नई दिल्ली। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “विष्णु का अवतार” बताया है। उन्होंने यह सम्मान तब दिया जब भारतीय नेता सरकार के प्रमुख के तौर पर जनसेवा के 25 साल पूरे कर रहे हैं। ‘हमारे समय के अवतार’ (An Avatar for Our Times) शीर्षक से ऑनलाइन प्रकाशित एक विस्तृत लेख में तोबगे ने बताया कि वे यह नाम हल्के-फुल्के अंदाज़ में नहीं ले रहे हैं; उन्होंने इस बात का ज़िक्र जुलाई 2019 में दोनों नेताओं के बीच हुई एक निजी मुलाक़ात के संदर्भ में किया।
भूटानी नेता ने याद किया कि उस मुलाक़ात के दौरान उन्होंने PM मोदी से कहा था कि इस क्षेत्र में ज्ञानी शासकों को लंबे समय से ईश्वरीय रूप माना जाता रहा है। हालाँकि, तोबगे ने शुरू में सोचा था कि कहीं वे भावनाओं में बहकर तो ऐसा नहीं कह रहे, लेकिन बाद के वर्षों में मोदी के कामकाज और बदलाव लाने वाली नीतियों को देखने के बाद उन्हें यकीन हो गया कि उनकी शुरुआती सोच बिल्कुल सही थी।
सांस्कृतिक समानता और रिगसुम गोनपो (Rigsum Gonpo) से जुड़ाव
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए तोबगे ने PM मोदी के नेतृत्व की शैली को हिमालयी परंपराओं और बौद्ध विरासत, दोनों से जोड़ा। उन्होंने ‘रिगसुम गोनपो’ की बौद्ध अवधारणा का ज़िक्र किया—जो ज्ञान, करुणा और साहस का प्रतिनिधित्व करने वाले बोधिसत्वों की सम्मानित त्रिमूर्ति है—और कहा कि असरदार और निस्वार्थ शासन के लिए इन बुनियादी गुणों के अनोखे मेल की ज़रूरत होती है।
तोबगे ने नरेंद्र मोदी के सफ़र पर रोशनी डाली—गुजरात में लगभग 13 साल तक नेतृत्व करने से लेकर पूरे भारत में राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे और प्रशासनिक कामकाज में बदलाव लाने तक। भूटान के प्रधानमंत्री ने कहा कि एक बड़ा विज़न या लक्ष्य तय करना तो आसान है, लेकिन सामाजिक और आर्थिक ढाँचे में बदलाव को लागू करने के लिए जिस तरह के समर्पण की ज़रूरत होती है, वही असली राजकाज (statecraft) की पहचान है।
‘भारत फ़ॉर भूटान’ (Bharat for Bhutan): रणनीतिक संबंध और विकास
यह सम्मान नई दिल्ली और थिम्पू के बीच मज़बूत कूटनीतिक और रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है। तोबगे ने जून 2014 में पद संभालने के तुरंत बाद PM मोदी की भूटान की पहली विदेश यात्रा को याद किया, जहाँ भारतीय प्रधानमंत्री ने “B4B: भारत फ़ॉर भूटान, भूटान फ़ॉर भारत” का नारा दिया था।
भारत की विकास सहायता ने भूटान की 11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजनाओं में मदद की, जिससे बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा ग्रिड के विस्तार और स्थानीय आर्थिक विकास के लिए फ़ंड मिला। टोबगे ने कहा कि भूटान के लोग बहुत खुश हुए जब राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने मोदी को ‘ऑर्डर ऑफ़ द ड्रुक ग्यालपो’ से सम्मानित किया—जो भूटान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है—और इस तरह वे यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी नेता बने।
शासन के 25 साल पूरे होने का महत्व
टोबगे की ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब दुनिया भर के नेता नरेंद्र मोदी को सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे करने पर बधाई दे रहे हैं। इस दौरान वे अक्टूबर 2001 से गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और अब प्रधानमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं।
‘विकसित भारत 2047’ के विज़न पर बात करते हुए टोबगे ने कहा कि भारत की तरक्की सीधे तौर पर क्षेत्रीय स्थिरता को मज़बूत करती है; उन्होंने कहा कि “विकसित भारत का मतलब है विकसित भूटान”। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नागरिकों की सामूहिक भागीदारी—’सबका प्रयास’—मोदी की सबसे अहम उपलब्धि रही है, जिसने शासन को ऊपर से थोपी जाने वाली नीति के बजाय एक सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास में बदल दिया है।
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