे मामले में कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है.भाजपा ने कहा कि  सरकार महिला सुरक्षा के लिए काम कर रही है महिला पुलिस बल में भी बढ़ोतरी की गई है प्रदेश में महिला पुलिस थाने बनाए गए हैं। कांग्रेस के समय थानों में महिला के अपराध तक दर्ज नहीं होते थे। 

महिला सुरक्षा के लिए अभियान जारी हैं पुलिस के दावे भी लगातार हो रहे हैं लेकिन अपराधों का बढ़ता ग्राफ इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। भोपाल में नौ महीने में महिला अपराध के 2 हजार 801 मामले दर्ज हुए। ऐसे में सवाल है कि आखिर महिला सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों का जमीन पर असर होता दिखाई नहीं दे रहा है। 

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