पटना। पूर्वोत्तर राज्यों से बिहार में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों ने पुलिस की बढ़ती निगरानी और चौकसी से बचने के लिए अपने तस्करी का रूट पूरी तरह से बदल लिया है। तस्कर अब पारंपरिक और आसान समझे जाने वाले रेल या मुख्य सड़क मार्गों के बजाय उत्तर प्रदेश को एक सुरक्षित ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बात का सनसनीखेज खुलासा हाल ही में जेपी सेतु टीओपी के पास हुई एक रूटीन वाहन जांच के दौरान हुआ है।

​यूपी नंबर की अर्टिगा से 274 ग्राम हेरोइन बरामद

​पटना पुलिस ने गत 13 सितंबर को वाहन चेकिंग के दौरान उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक अर्टिगा कार को रोका। तलाशी लेने पर कार के अंदर से भारी मात्रा में यानी लगभग 274 ग्राम हेरोइन जैसा संदिग्ध मादक पदार्थ बरामद किया गया। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कार में सवार चार संदिग्ध आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए तस्करों की पहचान संजय निषाद, रवि तिवारी, बंटी पांडेय और मुन्ना साह के रूप में हुई है।

​असम से कुशीनगर और फिर पटना तक का सफर

​पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंधित खेप मूल रूप से असम से चली थी। असम से इसे सीधे बिहार लाने के बजाय पहले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में पहुंचाया गया। इसके बाद, कुशीनगर के तमकुही इलाके में एक स्थानीय तस्कर ने इस पूरी खेप को इन चारों हैंडलर्स को सौंपा था।

​पटना में फाइनेंसर को होनी थी डिलीवरी

​उत्तर प्रदेश से यह चारों आरोपी लग्जरी कार में सवार होकर पटना के लिए निकले थे। इनका मुख्य उद्देश्य राजधानी पटना में बैठे एक अज्ञात ‘फाइनेंसर’ को इस मादक पदार्थ की डिलीवरी देना था। हालांकि, वे अपने मंसूबे में कामयाब हो पाते, उससे पहले ही पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें धर दबोचा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल बंटी पांडेय का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट की साजिश, आर्म्स एक्ट और अवैध शराब तस्करी के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, मुन्ना साह के खिलाफ भी आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है।

​पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी पुलिस

​इस बड़ी कार्रवाई के बाद पटना पुलिस अब इस अंतरराज्यीय ड्रग्स सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए असम से लेकर पटना तक के नेटवर्क को खंगाल रही है। असम में इस खेप को तैयार करने वाले मुख्य सप्लायर, कुशीनगर में इसे रिसीव करने वाले तस्कर और पटना में डिलीवरी लेने वाले फाइनेंसर की शिनाख्त की जा रही है।
​आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि इस नए रूट के जरिए पहले भी कितनी बार अवैध खेप बिहार पहुंचाई जा चुकी है।