रामकुमार यादव, सरगुजा। अंबिकापुर में वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिली। डबरीपानी इलाके में 20 अवैध मकानों को जमींदोज कर दिया गया। भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे की शिकायत के बाद जिला प्रशासन, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी सवाल उठाए हैं।

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20 अवैध मकानों पर चला बुलडोजर (Bulldozer Action)

दरअसल, अंबिकापुर के सीमावर्ती डबरीपानी इलाके में शुक्रवार सुबह प्रशासनिक कार्रवाई का बड़ा नजारा देखने को मिला। वन भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया। भारी पुलिस बल और चार बुलडोजरों की मौजूदगी में 20 अवैध मकानों को ढहा दिया गया।

बताया जा रहा है कि डबरीपानी क्षेत्र में लंबे समय से बाहरी लोगों द्वारा वन विभाग की संरक्षित भूमि पर कब्जा कर पक्के और कच्चे मकान बना लिए गए थे। मामले की शिकायत वरिष्ठ भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने प्रशासन से की थी। शिकायत के बाद वन विभाग ने जांच की और फिर कार्रवाई की रणनीति तैयार की गई।

कार्रवाई के दौरान पूरा इलाका छावनी में तब्दील रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में एक-एक कर सभी अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कब्जाधारियों को पहले ही नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तय समय सीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इसके बाद शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की।

सिर्फ गरीब और आम नागरिकों पर कार्रवाई करना उचित नहीं – टीएस सिंहदेव

इस पूरी कार्रवाई को लेकर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भी सवाल खड़े किए हैं। टीएस सिंहदेव ने कहा कि सिर्फ गरीब और आम नागरिकों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों और भू-माफियाओं पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने कथित रूप से लोगों से डेढ़ लाख रुपये तक लेकर सरकारी जमीन की बिक्री की।

फिलहाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी और वन भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बड़ी कार्रवाई के बाद भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप मचा हुआ है। डबरीपानी में हुई इस कार्रवाई ने प्रशासन के सख्त तेवर साफ कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच का दायरा उन लोगों तक भी पहुंचता है या नहीं, जिन पर सरकारी जमीन बेचने के आरोप लग रहे हैं।

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