पटना। बिहार के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब राज्य सरकार लद्दाख की खूबसूरत वादियों में स्थित सिंधु नदी के दर्शन करने के इच्छुक तीर्थयात्रियों को आर्थिक मदद प्रदान करेगी। हाल ही में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में ‘सिंधु दर्शन तीर्थयात्रा वित्तीय सहायता योजना 2026’ को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य आम लोगों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना की मुख्य विशेषताएं और पात्रता
लद्दाख की भौगोलिक स्थिति और वहां की यात्रा के खर्च को देखते हुए कई लोग सिंधु दर्शन से वंचित रह जाते थे। इस योजना के माध्यम से सरकार ने इस बाधा को दूर करने का प्रयास किया है।
- अनुदान राशि: सरकार यात्रा खर्च का 50 प्रतिशत या अधिकतम 20,000 रुपये प्रति व्यक्ति (जो भी कम हो) सहायता के रूप में प्रदान करेगी।
- सीमित सीटें: इस योजना का लाभ प्रति वित्तीय वर्ष केवल 100 तीर्थयात्रियों को ही मिलेगा।
- चयन प्रक्रिया: आवेदकों का चयन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा।
- भुगतान की प्रक्रिया: अनुदान की राशि यात्रा पूर्ण होने और दस्तावेज सत्यापन के बाद सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाएगी।
आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया
इस योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक पर्यटकों को पर्यटन निदेशालय के आवेदन निदेशक के पास अपना आवेदन पत्र जमा करना होगा। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य हैं:
- [Aadhaar Redacted] (पहचान पत्र)
- पैन कार्ड
- बिहार का स्थायी निवास प्रमाण-पत्र
- यात्रा खर्च और यात्रा पूर्ण होने के संबंध में अंडरटेकिंग (घोषणा पत्र) एवं संबंधित बिल।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
बिहार और लद्दाख के बीच की यह पहल केवल पर्यटन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकीकरण का माध्यम है। पर्यटन विभाग का मानना है कि गंगा और सिंधु नदियां भारत की सभ्यता और संस्कृति की धुरी हैं। बिहार, जो गंगा की गोद में बसा है, वहां के लोगों को सिंधु नदी की महिमा से परिचित कराने और सांस्कृतिक विरासतों को करीब से दिखाने के उद्देश्य से इस योजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। यह तीर्थयात्रा न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगी, बल्कि राज्य के निवासियों में भारत की अखंडता और गौरव की भावना को भी और अधिक प्रबल बनाएगी।

