Weather news: बिहार में मानसून की सुस्त चाल के कारण आम जनजीवन प्रभावित है। राज्य में अब तक औसत से 46 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है जिसने कृषि क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ा दी है। हालांकि आज शनिवार को प्रदेश के 5 जिलों में मौसम विभाग ने आंधी और भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
बगहा-बेतिया में राहत, बाकी जिलों में उमस
शनिवार की सुबह बगहा और बेतिया के निवासियों के लिए राहत लेकर आई। यहां हुई बारिश और ठंडी हवाओं ने लोगों को चिलचिलाती गर्मी से बड़ी राहत दी है। इसके विपरीत, पटना, सीतामढ़ी और बेतिया के अन्य हिस्सों में दिनभर धूप और चिपचिपी उमस का दौर जारी रहा। पिछले 24 घंटों में बेगूसराय और बगहा में छिटपुट बूंदाबांदी दर्ज की गई। राजधानी पटना में भी आसमान में बादल तो छाए रहेंगे, लेकिन तेज बारिश के आसार फिलहाल कम हैं।
उमस क्यों बनी है मुसीबत?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बिहार में मानसून की सक्रियता के लिए जरूरी मौसमी प्रणालियां फिलहाल कमजोर हैं। वातावरण में निचली सतह पर नमी तो पर्याप्त है, लेकिन बादलों में इतनी ताकत नहीं है कि वे तेज बारिश करवा सकें। हवा की धीमी गति और बादलों की मौजूदगी के कारण उमस का स्तर बढ़ गया है, जिससे पसीना जल्दी नहीं सूखता और बेचैनी महसूस होती है।
20 जुलाई से बदलेगा मिजाज
मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 जुलाई से बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय होगा। इसके बाद राज्य के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है। उम्मीद है कि बारिश का यह नया दौर तापमान में गिरावट लाएगा और लोगों को उमस भरी गर्मी से निजात दिलाएगा।
खेती पर मंडराया संकट
राज्य में मानसून की दगाबाजी चिंता का बड़ा कारण बन गई है। आंकड़ों के मुताबिक अब तक प्रदेश में 316 मिमी बारिश होनी चाहिए थी लेकिन मात्र 202.4 मिमी ही रिकॉर्ड की गई है। बारिश की यह 46 प्रतिशत की कमी सीधा असर खेती-किसानी और जल स्तर पर डाल रही है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल किसान और प्रशासन दोनों ही मानसून के पुनर्जीवित होने की बाट जोह रहे हैं। आने वाले 3 दिन बिहार के मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

