भुवनेश्वर: ओडिशा के आदिवासी बहुल जिले कोरापुट की पहाड़ियों में उगने वाली खास ‘स्पेशल्टी कॉफी’ अब वैश्विक मंच पर भारत की पहचान बनने जा रही है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को आयोजित होने जा रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और पत्रकारों को ओडिशा के इस समृद्ध स्थानीय उत्पाद का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा ।

ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंच रहे करीब 1,200 से 1,300 अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों और प्रतिनिधियों के लिए एक विशेष ‘गुड्डी बैग’ (Hamper/Goodie Bag) तैयार किया गया है। भारत की विविधता और समृद्ध हस्तशिल्प व कृषि उत्पादों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस बैग में देशभर से चुने गए 9 विशेष उत्पादों को शामिल किया गया है, जिनमें ओडिशा की 100 प्रतिशत अरेबिका (Arabica) ट्राइबल कॉफी प्रमुख आकर्षण है।
एक पत्रकार ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के जरिए इस विशेष हैंपर की झलक दिखाई और इसे भारत के स्थानीय उत्पादों का उत्सव करार दिया। उन्होंने ओडिशा की कोरापुट कॉफी की मनमोहक सुगंध की तारीफ करते हुए इसे भारत सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) पहल का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
इस क्यूरेटेड हैंपर में ओडिशा की कॉफी के अलावा भारत के कई अन्य राज्यों की पहचान को भी शामिल किया गया है:
बिहार: प्रोटीन से भरपूर प्रसिद्ध ‘सत्तू’ और लोकप्रिय ‘मखाना’।
गुजरात: हस्तनिर्मित ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल (Block-printed Stole)।
अन्य वस्तुएं: एक प्रीमियम कॉफी मग और इन-बिल्ट चार्जिंग पोर्ट से लैस एक आधुनिक टोट बैग (Tote Bag)।
यह विशेष हैंपर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों के सामने भारत के क्षेत्रीय उत्पादों की विविधता और गुणवत्ता को उजागर करने के इरादे से तैयार किया गया है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के व्यापक मीडिया कवरेज को आसान बनाने के लिए भारत मंडपम में एक अत्याधुनिक ‘इंटरनेशनल मीडिया सेंटर’ स्थापित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स के विस्तारित सदस्य देशों और साझेदार देशों के शीर्ष नेता व प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हो रहे हैं। ऐसे में कोरापुट की कॉफी का अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचना ओडिशा के आदिवासी किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।



