शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में नर चीता KNG22 की गोली मारकर की गई हत्या के मामले को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मामले की तह तक जाने और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने के लिए केंद्र सरकार ने एक हाई-लेवल सेंट्रल टीम को मौके पर जांच के लिए रवाना कर दिया है। यह केंद्रीय टीम अब मध्य प्रदेश वन विभाग और राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी/एसटीएफ (STF) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से जांच करेगी।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ के राष्ट्रीय महत्व और ‘बिग कैट’ की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए 19 महीने के नर चीता KNG22 की मौत पर गहरी चिंता जताई है। मंत्रालय ने इसे अत्यंत संवेदनशील मामला मानते हुए तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय केंद्रीय दल का गठन किया है।

इस सेंट्रल टीम में तीन वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है:

  1. इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट्स, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)।
  2. अतिरिक्त निदेशक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB)।
  3. क्षेत्रीय उप निदेशक, WCCB।

क्या होगी सेंट्रल टीम की जिम्मेदारी?

यह उच्चस्तरीय टीम श्योपुर और कूनो पहुंचकर चीते की मौत के पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों की गहन जांच करेगी। टीम घटनास्थल के सबूतों को खंगालेगी, राज्य के वन विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और मॉनिटरिंग सिस्टम की कड़ी समीक्षा करेगी। जांच पूरी होने के बाद यह टीम अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें केंद्रीय मंत्रालय को सौंपेगी, जिसके आधार पर फील्ड अथॉरिटीज और राज्य सरकार को आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि मादा चीता ‘नीरवा’ का यह शावक (KNG22) 25 अक्टूबर को कूनो प्रोटेक्टेड एरिया के बाहर मुरैना के टेरिटोरियल फॉरेस्ट में घायल अवस्था में मिला था। उसी दिन श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन द्वारा इसे रेस्क्यू कर जबलपुर वेटनरी फैसिलिटी में इलाज के लिए भेजा गया था। यहां गंभीर हालत में उसकी सर्जरी की गई, जिसके दौरान उसके शरीर से 5 फायरआर्म पेलेट्स(बंदूक के छर्रे) निकाले गए थे।

तमाम मेडिकल कोशिशों के बावजूद चीता KNG22 को बचाया नहीं जा सका और 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। मेडिकल परीक्षण में छर्रों के कारण शरीर के अंदरूनी अंगों में गंभीर चोटें आने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में राज्य सरकार पहले ही वन और पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन कर चुकी है, और अब केंद्रीय टीम के जुड़ने से इस पूरे मामले की जांच और अधिक तेज व व्यापक हो गई है।

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