रांची। झारखंड के पुलिस थानों में CCTV कैमरे नहीं लगाए जाने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में DGP तदाशा मिश्रा को अवमानना नोटिस जारी किया है। वहीं, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को शो-कॉज नोटिस जारी करते हुए 14 अक्टूबर तक कंप्लायंस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य सचिव को भी कंप्लायंस के संबंध में एफिडेविट दाखिल करने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान DGP खुद अदालत में मौजूद थीं।
चार बार निर्देश के बावजूद नहीं हुआ अनुपालन
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि थानों में CCTV लगाने को लेकर अदालत की ओर से चार बार निर्देश दिए जा चुके हैं, इसके बावजूद उनका पालन नहीं किया गया।हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार के मुताबिक, मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
2018 के बाद 450 से ज्यादा कस्टोडियल डेथ का जिक्र
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2018 के बाद राज्य में 450 से ज्यादा कस्टोडियल डेथ के मामले सामने आए हैं। ऐसे में पुलिस थानों में CCTV कैमरे नहीं लगाया जाना गंभीर विषय है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि CCTV लगाने के लिए कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
सरकार पर आदेश के अनुपालन में टालमटोल का आरोप
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि थानों में CCTV लगाने के आदेश के अनुपालन के मामले में राज्य सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, शपथ पत्र में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के बजाय मामले को टालने की कोशिश की जा रही है।
कोर्ट ने DGP की उस स्थिति पर भी नाराजगी जताई, जिसमें पुलिस थानों में CCTV लगाने की जिम्मेदारी गृह विभाग पर डाले जाने की बात कही गई थी। अदालत ने इसे जिम्मेदारी से बचने वाला रवैया माना।
पिछली सुनवाई में भी जारी हुआ था नोटिस
इससे पहले भी हाईकोर्ट ने आदेश का अनुपालन नहीं होने पर DGP को अवमानना नोटिस जारी किया था। अदालत ने पूछा था कि आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
तरुण महतो प्रकरण से जुड़ा है मामला
दरअसल, वर्ष 2024 के चुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के इचागढ़ प्रत्याशी रहे तरुण महतो को रात में इचागढ़ पुलिस द्वारा थाने ले जाने और कथित तौर पर मारपीट किए जाने का मामला सामने आया था।
तरुण महतो की पत्नी ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उनके पति के साथ थाने में थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हुए कथित तौर पर प्रताड़ना की गई। इसी पत्र पर हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस थानों में CCTV कैमरों की व्यवस्था का मुद्दा भी सामने आया।


