पटना। बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े इस मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामले में सीनियर आईएएस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने कुल छह आईएएस अधिकारियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था, जिसमें हालिया घटना और अब तक की पूरी जांच का ब्योरा सामने आया है।
IAS आनंद किशोर का पेशी से इनकार
समन मिलने के बावजूद आईएएस अधिकारी आनंद किशोर शुक्रवार को पटना स्थित ईडी कार्यालय में पेश नहीं हुए। जांच एजेंसी ने उन्हें 30 अक्टूबर को हाजिर होकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। सूत्रों के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने उनके लिए सवालों की एक लंबी फेरिस्ट तैयार की थी, लेकिन उनके पेश न होने के बाद अब उन्होंने एक सप्ताह का वक्त मांगा है। ईडी द्वारा यह मांग स्वीकार कर लिए जाने के बाद, अब अगले हफ्ते योगेश कुमार सागर के साथ उनकी भी संयुक्त या अलग से पूछताछ होने की संभावना है। इन दोनों अधिकारियों से मुख्य रूप से रिशु श्री के साथ उनके संपर्कों और उनके बीच हुई व्हाट्सएप चैट के आधार पर सवाल-जवाब किए जाने हैं।
अन्य IAS अधिकारियों से मैराथन पूछताछ का दौर
इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी की पूछताछ का सिलसिला पिछले कई दिनों से लगातार जारी है:
- संतोष कुमार मल्ल: गुरुवार को इनसे करीब 8 घंटे तक लंबी पूछताछ की गई। इस दौरान मुख्य रूप से ठेकेदार रिशु श्री से संबंधों, आम की डिलीवरी, दिल्ली के एक अज्ञात युवक से मुलाकात और कथित 7 प्रतिशत कमीशन के एंगल पर सवाल पूछे गए।
- धर्मेंद्र कुमार: बुधवार को इनसे लगभग 6 घंटे तक पूछताछ हुई, जिसमें रिशु श्री से नजदीकियों और ठेकेदार द्वारा स्पॉन्सर या कराई गई विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी ली गई।
- सुनील यादव: मंगलवार को इनसे साढ़े सात घंटे तक पूछताछ की गई।
- अभिलाषा कुमारी शर्मा: सोमवार को यह अधिकारी भी ईडी के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रख चुकी हैं।
इस प्रकार, कुल छह समन किए गए अधिकारियों में से चार से पूछताछ पूरी हो चुकी है, जबकि आनंद किशोर और योगेश कुमार सागर ने समय की मांग की है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद तेज हुई जांच
इस पूरी जांच के तेजी पकड़ने के पीछे पटना हाईकोर्ट का एक कड़ा रुख मुख्य वजह रहा है। मुख्य आरोपी रिशु श्री की जमानत याचिका जब विजिलेंस कोर्ट से खारिज हुई, तो उसने हाईकोर्ट का रुख किया। 15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि रिशु श्री तो महज एक छोटा मोहरा है, और असली सवाल यह है कि इस घोटाले में शामिल बड़े और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या एक्शन लिया गया है। इस तीखे न्यायिक सवाल के बाद ही ईडी ने अपनी जांच के दायरे को व्यापक बनाते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को शिकंजे में लेना शुरू किया।
कौन है मुख्य आरोपी रिशु श्री और क्या है पूरा मामला?
बिहार के सारण जिले के रहने वाले रिशु श्री का नाम वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में सामने आया था, जिस पर विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने भी केस दर्ज किया था। ईडी की शुरुआती जांच के मुताबिक, रिशु श्री सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाता था, जिसके एवज में उसे गोपनीय टेंडर की जानकारियां पहले ही मिल जाती थीं। आरोप है कि वह अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर के नियमों में फेरबदल करवाकर अपने चहेते ठेकेदारों को ठेके दिलवाता था, जिसके बदले भारी कमीशन का लेनदेन होता था।

