राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण का मामला एक बार फिर गरमा गया है। राज्य सरकार इस मुद्दे पर अब सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में जुट गई है। ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने की मांग और इससे जुड़ी कानूनी पेचीदगियों को लेकर सरकार गंभीर कदम उठाने जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस मामले में देश और प्रदेश के वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों से विस्तृत अभिमत और कानूनी सलाह ले ली है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने से पहले मामले के सभी कानूनी पहलुओं और तकनीकी पक्षों पर गहन चर्चा की गई है। वरिष्ठ वकीलों की अगुवाई में याचिका का प्रारूप तैयार किया जा रहा है और कभी भी सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है।
हाईकोर्ट का क्या था फैसला?
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को लेकर 14 प्रतिशत ही सीमा रखने का फैसला सुनाया था, जिसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसे लेकर लगातार सुगबुगाहट तेज थी।
कांग्रेस भी मुखर
सरकार के इस कदम से पहले विपक्षी दल कांग्रेस और ओबीसी महासभा भी लगातार यह मांग उठाती रही हैं कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ मिलना चाहिए। इन संगठनों ने भी पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात कही थी। बहरहाल, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाली याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय का क्या रुख रहता है।
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