लखनऊ. बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने प्रदेश में बढ़ती पराली जलाने की घटनाओं और प्रदूषण को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा. बृजभूषण ने आरोप लगाया कि प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, उन्होंने प्रदेश और देश को लावारिस छोड़ दिया है.
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हेलीकॉप्टर से दिखीं जगह-जगह जलती पराली
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि हेलीकॉप्टर से यात्रा के दौरान उन्हें पूरे प्रदेश में कई जगह खेतों में पराली जलती दिखाई दी. उन्होंने कहा कि गांवों में शाम के समय निकलने पर चारों तरफ खेतों में आग नजर आती है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है.
पटाखों से ज्यादा पराली को बताया जिम्मेदार
पूर्व सांसद ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल दिवाली के पटाखों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. पटाखों, भट्ठों और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण के मुकाबले पराली जलाने से बहुत ज्यादा प्रदूषण फैलता है. उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों, वाहनों और ईंट-भट्ठों के साथ पराली जलाने पर भी ध्यान देने की जरूरत है.
मिट्टी की उर्वरा शक्ति को होता है नुकसान
बृजभूषण ने कहा कि पराली जलाने से खेत की उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचता है. इससे जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है. उन्होंने दावा किया कि एक बीघे में पराली जलने से निकलने वाला धुआं बहुत ज्यादा होता है. प्रशासन चाहे तो 15 से 20 दिन बाद भी जांच कर पता लगा सकता है कि किस खेत में पराली जलाई गई थी.
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किसानों को मशीनें देने और ड्रोन से निगरानी की मांग
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि किसानों को जागरूक करने की जरूरत है. उन्हें ऐसे कृषि यंत्र उपलब्ध कराने चाहिए, जिनसे पराली को खेत में ही मिलाया जा सके. उन्होंने ड्रोन से निगरानी का भी सुझाव दिया. उनका कहना है कि नियम और व्यवस्था होने के बावजूद प्रशासन उनका पालन नहीं करा रहा है. उन्होंने सरकार से पराली जलाने पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की.
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