Technology Desk: अमेरिका में फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा और सोशल मीडिया की लत से जुड़ा एक बड़ा मुकदमा चल रहा है। कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित फेडरल कोर्ट में चल रही इस सुनवाई में कंपनी के पूर्व सेफ्टी इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इस केस में 29 अमेरिकी राज्यों ने मेटा पर बच्चों और किशोरों को नुकसान पहुंचाने वाले तरीके से अपने प्लेटफॉर्म डिजाइन करने और बच्चों की निजी जानकारी से जुड़े कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए हैं।

पूर्व इंजीनियर ने क्या आरोप लगाए?

आर्टुरो बेजार ने मेटा में करीब छह साल तक बच्चों की सुरक्षा से जुड़े टूल्स पर काम किया था। कोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी को इस बात की जानकारी थी कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इन समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

बेजार ने कंपनी की नीतियों को लेकर कथित तौर पर “डोंट आस्क, डोंट टेल” रवैये की बात कही। उनके मुताबिक, 13 साल से कम उम्र के बच्चे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर रहे हैं, इसकी जानकारी होने के बावजूद कंपनी ने उन्हें पहचानने और हटाने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं की।

उन्होंने अपनी 14 साल की बेटी का अनुभव भी कोर्ट में बताया। उनके मुताबिक, जब उनकी बेटी ने इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया तो उसे अनजान लोगों से सेक्स और निजी अंगों की तस्वीरों से जुड़े अनुरोध मिलने लगे। बेजार ने कहा कि इस घटना ने उन्हें प्लेटफॉर्म पर बच्चों के सामने मौजूद खतरों को व्यक्तिगत रूप से समझने का मौका दिया।

‘टेक अ ब्रेक’ फीचर पर भी सवाल

बेजार ने इंस्टाग्राम के “Take a Break” फीचर को भी सवालों के घेरे में रखा। उनका कहना है कि यह फीचर यूजर को कुछ समय के लिए ऐप से दूर रहने की याद दिलाता है, लेकिन इसे खुद से चालू करना पड़ता है।

यानी अगर कोई बच्चा या किशोर इस फीचर को सक्रिय नहीं करता, तो उसे इसका फायदा नहीं मिलता। कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों में भी बेजार की गवाही का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह फीचर यूजर को ऐप इस्तेमाल करने से रोकता नहीं है, बल्कि केवल ब्रेक लेने की याद दिलाता है।

बेजार का आरोप है कि मेटा के प्रोडक्ट डिजाइन में यूजर को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने को काफी महत्व दिया गया। उनका कहना है कि नोटिफिकेशन और दूसरे फीचर्स इस तरह तैयार किए गए कि यूजर बार-बार ऐप पर लौटे और ज्यादा समय तक स्क्रॉल करता रहे।

बच्चों तक पहुंच रहा था आपत्तिजनक कंटेंट

मामले में बच्चों को सेक्सुअल प्रीडेटर्स और अन्य खतरनाक कंटेंट से बचाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। राज्यों का आरोप है कि मेटा को प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़ी सुरक्षा समस्याओं की जानकारी थी, फिर भी कंपनी ने अपने सिस्टम में पर्याप्त बदलाव नहीं किए।

मामले में यह भी आरोप है कि कंपनी ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा उनके माता-पिता की सहमति के बिना इकट्ठा किया। यह आरोप अमेरिकी बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी से जुड़े संघीय कानून COPPA के तहत बेहद महत्वपूर्ण है।

29 राज्यों ने मेटा पर किया मुकदमा

यह मामला केवल एक बच्चे या एक परिवार से जुड़ा मुकदमा नहीं है। अमेरिका के 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने मेटा के खिलाफ कार्रवाई की है। आरोपों में बच्चों को प्लेटफॉर्म का आदी बनाने वाले डिजाइन, मानसिक स्वास्थ्य पर नुकसान, कम उम्र के यूजर्स का डेटा इकट्ठा करना और सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करके दिखाना शामिल हैं।

हालांकि ओकलैंड में चल रहे मौजूदा ट्रायल में सभी 29 राज्यों के दावे एक साथ नहीं सुने जा रहे हैं। इस चरण में कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी के मामले शामिल हैं। ट्रायल कई हफ्तों तक चलने की उम्मीद है।

मेटा पर कितने बड़े जुर्माने का खतरा?

इस मुकदमे में संभावित आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है। राज्यों की ओर से मांगी जा सकने वाली रकम सैद्धांतिक रूप से करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक बताई गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹120 लाख करोड़ से अधिक बैठ सकती है, हालांकि वास्तविक जुर्माना इससे काफी अलग हो सकता है और यह अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।

मेटा की अपनी सिक्योरिटीज फाइलिंग में भी बताया गया है कि बच्चों और युवाओं से जुड़े अलग-अलग मुकदमों में कुछ मामलों में दावेदारों ने एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा तक की संभावित रकम का संकेत दिया है।

इसके अलावा राज्यों की मांग केवल पैसे तक सीमित नहीं है। कुछ मामलों में फेसबुक और इंस्टाग्राम के काम करने के तरीके में बदलाव, बच्चों की उम्र की बेहतर जांच और प्लेटफॉर्म के कुछ डिजाइन फीचर्स पर नए नियम लागू करने की मांग भी की गई है।

मेटा ने आरोपों पर क्या कहा?

मेटा ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए कई फीचर्स और सुरक्षा उपाय विकसित किए हैं। कंपनी यह भी कहती है कि वह पेरेंट्स, सुरक्षा विशेषज्ञों और अन्य संगठनों के साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा को बेहतर बनाने पर काम कर रही है।

मेटा के वकीलों ने अदालत में यह तर्क भी दिया है कि सोशल मीडिया और किशोरों को होने वाले नुकसान के बीच सीधा और साबित संबंध मान लेना सही नहीं है। कंपनी का कहना है कि बच्चों का अपनी उम्र के बारे में गलत जानकारी देना भी प्लेटफॉर्म के लिए एक बड़ी चुनौती है।

पहले भी मेटा के खिलाफ आए हैं फैसले

बच्चों और युवाओं से जुड़े मामलों में यह मेटा की पहली कानूनी चुनौती नहीं है। कंपनी के खिलाफ अमेरिका में कई अलग-अलग मुकदमे चल रहे हैं। 2026 में लॉस एंजिल्स के एक मामले में एक जूरी ने भी मेटा को युवा यूजर्स को सोशल मीडिया की लत लगने से जुड़े मामले में जिम्मेदार माना था। मेटा ने उस फैसले के खिलाफ अपील की है।

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