पटना। बिहार के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमृत 2.0 योजना के तहत राज्य के प्रमुख शहरों में जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 21 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य शहरी आबादी की निजी बोरिंग और पानी के टैंकरों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना है।

​बुडको की देखरेख में 2451 करोड़ का निवेश

​बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (BUIDCO) को इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुल 2,451.39 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इन योजनाओं में से 18 प्रोजेक्ट्स पर धरातल पर काम शुरू हो चुका है। शेष 3 परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति के अंतिम चरण में रखा गया है, जिसके बाद उन पर भी निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

​इन प्रमुख शहरों की बदलेगी सूरत

​इस योजना का प्राथमिक फोकस पटना, आरा, बक्सर, भागलपुर, बिहारशरीफ, कटिहार, बेतिया और छपरा जैसे 18 महत्वपूर्ण शहरों पर है। वर्तमान में इन शहरों के कई इलाकों में पाइपलाइन काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी है, जिसके कारण पानी का दबाव कम रहता है या आपूर्ति बाधित होती है। नई योजना के तहत न केवल पाइपलाइन बदली जाएगी, बल्कि नए ओवरहेड टैंक (जल मीनार) भी बनाए जाएंगे।

​2027 तक ‘हर घर नल का जल’ का लक्ष्य

​राज्य सरकार ने इन सभी परियोजनाओं को 2027 तक पूर्ण करने का कड़ा लक्ष्य (डेडलाइन) निर्धारित किया है। बुडको के अधिकारियों के अनुसार, मोतिहारी, पूर्णिया, दरभंगा और सासाराम जैसे शहरों में निविदा (टेंडर) प्रक्रिया अंतिम दौर में है, जिस पर लगभग 1,307.91 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, जिन 9 परियोजनाओं पर काम तेज गति से चल रहा है, उनके लिए 802.40 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं।

​जल संकट से मिलेगी स्थायी मुक्ति

​बढ़ती आबादी के कारण शहरों में जल स्तर नीचे जा रहा है, जिससे निजी बोरिंग फेल हो रही हैं। अमृत 2.0 के तहत अतिरिक्त जल स्रोतों और अत्याधुनिक फिल्टरेशन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा, जिससे आम जनता को टैंकरों के लिए होने वाली भागदौड़ और निजी बोरिंग के भारी खर्च से बड़ी राहत मिलेगी।