बिजनौर के मोहड़ा गांव में 85 वर्षीय गफूरन के निधन की खबर मिलने पर रामलीला कमेटी ने मंचन स्थगित कर दिया. ग्राम प्रधान ऋषिपाल सिंह और कमेटी के सदस्यों ने शोक संतप्त परिवार से मिलकर सामाजिक सौहार्द और आपसी एकता का संदेश दिया.
बिजनौर. मोहड़ा गांव में 12 अक्टूबर को 85 वर्षीय मुस्लिम महिला गफूरन के निधन के बाद रामलीला का मंचन रोक दिया गया. महिला की मौत की सूचना मिलने पर रामलीला कमेटी और ग्रामीणों ने कार्यक्रम स्थगित कर शोकाकुल परिवार के घर पहुंचकर दुख साझा किया. इस पहल को गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सद्भाव की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.
निधन की खबर पर रुका मंचन
मोहड़ा गांव में रामलीला का आयोजन चल रहा था. इसी दौरान इलाज के दौरान गफूरन का निधन हो गया. अस्पताल से परिवार के गांव पहुंचने तक शाम हो चुकी थी और रामलीला के पहले दिन संगीत के साथ कार्यक्रम जारी था.
गफूरन के निधन की खबर गांव में फैलने के बाद ग्राम प्रधान और रामलीला कमेटी को इसकी जानकारी मिली. इसके बाद कमेटी ने सर्वसम्मति से मंचन रोकने का निर्णय लिया. हिंदू समाज के लोग और कमेटी के सदस्य कार्यक्रम छोड़कर गफूरन के परिवार से मिलने पहुंचे और उनके दुख में शामिल हुए.
ग्राम प्रधान ने क्या कहा
ग्राम प्रधान ऋषिपाल सिंह ने बताया कि गफूरन रिश्ते में उनकी बुआ लगती थीं. उनके निधन की सूचना मिलते ही उन्होंने रामलीला कमेटी को बुलाकर मंचन स्थगित करवा दिया. उन्होंने कहा कि गांव में आपसी सद्भाव बना रहना चाहिए और मुस्लिम समुदाय के लोग भी उन्हें पूरा सहयोग देते हैं.
ऋषिपाल सिंह ने लोगों से आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि पहले होली के अवसर पर वे मुस्लिम परिवारों से मिलने जाते थे और ईद पर मुस्लिम समुदाय के लोग उनके यहां आते थे. उन्होंने इस परंपरा को दोबारा शुरू करने की इच्छा जताई.
हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर उन्होंने कहा कि उनके अनुसार इस तरह के मुद्दे वोटों की राजनीति से जुड़े हैं. उन्होंने इस सोच को स्वीकार नहीं करते हुए लोगों से एकता के साथ रहने की अपील की.
बेटे ने जताया आभार
गफूरन के बेटे जाकिर हुसैन ने बताया कि उनकी मां के निधन वाले दिन अस्पताल से घर पहुंचने में शाम हो गई थी. उसी दिन गांव में रामलीला का पहला दिन था और कार्यक्रम में संगीत बज रहा था.
उन्होंने कहा कि निधन की जानकारी ग्राम प्रधान और कमेटी तक पहुंचने के बाद मंचन बंद कर दिया गया, ताकि गांव के लोग उनके परिवार के दुख में शामिल हो सकें. जाकिर हुसैन ने इस संवेदनशील पहल के लिए ग्राम प्रधान और रामलीला कमेटी के सदस्यों का आभार जताया.

