विकास कुमार, सहरसा। बिहार के सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे डाटा एंट्री ऑपरेटरों, प्रोग्रामर और आईटी सहायकों का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। राज्यकर्मी का दर्जा पाने और अपनी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करवाने की मांग को लेकर सहरसा जिले में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। रविवार को बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के प्रदेशव्यापी आह्वान पर सहरसा जिला इकाई की अगुवाई में एक भव्य और विशाल रोड मार्च निकाला गया। इस आंदोलन में जिलेभर के विभिन्न सरकारी कार्यालयों और विभागों में तैनात तकनीकी कर्मियों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सरकार के खिलाफ एक एकजुटता का संदेश दिया।

​आंबेडकर चौक से शुरू हुआ शांतिपूर्ण शक्ति प्रदर्शन

​इस भव्य रोड मार्च की शुरुआत स्थानीय आंबेडकर चौक से की गई, जिसका कुशल नेतृत्व जिलाध्यक्ष नेहा रंजन और जिला सचिव नारायण पोद्दार ने संयुक्त रूप से किया। हाथों में अपनी मांगों से जुड़ी तख्तियां और बैनर थामे हजारों कर्मियों ने सड़कों पर मार्च करते हुए जमकर नारेबाज़ी की। संपूर्ण प्रदर्शन के दौरान यह साफ तौर पर देखा गया कि इन कर्मियों के भीतर लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। इसके बावजूद, पूरा मार्च पूरी तरह से अनुशासित, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण दायरे में संपन्न हुआ, जो कर्मियों की परिपक्वता को दर्शाता है।

​डिजिटल युग की रीढ़

​रोड मार्च के समापन पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष नेहा रंजन और जिला सचिव नारायण पोद्दार ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज राज्य के तमाम सरकारी विभागों में डिजिटलीकरण का पूरा जिम्मा इन्हीं डाटा एंट्री ऑपरेटरों और आईटी कर्मियों के कंधों पर टिका हुआ है। ये कर्मी धरातल पर विभागीय कामकाज को सुचारु, पारदर्शी और तीव्र गति से संचालित करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
​बावजूद इसके, विडंबना यह है कि वर्षों से निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं देने के बाद भी इन्हें न तो राज्यकर्मी का आधिकारिक दर्जा मिला है और न ही इन्हें किसी प्रकार की समुचित सेवा सुरक्षा प्रदान की गई है। नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यह संघर्ष केवल कुछ अधिकारों की प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर एक कर्मी के आत्मसम्मान, आर्थिक स्थिरता और एक सुरक्षित भविष्य की बहुत बड़ी लड़ाई है।

​जब तक मांग पूरी नहीं, तब तक जारी रहेगा आंदोलन

​मोर्चा के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार को कड़ा संदेश देते हुए मांग की कि बिना किसी विलंब के सभी पात्र डाटा एंट्री ऑपरेटरों, प्रोग्रामरों और आईटी सहायकों को राज्यकर्मी घोषित किया जाए। यदि सरकार समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप ले सकता है। प्रदर्शन में शामिल तमाम कर्मियों ने अंत में एक संकल्प लिया कि वे अपनी इस न्यायसंगत और अधिकार की लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरी तरह मान नहीं लेती। यह शांतिपूर्ण संघर्ष तब तक थमेगा नहीं जब तक उन्हें उनका वास्तविक हक नहीं मिल जाता।