पटना। बिहार की सियासत में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह और उनके सिपहसालार रहे मास्टर कार्तिक के रिश्तों में आई दरार अब चर्चा का विषय बन गई है। हाल ही में मास्टर कार्तिक की बेटी की सगाई में लालू यादव से लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम दिग्गज जुटे, लेकिन जिस चेहरे का सबको इंतजार था अनंत सिंह वही नदारद रहे।

​लालू से पैरवी कर बनवाया था MLC

​यह रिश्ता कितना गहरा था, इसकी बानगी 11 फरवरी 2022 को राबड़ी आवास पर दिखी थी। विधान परिषद चुनाव के लिए रीतलाल यादव का पलड़ा भारी था, लेकिन अनंत सिंह ने तेजस्वी यादव को संदेश भिजवाया कि जीत की जिम्मेदारी हमारी होगी। इसके तुरंत बाद लालू यादव ने कार्तिक कुमार को उम्मीदवार घोषित कर दिया। अनंत सिंह ने न केवल कार्तिक को MLC बनवाया, बल्कि 2022 की महागठबंधन सरकार में उन्हें मंत्री पद तक दिलवाया।

​जेल से जीत की पटकथा लिखने वाले ‘मास्टर’

​पेशे से शिक्षक रहे कार्तिक कुमार (कार्तिक मास्टर) 2015 में VRS लेकर राजनीति में आए। जब-जब अनंत सिंह जेल गए, कार्तिक ने उनके लिए ‘चाणक्य’ की भूमिका निभाई। 2015 में निर्दलीय चुनाव हो या 2020 का राजद के टिकट पर मुकाबला, जेल के बाहर चुनाव प्रबंधन की पूरी कमान कार्तिक के हाथों में थी। यहां तक कि 2022 के उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी की जीत में भी कार्तिक साये की तरह साथ रहे।

​कहां से शुरू हुई दूरियां?

​दोनों के बीच अलगाव की सुगबुगाहट 2024 में शुरू हुई। जब बिहार में सत्ता बदली, तो अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी पाला बदलकर जदयू के साथ चली गईं, लेकिन मास्टर कार्तिक राजद में ही टिके रहे। 2025 के विधानसभा चुनाव में जब अनंत सिंह जदयू के पाले से ताल ठोक रहे थे, तब कार्तिक उनके साथ नजर नहीं आए। बेटी की सगाई में अनंत सिंह का न आना इस कयास को और पुख्ता कर गया।

​कार्तिक बोले- ‘रिश्ता अब भी बरकरार’

​सियासी गलियारों में चर्चा भले ही अलगाव की हो, लेकिन मास्टर कार्तिक इसे केवल एक ‘फेज’ मान रहे हैं। उन्होंने कहा, मैंने खुद जाकर उन्हें निमंत्रण दिया था। हमारे रिश्ते कभी खराब नहीं होंगे। सगाई में उनके भतीजे शामिल हुए थे और उम्मीद है कि जून में होने वाली शादी में अनंत सिंह खुद आशीर्वाद देने आएंगे।
​राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं होता, लेकिन मोकामा के इन दो दिग्गजों की राहें फिलहाल अलग-अलग दिशाओं में जाती दिख रही हैं।