पटना। बिहार में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर बनी हुई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार आज यानी रविवार को राज्य में किसी जिले के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। 21 और 22 सितंबर को भी किसी विशेष अलर्ट की संभावना नहीं है। हालांकि 23 सितंबर से राज्य के कई हिस्सों में फिर मौसम बदल सकता है। मौसम विभाग ने 23, 24 और 25 सितंबर को कुछ इलाकों में गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवा की गतिविधि की संभावना जताई है।
पटना समेत कई शहरों में रविवार को उमस और गर्मी का असर रह सकता है। पटना में अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम में बादलों की आवाजाही के बावजूद आज व्यापक बारिश की संभावना कम है।
23 सितंबर से उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-मध्य और दक्षिण-पूर्व बिहार के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। 24 और 25 सितंबर को भी मेघगर्जन और वज्रपात के साथ तेज हवा चलने की संभावना है। ऐसे में खुले मैदानों में रहने वाले लोगों को आकाशीय बिजली के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
सबसे ज्यादा बारिश यहां
पिछले 24 घंटे में बक्सर के बरहामपुर में सबसे ज्यादा 46.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। बेगूसराय के गढ़पुरा में 45.6 मिमी, बक्सर के चक्की में 42.6 मिमी, खगड़िया के परबत्ता में 38.4 मिमी और बक्सर के सिमरी में 36.4 मिमी बारिश हुई। आरा में 25.4 मिमी, चौंगाई में 22.6 मिमी, चेरिया बरियारपुर में 18.6 मिमी, रोसड़ा और केसठ में 18.2-18.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।
सामान्य से 28% कम बारिश
बिहार में मानसून सीजन के दौरान अब तक 650.3 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 919.9 मिमी होती है। इस तरह बारिश सामान्य से 28% कम है। जून में 103.8 मिमी, जुलाई में 227.2 मिमी, अगस्त में 190.4 मिमी और सितंबर में अब तक 128.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
15 जिलों में बाढ़ का असर
बारिश कमजोर पड़ने के बावजूद नदियों के जलस्तर के कारण राज्य के 15 जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 88 प्रखंडों की 576 पंचायतों में करीब 49.72 लाख लोग प्रभावित हैं। प्रभावित इलाकों में 303 सामुदायिक रसोई चल रही हैं, जहां करीब 188.14 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है। वहीं 7 राहत शिविरों में 9,003 लोग रह रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती और गंगा के कुछ स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। 19 सितंबर सुबह वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक का जलस्तर 65 हजार क्यूसेक था और इसमें कमी की प्रवृत्ति रही। बीरपुर में कोसी का जलस्तर 1,46,065 क्यूसेक रहा, जबकि इंद्रपुरी बराज पर सोन का जलस्तर 30,940 क्यूसेक दर्ज किया गया। यानी बारिश की गतिविधि कमजोर होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी अभी जरूरी बनी हुई है।



