उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः अर्थात् सफलता केवल कठोर परिश्रम (उद्यम) करने से ही प्राप्त होती है न कि केवल मन में इच्छा (मनोरथ) करने से। परिश्रम के महत्व को समझाने वाला यह प्रसिद्ध श्लोक छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध उद्योगपति कमल किशोर सारडा के जीवन में अक्षरश: उतरता प्रतीत होता है। कमल किशोर सारडा जिनका आज, 12 जून को जन्म दिवस है वे उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने जीवन के मूल सिद्धांतों को समझकर उसे अपने जीवन का आधार बनाने में सफलता पाई है।

12 जून 1952 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव में एक साधारण परिवार में जन्मे कमल सारडा के सपने और संकल्प बालपन से ही असाधारण थे। एक मारवाड़ी महेश्वरी परिवार में जन्म लेने का प्रभाव यह हुआ कि बचपन से ही उन्हें संस्कार, अनुशासन और परिश्रम का पाठ पढ़ाया गया। परम्परा से प्राप्त यही जीवन मूल्य आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की पहचान बना । बचपन से ही मेधावी कमल किशोर जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे।

पढ़ाई के प्रति उनकी लगन ने उन्हें मैकेनिकल इंजीनियर बनाया लेकिन उनकी असली शिक्षा किताबों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने मानव जीवन को एक खुली किताब की तरह पढ़ा, समझा, सीखा और अपनाया। उद्योग जगत की उपलब्धियों से बहुत बड़ी है कमल किशोर सारडा की सफलता। हर परिस्थिति में धैर्य, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने वाले किशोर ने अपनी शुरुआत 1978-79 में रायपुर की एक संघर्षरत इकाई के चुनौतीपूर्ण दायित्व को संभाल कर किया।

इस इकाई से जुड़े 500 परिवारों की जिम्मेदारी उठाते हुए कमल सारडा में अपनी मेहनत, दूरदृष्टि और संवेदनशीलता से चमत्कार किया। उस मृतप्राय इकाई को पुनर्जीवन दे कर उसे सफलता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचा कर भी दिखाया। उनकी इस सफलता के पीछे सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने हर कर्मचारी को परिवार का हिस्सा माना, न कि केवल एक संसाधन। सच्चे कर्मयोगी सा व्यक्तित्व रखने वाले और प्रदेश के सफल उद्योगपतियों में शीर्षस्थ कमल किशोर सारडा के सरल जीवन ने सभी को प्रभावित किया है।

उनके व्यक्तित्व की बहुत सी विशेषताएँ उनको ख़ास बनाती है। उन्होंने आरम्भ से ही अपने कर्मचारियों को पारिवारिक सदस्य वाला मान दिया, मानव को उन्होंने कभी संसाधन नही माना। अर्जित धन का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल उन्होंने दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने को समझा। उद्योग से इतर उनका पारिवारिक जीवन भी उतना ही प्रेरणादायक है। वे अपने परिवार को महज़ रिश्तों का एक समूह नहीं बल्कि मूल्यों की पाठशाला मानते हैं। कर्मचारी को मातहत नही सहकर्मी समझने की सलाह वे अपने परिवार के सदस्यों को आरम्भ से ही देते आए हैं। इसका ही परिणाम है कि आज समूचे सारडा पारिवार में विनम्र और बड़ा दिल रखने वाला संस्कार देखने को मिलता है।

अनुशासन कमल किशोर सारडा के जीवन का अभिन्न अंग रहा है। योग, प्राणायाम और विपश्यना ध्यान को उन्होंने अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया। यही सब उनके स्वास्थ्य का आधार, मानसिक संतुलन का कारण और सकारात्मक सोच के स्रोत बने। एक सफल उद्योगपति होने के बावजूद उनका जीवन बेहद संतुलित और सादगीपूर्ण है।

नम्रता,कमल सारडा का एक उल्लेखनीय पक्ष है। बड़ी से बड़ी उपलब्धियों के बावजूद उनके व्यवहार में कभी अहंकार नहीं झलकता। वे हर व्यक्ति से समान भाव से मिलते हैं चाहे वह एक सामान्य कर्मचारी हो या कोई वरिष्ठ अधिकारी। उनके इसी गुण की वजह से सभी ने उनकी अगुवाई को सहर्ष स्वीकारा है। संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और नए स्थानों की यात्रा करने जैसे उनके व्यक्तिगत शौक भी उनके व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाते हैं। ये शौक मनोरंजन के अलावा उनके निरंतर सीखने और खुद को बेहतर बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

कमल सारडा का जीवन इस बात को प्रमाणित करने वाला बन गया है कि सफलता का असली अर्थ केवल ऊँचाइयाँ छूना नहीं बल्कि जमीन से जुड़े रहना भी है। उन्होंने उद्योग के साथ-साथ समाज और पर्यावरण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाई है। उनकी सोच हमेशा समावेशी रही है-जहाँ विकास के साथ-साथ संवेदनशीलता भी हो। कमल सारडा की समाज सेवा की भावना केवल CSR तक सीमित नहीं है। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए “वचन डेयरी” की स्थापना की। वचन डेयरी न केवल दूध खरीदती है, बल्कि पशुओं के लिए मुफ्त चिकित्सा, सस्ता चारा और डेयरी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराती है।कमल सारडा का कहना है -“हमारा लक्ष्य सिर्फ उद्योग चलाना नहीं, बल्कि गाँवों की आर्थिक रीढ़ को मज़बूत बनाना है।”


कमल सारडा की सामाजिक प्रतिबद्धता और सेवा भावना उन्हें एक अलग पहचान देती है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जो काम किए हैं उसे वे समाज के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन मानते हैं। आज जब हम उनके जन्म दिन के अवसर पर समग्रता से उनके जीवन को देखते हैं तो उनकी सफलता की कहानी एक प्रेरणा पुंज बनकर सामने आती है। ऐसी प्रेरणा जो हमें सिखाती है कि मेहनत करने का जज़्बा, अनुशासन का पालन और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता इंसान को सफलता की मनचाही ऊँचाईयों तक पहुँचा सकता है।कमल किशोर सारडा एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो इस बात को बारम्बार प्रमाणित करते हैं कि उद्योग केवल व्यापार नहीं बल्कि समाज निर्माण का माध्यम भी हो सकता है। उनका जीवन एक संदेश है।“सफलता वही है, जो दूसरों के जीवन में भी खुशियाँ और उम्मीदें लेकर आए।” आज उनके जन्मदिवस पर यही कामना है कि उनका यह प्रेरणादायी सफर यूँ ही आगे बढ़ता रहे और आने वाली अनंत पीढ़ियों का वे इसी तरह मार्गदर्शन करते रहें।

संदीप अखिल सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़./लल्लूराम डॉट कॉम