शिखिल ब्यौहार, भोपाल।  कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के पक्ष में पूरी कैबिनेट एकजुट हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद एमपी कैबिनेट ने उनके खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर 45 मिनट तक लंबी चर्चा हुई। अधिकांश मंत्रियों का तर्क था कि विजय शाह अपने बयान के बाद 3-4 बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं, इसलिए अब अभियोजन का औचित्य नहीं बनता। 

सरकार ने फैसला लेने से पहले अटॉर्नी जनरल की कानूनी राय भी ली थी। गौरतलब है कि विजय शाह ने 11 मई को महू के हलमा कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर पर ब्रीफिंग देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद मानपुर थाने में FIR दर्ज हुई।  19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में फैसला लेने को कहा था, फिर मई में चार सप्ताह का समय दिया। लेकिन 23 जुलाई की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सरकार ने अब तक कोई दस्तावेज दाखिल ही नहीं किया, जिस पर CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताई थी। अब कैबिनेट के इस फैसले के मिनट्स मुख्यमंत्री के जरिए राज्यपाल मंगूभाई पटेल के पास भेजे जाएंगे।

मामले पर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बयान 

विजय शाह को हटाने में क्यों पसीने आ रहे..यह एक देशद्रोह का मामला है। सोफिया कुरैशी के खिलाफ जो कहा था वो पूरे देश के एक-एक नागरिक का अपमान है। देश के अपमान करने वाले मंत्री का साथ दे रही है बीजेपी। भाजपा देश विरोधी.. सुप्रीम कोर्ट के नाराजगी तक को नहीं समझ पा रही।  भाजपा संविधान विरोधी विचारधारा इनकी उजागर होती है। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का हम इंतजार कर रहे हैं। 

मामले पर बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता विवेक गुप्ता का बयान 

कांग्रेस का इस तरह की मांग करना उसका आदिवासी विरोध का एक चेहरा करता है। विजय शाह ने मामले में कई बार खुले तौर पर माफी मांग भी चुके और स्पष्टीकरण भी दे चुके हैं, हम कोर्ट के निर्णय का भी सम्मान करते हैं कैबिनेट के अपने अधिकार हैं। 

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