Odisha Desk, कटक: वर्ष 2021 के बहुचर्चित सहायक वन संरक्षक (ACF) सौम्य रंजन महापात्र हत्याकांड मामले में उनकी पत्नी बिद्याभारती पांडा की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। ओडिशा हाईकोर्ट ने बिद्याभारती की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे उनकी गिरफ्तारी पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं।

बिद्याभारती ने संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले, हाईकोर्ट ने उन्हें कोई अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए जांच एजेंसी को केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। बिद्याभारती ने हाईकोर्ट के रुख को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उन्हें नियमानुसार अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की अनुमति दी थी।

सौम्य रंजन के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पारलाखेमुंडी के एसडीएमजे कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामले का संज्ञान लिया है।

हाईकोर्ट ने पहले बिद्याभारती को निचली अदालत के समक्ष पेश होने की समयसीमा 1 अक्टूबर से बढ़ाकर 30 अक्टूबर तक की थी। हालांकि, निर्धारित तिथि तक अदालत में पेश होने के बजाय उन्होंने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। इस मामले में तत्कालीन डीएफओ (DFO) और रसोइये को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

क्या था पूरा मामला?

12 जुलाई 2021 को गजपति जिले के पारलाखेमुंडी स्थित सरकारी आवास में सौम्य रंजन महापात्र रहस्यमय परिस्थितियों में झुलस गए थे। अगले ही दिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। सौम्य रंजन के परिवार ने बिद्याभारती, डीएफओ और रसोइये पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब सभी की निगाहें बिद्याभारती के अगले कानूनी कदम पर टिकी हैं, क्योंकि उनके पास अब पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने या उच्च अदालत का रुख करने के सीमित विकल्प बचे हैं।

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