कुंदन कुमार, पटना। बिहार सरकार ने राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। हाल ही में संपन्न हुई कैबिनेट की उच्चस्तरीय बैठक में कुल 43 एजेंडों पर मुहर लगाई गई है। इस बैठक में राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने और औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने वाले कई प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई है, जिनमें औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और नई नीतियां शामिल हैं।
निवेश और रोजगार के अवसर
कैबिनेट बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए दो प्रमुख निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है:
- किशनगंज (ठाकुरगंज) में स्टार्च इकाई: ठाकुरगंज में इमेज स्टार्च उत्पादन इकाई की स्थापना के लिए 88 करोड़ 62 लाख रुपये के पूंजी निवेश को मंजूरी दी गई है। इस यूनिट के शुरू होने से क्षेत्र के लगभग 217 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कामगारों को रोजगार मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
- गोपालगंज (बैकुंठपुर) में एथेनॉल इकाई: बैकुंठपुर में ग्रीन बेस्ट एथेनॉल उत्पादन इकाई के लिए 97 करोड़ 80 लाख 18 हजार रुपये के निवेश को स्वीकृति मिली है। इस इकाई की स्थापना से लगभग 210 कामगारों को सीधे तौर पर रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।
सशक्त बिहार का विजन: एमएसएमई नीति 2026 और नियमावली को मंजूरी
राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। एक करोड़ उद्यमी परिवार, सशक्त बिहार का आधार की परिकल्पना के तहत बिहार एमएसएमई नीति 2026 और सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियमावली 2026 को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई है।
इस नई नीति के तहत सरकार ने अगले 5 वर्षों में कई बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
राज्य के एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाना।
एक करोड़ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करना।
साख जमा अनुपात को 75 प्रतिशत तक पहुंचाना।
राज्य के सभी 38 जिलों में एमएसएमई केंद्र और प्रत्येक जिले में एक क्लस्टर स्थापित करना।

