पटना। बिहार के सफाईकर्मियों ने अपनी लंबित मांगों और सरकार के आश्वासन के बावजूद समाधान न मिलने पर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। इसी कड़ी में आज राज्यभर के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत कर्मी अपने-अपने मुख्यालयों का घेराव कर प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी पटना में भी मौर्य लोक परिसर के पास सफाईकर्मी प्रदर्शन कर रहे हैं। ‘बिहार लोकल बॉडिज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन के बाद कर्मियों ने 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का भी ऐलान कर दिया है।

​शासन-प्रशासन के रवैये पर असंतोष

​पिछले साल अगस्त में हुई आठ दिवसीय हड़ताल के बाद विभाग के मंत्री की मौजूदगी में कई समझौते हुए थे, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी उन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मोर्चा के प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार का कहना है कि प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संवादहीनता के कारण असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संगठन ने निकाय प्रबंधन से नियमित बैठकें आयोजित करने की मांग की है ताकि बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।

​प्रमुख मांगें: वेतन, पीएफ-ईएसआई और हड़ताल अवधि का वेतन

​कर्मचारियों की मुख्य मांगों में दैनिक और आउटसोर्सिंग कर्मियों को हर महीने समय पर वेतन देना शामिल है। इसके अलावा, वेतन से काटी गई भविष्य निधि (पीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की राशि समय पर खातों में जमा कराने की मांग की गई है। संगठन ने पिछले आंदोलन के दौरान काटी गई राशि को वापस करने, हड़ताल की अवधि को उपस्थिति मानकर वेतन भुगतान करने तथा दंडात्मक कार्रवाई को पूरी तरह से रद्द करने की पुरजोर मांग की है।

पेंशन और स्थानांतरण नीति पर जोर

​मोर्चा ने अनुकंपा के आधार पर लंबित नियुक्तियों के मामलों को जल्द निपटाने और मृत व सेवानिवृत्त कर्मियों के पीएफ-ईएसआई दावों का निपटारा करने की मांग उठाई है। साथ ही, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में स्थानीय निकाय के अंशदान को 10% से बढ़ाकर 14% करने की वकालत की गई है। इसके अलावा, तीन साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मियों की समीक्षा कर सेवा नियमों के तहत पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की भी मांग की गई है।