उचाना। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने उचाना में ब्लॉक स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपने निशाने पर न केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लिया, बल्कि कांग्रेस के अंदर रहकर ही पार्टी की जड़ें काटने वाले ‘भीतरघातियों’ को भी आड़े हाथों लिया। हालांकि, इस दौरान उन्होंने कुछ युवा कांग्रेसी नेताओं के काम की जमकर सराहना भी की।

भाजपा को बताया ‘आढ़तियों की दुकान’

पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह ने भाजपा की कार्यशैली पर तीखा हमला बोलते हुए उसे ‘आढ़तियों की दुकान’ करार दिया। उन्होंने कहा, “जिस तरह एक आढ़ती की नजर में केवल उसी किसान की अहमियत होती है जो उसकी दुकान पर फसल लेकर आता है, ठीक उसी तरह भाजपा की नजर में भी सिर्फ वही जनता मायने रखती है जो उसे वोट देती है। बाकी आम जनता की भाजपा की नजरों में कोई अहमियत नहीं है।”

कांग्रेसियों को दो श्रेणियों में बांटा, ‘दगाबाजों’ को सबक सिखाने की सलाह
बीरेंद्र सिंह ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को दो श्रेणियों में विभाजित किया। उन्होंने कहा कि एक वो हैं जो अपने मन में कांग्रेस होने का दावा करते हैं और दूसरे वे जो धरातल पर कांग्रेस में होने की बात कहते हैं। इन दोनों की सोच और काम करने के तरीकों में जमीन-आसमान का अंतर है।

उन्होंने उन नेताओं पर सबसे बड़ा प्रहार किया जो ‘मन में कांग्रेसी’ होने का ढोंग रचकर पार्टी के साथ विश्वासघात करते हैं। बीरेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं को नसीहत दी कि वे ऐसे दगाबाज नेताओं को पहचानें और सही समय पर उन्हें कड़ा सबक सिखाएं।

युवा नेताओं के कामकाज की सराहना

भाषण के दौरान पूर्व मंत्री ने कुमारी शैलजा, दीपेंद्र हुड्डा, विजेंद्र सिंह और आदित्य सुरजेवाला के राजनीतिक कामकाज की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ये युवा नेता पार्टी को मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और कांग्रेस को भविष्य में इनसे काफी उम्मीदें हैं।

सवाल: क्या परिवारवाद से मुक्त नहीं हो पा रही कांग्रेस?

बीरेंद्र सिंह ने जिन युवा कांग्रेसी नेताओं की मंच से सराहना की, यदि उनमें कुमारी शैलजा को छोड़ दिया जाए, तो बाकी सभी नाम किसी न किसी बड़े सियासी घराने के ‘वारिस’ हैं। दीपेंद्र हुड्डा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे हैं, आदित्य सुरजेवाला वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला के सुपुत्र हैं, और विजेंद्र सिंह खुद चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं।
इस बयान के बाद अब हल्के में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या पार्टी में केवल बड़े नेताओं के बेटे ही अच्छा काम कर रहे हैं जिन्हें मंच से सराहा जाए? जनता के बीच यह सवाल फिर तैरने लगा है कि क्या इतने बड़े बदलावों के दावों के बाद भी कांग्रेस ‘परिवारवाद’ के साये से बाहर नहीं निकल पा रही है?

कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त, प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, राष्ट्रीय महासचिव व सांसद सिरसा कुमारी शैलजा, पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, कैथल विधायक आदित्य सुरजेवाला, पूर्व सी.पी.एस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व विधायक जोगीराम सहित कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति रही।

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