पटना। दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अब पूरे देश में एक बड़ी राजनीतिक और छात्र क्रांति का रूप ले चुकी है। छात्रों के लगातार सड़क पर उतरने और बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस बड़ी जीत के बाद, अब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए 30 जुलाई को पूरे बिहार बंद और 31 जुलाई को पटना बंद का ऐलान कर दिया है।
इस सिलसिले में पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर जब दिल्ली में यह स्पष्ट वादा किया गया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो अब तक छात्रों को जेल से रिहा क्यों नहीं किया गया है? उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ-साथ कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को भी जेलों में बंद किया जा रहा है।
पूर्व विधायक ने वर्तमान सम्राट सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रशासन की यह तानाशाही और दमनकारी नीतियां अब और अधिक बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। सरकार के इसी तानाशाही रवैये और छात्रों-नेताओं की अवैध गिरफ्तारी के विरोध में AISA और RYA ने आगामी 30 जुलाई को पूरे बिहार में पूर्ण बंद का आह्वान किया है, जबकि राजधानी पटना में यह विरोध प्रदर्शन 31 जुलाई तक जारी रहेगा। इन संगठनों का साफ कहना है कि जब तक सभी छात्रों और नेताओं को ससम्मान रिहा नहीं किया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष और आंदोलन थमने वाला नहीं है।


