कुंदन कुमार, पटना। बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर चल रही सियासी चर्चाओं के बीच राज्य के मद्य निषेध मंत्री मदन साहनी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस कानून की समीक्षा नहीं करेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि जब जनता का भारी समर्थन इस कानून के साथ है, तो इसे हटाने या समीक्षा करने का कोई औचित्य नहीं बनता है।
महिलाओं को सम्मान दिलाना है मुख्य उद्देश्य
मद्य निषेध मंत्री मदन साहनी ने एक बयान में कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू करने का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान दिलाना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बड़े और जनकल्याणकारी उद्देश्य के लिए नीतीश कुमार ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया था, जिसके सकारात्मक परिणाम आज पूरे राज्य को मिल रहे हैं।
सोशल मीडिया की अफवाहों पर विराम
मंत्री ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि बिहार में जल्द ही शराबबंदी खत्म होने वाली है और शराब की बिक्री फिर से शुरू होगी। उन्होंने साफ किया कि इस तरह की बातें सिर्फ अफवाहें हैं। सरकार की नीति स्पष्ट है और कानून पूरी सख्ती से लागू रहेगा।
93% लोग शराबबंदी के समर्थन में
मदन साहनी ने सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सरकार ने शराबबंदी कानून को लेकर जमीनी स्तर पर सर्वे कराया था। दो बार हुए इन सर्वे में यह बात सामने आई कि राज्य के 93% लोग इस कानून के समर्थन में हैं। जब जनता खुद इस कानून के पक्ष में है, तो सरकार इसकी समीक्षा क्यों करेगी?
राजनीतिक दलों और जनता से सहयोग की अपील
मंत्री ने कहा कि शराबबंदी जैसे सामाजिक अभियान को सफल बनाने के लिए सिर्फ सरकार का प्रयास काफी नहीं है। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों, विपक्षी संगठनों और आम जनता का सक्रिय सहयोग बेहद जरूरी है। समाज के हर वर्ग को मिलकर इसे सफल बनाना चाहिए।
’सुख नशा’ के खिलाफ जागरूकता अभियान
अन्य राज्यों में नशे की स्थिति पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों में शराबबंदी लागू नहीं है, वहां भी अन्य प्रकार के ‘सुख नशा’ की समस्या मौजूद है। हालांकि, वे इस विवाद में ज्यादा गहराई से नहीं जाना चाहते। उन्होंने बताया कि सरकार इस प्रकार के नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रही है।


