संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल के मॉडल अस्पतालों में शुमार जेपी अस्पताल बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने के दावे तो करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है, लेकिन यहां मरीजों को इलाज से पहले एक और जंग लड़नी पड़ रही है और ये जंग है अपने वार्ड तक पहुंचने की अस्पताल की 6 में से 5 लिफ्ट बंद पड़ी हैं। गर्भवती महिलाएं हो, ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज हो या गंभीर हालत में पहुंचे मरीज या मरीजों के साथ आए परिजन, सभी को मंजिल तक पहुंचने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। हैरानी की बात ये है कि लिफ्टें एक दो दिन से नही बल्कि 6 महीनों से बंद है।

जिस अस्पताल में रोजाना एक हजार से ज्यादा मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते है, वहां बुनियादी सुविधा का ये हाल है। जेपी अस्पताल के तीन ब्लॉकों में कुल छह लिफ्ट लगी है लेकिन इनमें से पांच बंद पड़ी हैं। यानी मरीजों और उनके परिजनों के पास आवाजाही के लिए सिर्फ एक लिफ्ट का सहारा बचा है। गंभीर मरीजों ओर उनके परिजनों को वार्ड तक पहुंचाने में परिजनों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

प्रसूति वार्ड की लिफ्ट 6 महीने से बंद

अस्पताल के पुराने सी ब्लॉक में प्रसूति वार्ड के पास लगी तीनों लिफ्ट करीब छह महीने से बंद है। यानी जिस वार्ड में गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को पहुंचना है वही लिफ्ट की सुविधा नदारद है। सोनोग्राफी सेंटर के पास लगी लिफ्ट भी लंबे समय से बंद है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निर्देश पर कुछ समय के लिए इसे शुरू किया गया था लेकिन अब फिर बंद हो गई है।

सबसे बड़ा सवाल उन मरीजों को लेकर है, जिनका ऑपरेशन हुआ है और जो खुद चलने की हालत में नही हैं। गर्भवती महिलाएं, स्ट्रेचर पर पड़े मरीज और गंभीर रोगी आखिर सीढ़ियों के सहारे कितनी दूर जाएंगे। परिजनों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर तक के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे में लिफ्ट बंद होना सिर्फ असुविधा नही बल्कि मरीजों की मुश्किलें बढ़ाने वाली स्थिति है। लिफ्टें महीनों से बंद है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन के पास इनके संचालन का कोई ठोस समाधान फिलहाल सामने नहीं है।

हॉस्पिटल अधीक्षक ने कही ये बात

अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन का कहना है कि मैं जानता हूं कि लिफ्ट बंद पड़ी है, हमने PWD को करवाई के लिए लिखा है। वहीं ऑफ कैमरा कहा कि लिफ्टों के रखरखाव के लिए बजट का इंतजार किया जा रहा है। राशि मिलते ही मरम्मत कराकर लिफ्टें शुरू कराई जाएंगी।

बजट का इंतजार कर रहा प्रबंधन

जेपी अस्पताल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मॉडल अस्पताल कहा जाता है, लेकिन यहां की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। छह में से पांच लिफ्ट बंद हैं मरीजों को वार्ड तक पहुंचने में परेशानी हो रही है और प्रबंधन बजट का इंतजार कर रहा है। सवाल सीधा है कि जब अस्पताल में मरीजों के लिए लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधा ही उपलब्ध नहीं है तो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों का क्या मतलब? आखिर मरीजों को इलाज मिलेगा या पहले मंजिल तक पहुंचने की जद्दोजहद करनी पड़ेगी।

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